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चलती मेट्रो में बिगड़ जाए तबीयत तो तुरंत मिलेगी मदद, जानिए DMRC हेल्पलाइन नंबर और इमरजेंसी अलार्म का सही तरीका

हर दिन लाखों यात्री दिल्ली-एनसीआर की लाइफलाइन कही जाने वाली दिल्ली मेट्रो (DMRC) से सफर करते हैं। चाहे राजीव चौक, कश्मीरी गेट जैसे व्यस्ततम इंटरचेंज स्टेशन हों या नोएडा-गुड़गांव रूट की लंबी दूरी, सफर के दौरान कई बार भीड़, डिहाइड्रेशन, लो ब्लड प्रेशर या किसी पुरानी बीमारी के चलते यात्रियों की तबीयत अचानक बिगड़ जाती है। कई मामलों में यात्री चक्कर खाकर गिर जाते हैं या सांस लेने में तकलीफ जैसी गंभीर स्थिति बन जाती है। ऐसे पलों में आसपास मौजूद सहयात्री अक्सर घबरा जाते हैं कि चलती ट्रेन के भीतर मदद की गुहार कैसे लगाई जाए। हकीकत यह है कि दिल्ली मेट्रो का सुरक्षा और राहत तंत्र पूरी तरह हाई-टेक है। कोच के भीतर से लेकर प्लेटफॉर्म तक तुरंत मेडिकल सपोर्ट पहुंचाने के लिए पुख्ता प्रोटोकॉल बनाए गए हैं, बस यात्रियों को यह पता होना चाहिए कि सही बटन कब और कैसे दबाना है।

कोच के भीतर तबीयत बिगड़े तो तुरंत दबाएं पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म (PEB)

यदि आप ट्रेन के डिब्बे के अंदर हैं और आपके साथ सफर कर रहे किसी यात्री को तत्काल मेडिकल मदद की जरूरत है, तो सबसे तेज और सीधा तरीका 'पैसेंजर इमरजेंसी अलार्म' या 'पैसेंजर इमरजेंसी कम्यूनिकेशन यूनिट' (PEB / PECU) है। मेट्रो के हर कोच में दरवाजों के ठीक बगल में यह लाल रंग का इमरजेंसी बटन या पुश-टू-टॉक माइक लगा होता है।

  • कॉल करने का तरीका: इस बटन को दबाते ही सीधे ट्रेन ऑपरेटर (लोको पायलट) से टू-वे वॉयस कम्यूनिकेशन शुरू हो जाता है।

  • क्या जानकारी दें: बटन दबाने के बाद माइक पर साफ आवाज में लोको पायलट को बताएं कि आप किस कोच में हैं और मरीज की क्या स्थिति है (जैसे बेहोशी, सीने में दर्द आदि)।

  • ट्रेन नहीं रुकेगी, अगले स्टेशन पर तैयार रहेगा मेडिकल स्टाफ: कई यात्रियों में यह गलतफहमी होती है कि अलार्म दबाने से ट्रेन टनल या एलिवेटेड ट्रैक पर बीच में ही अचानक रुक जाएगी। ऐसा बिल्कुल नहीं होता। ड्राइवर तुरंत अगले आने वाले स्टेशन के स्टेशन कंट्रोलर (SC) को इमरजेंसी मैसेज फ्लैश करता है। जैसे ही ट्रेन अगले स्टेशन के प्लेटफॉर्म पर रुकती है, वहां पहले से व्हीलचेयर, फर्स्ट-एड किट और सीआईएसएफ (CISF) के सुरक्षा जवान दरवाजे पर तैयार मिलते हैं, जो मरीज को तुरंत बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार देते हैं।

DMRC का आधिकारिक 24×7 हेल्पलाइन नंबर और तत्काल फोन सपोर्ट

यदि आप कोच के भीतर कॉल बटन तक नहीं पहुंच पा रहे हैं या प्लेटफॉर्म और स्टेशन परिसर में किसी तरह की परेशानी होती है, तो DMRC का आधिकारिक हेल्पलाइन नंबर चौबीसों घंटे काम करता है:

  • दिल्ली मेट्रो 24×7 हेल्पलाइन नंबर: 155370 (यह टोल-फ्री नंबर किसी भी मोबाइल या लैंडलाइन नेटवर्क से तुरंत कनेक्ट होता है)।

  • महिला हेल्पलाइन नंबर: 011-23415440 (महिला यात्रियों की किसी भी आपातकालीन स्थिति या मेडिकल सहायता के लिए विशेष लाइन)।

  • सुरक्षा नियंत्रण हेल्पलाइन (CISF Control Room): 155655 (प्लेटफॉर्म या स्टेशन पर सुरक्षा और त्वरित रेस्क्यू के लिए)।

हेल्पलाइन पर फोन करते ही कंट्रोल रूम का एग्जीक्यूटिव आपकी वर्तमान लोकेशन, मेट्रो लाइन (रेड, येलो, ब्लू, आदि) और ट्रेन का दिशा-निर्देश नोट करता है और जीपीएस के जरिए ट्रैक करके निकटतम स्टेशन की त्वरित प्रतिक्रिया टीम (QRT) को एक्टिवेट कर देता है।

स्टेशन पर मिलने वाली मेडिकल सुविधाएं: फर्स्ट-एड से लेकर बड़े अस्पताल तक का नेटवर्क

जब किसी बीमार यात्री को ट्रेन से स्टेशन पर उतारा जाता है, तो वहां तत्काल राहत के लिए कई स्तर पर व्यवस्था होती है। प्रत्येक मेट्रो स्टेशन के 'स्टेशन कंट्रोल रूम' (SCR) में बुनियादी प्राथमिक उपचार किट, ग्लूकोज, पेन-रिलीफ और बीपी जांच के साधन हमेशा मौजूद रहते हैं। स्टेशन स्टाफ और सीआईएसएफ के जवानों को आपातकालीन सीपीआर (CPR) और बेसिक लाइफ सपोर्ट देने की विशेष ट्रेनिंग दी जाती है। यदि मरीज की हालत गंभीर होती है, तो स्टेशन कंट्रोलर बिना 1 मिनट का समय गंवाए सरकारी कैट्स एम्बुलेंस (102/108) या नजदीकी प्राइवेट हॉस्पिटल की एम्बुलेंस को कॉल करता है। दिल्ली मेट्रो का हर प्रमुख स्टेशन अपने नजदीकी सरकारी या बड़े प्राइवेट अस्पतालों के साथ टाई-अप में रहता है, जिससे गंभीर स्थिति में मरीज को गोल्डन ऑवर (Golden Hour) के भीतर आईसीयू या इमरजेंसी वार्ड तक बिना देरी के पहुंचाया जा सके।

सहयात्रियों के लिए जरूरी गोल्डन रूल्स: मेडिकल इमरजेंसी में क्या करें और क्या न करें

यदि आपकी आंखों के सामने किसी यात्री की तबीयत बिगड़ती है, तो एक जागरूक नागरिक के तौर पर कुछ सावधानियां बरतनी बेहद जरूरी हैं:

  • मरीज के इर्द-गिर्द भीड़ न लगाएं: मेट्रो कोच में पहले से एसी और ऑक्सीजन का एक तय वेंटिलेशन फ्लो होता है। मरीज के चारों ओर घेरा बनाकर खड़े न हों, ताकि उसे ताजी हवा मिलती रहे।

  • मरीज को लिटाएं: यदि यात्री को चक्कर आ रहा है या वह बेहोश हो रहा है, तो उसे सीट पर सीधा लिटा दें और पैरों को हल्का सा ऊपर उठा दें, ताकि दिमाग तक ब्लड सर्कुलेशन सुचारू हो सके।

  • बिना सोचे-समझे पानी न पिलाएं: अगर मरीज पूरी तरह बेहोश है, तो उसके मुंह में जबरन पानी या दवा डालने की गलती न करें, क्योंकि इससे पानी सांस की नली में जा सकता है।

  • सोशल मीडिया पर वीडियो बनाने से बचें: अक्सर लोग ऐसी स्थिति में फोन निकालकर वीडियो बनाने लगते हैं। इसके बजाय सबसे पहले आगे बढ़कर PEB बटन दबाएं या तुरंत 155370 पर कॉल करके सिस्टम को सूचित करें। आपका यह एक त्वरित कदम किसी इंसान की जान बचा सकता है।

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