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CIBIL स्कोर 750+ होने पर भी बैंक ने लोन रिजेक्ट कर दिया? जानिए वे 7 बड़े कारण जिनसे अटक जाती है एप्लीकेशन

अक्सर लोगों का मानना होता है कि यदि उनका क्रेडिट स्कोर (CIBIL Score) 750 या 800 से ऊपर है, तो बैंक आंख मूंदकर उनका लोन पास कर देगा। हालांकि, कई बार उत्कृष्ट क्रेडिट हिस्ट्री होने के बावजूद लोन एप्लीकेशन सीधे रिजेक्ट हो जाती है या अंडरराइटिंग स्टेज पर अटक जाती है। क्रेडिट स्कोर केवल यह दर्शाता है कि आपने अतीत में लिए गए कर्जों का भुगतान कितनी ईमानदारी से किया है, लेकिन यह इस बात की गारंटी नहीं देता कि आप भविष्य में एक नया कर्ज चुकाने में पूरी तरह सक्षम हैं या नहीं। बैंक और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां (NBFCs) लोन स्वीकृत करने से पहले आवेदक की वर्तमान आय, बचत, मौजूदा देनदारियों और रोजगार की स्थिरता जैसे कई अन्य कड़े पैमानों की गहन जांच करते हैं।

हाई सिबिल स्कोर के बाद भी लोन रिजेक्ट होने के 7 प्रमुख कारण

प्रमुख कारण बैंक के रिजेक्शन का आधार प्रभाव
1. अधिक FOIR (ऋण-आय अनुपात) मौजूदा ईएमआई कुल मासिक आय का 50% से अधिक होना नई ईएमआई चुकाने के लिए बचत न बचना
2. जॉब और आय में अस्थिरता बार-बार कंपनी बदलना या न्यूनतम कार्य अनुभव न होना वित्तीय अनिश्चितता का जोखिम
3. क्रेडिट रिपोर्ट में 'Settled' फ्लैग पुराने किसी लोन या कार्ड का डिस्काउंट पर सेटलमेंट सिबिल सुधरने के बाद भी विश्वसनीयता पर दाग
4. कम समय में बार-बार हार्ड इन्क्वायरी एक साथ कई बैंकों में एक ही समय लोन के लिए अप्लाई करना 'क्रेडिट हंग्री' (कर्ज का भूखा) व्यवहार दिखना
5. प्रॉपर्टी या कानूनी अड़चनें (होम लोन) संपत्ति का अप्रूव्ड नक्शा या मालिकाना हक स्पष्ट न होना कोलेटरल सुरक्षा में कमी
6. बैंक स्टेटमेंट में रेड फ्लैग्स चेक बाउंस, ईसीएस बाउंस या सैलरी नकद में आना नकदी प्रवाह की कमजोर स्थिति
7. गारंटर या को-बॉरोअर का खराब रिकॉर्ड दूसरे के लोन में गारंटर बनना जहां डिफ़ॉल्ट हुआ हो संयुक्त वित्तीय जिम्मेदारी में चूक

1. उच्च एफओआईआर (Fixed Obligation to Income Ratio)

लोन रिजेक्शन का सबसे बड़ा कारण आवेदक का 'ऋण-आय अनुपात' (FOIR) होता है। यदि आपकी मासिक आय ₹1,00,000 है और आप पहले से चल रहे होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन के लिए हर महीने ₹55,000 ईएमआई भर रहे हैं, तो आपका एफओआईआर 55% है। अधिकांश बैंक 40% से 50% से अधिक के एफओआईआर पर नए लोन की अनुमति नहीं देते। भले ही आपका सिबिल स्कोर 800 हो, बैंक यह देखता है कि घर का खर्च निकालने के बाद आपके पास नई ईएमआई भरने के लिए पर्याप्त नकदी नहीं बचेगी।

2. रोजगार और आय की स्थिरता की कमी

बैंक नियमित और विश्वसनीय आय प्रवाह को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हैं। यदि कोई वेतनभोगी कर्मचारी पिछले एक साल में 2 या 3 बार नौकरियां बदल चुका है, या प्रोबेशन पीरियड पर है, तो बैंक उसे जोखिम भरा मान सकते हैं। स्व-रोजगार (Self-employed) और व्यवसायियों के मामले में पिछले 2 से 3 वर्षों के आयकर रिटर्न (ITR), बैलेंस शीट और प्रॉफिट-मार्जिन में निरंतर वृद्धि दिखना जरूरी होता है। यदि बिजनेस में घाटा या टर्नओवर में भारी गिरावट दर्ज है, तो सिबिल स्कोर मददगार नहीं बनता।

3. क्रेडिट रिपोर्ट में 'Written Off' या 'Settled' का दाग

कई बार लोग किसी पुराने क्रेडिट कार्ड या पर्सनल लोन का पूरा भुगतान न करके बैंक से वन-टाइम सेटलमेंट (OTS) करा लेते हैं। इसके बाद समय बीतने पर सिबिल स्कोर 750 तक सुधर जाता है, लेकिन क्रेडिट ब्यूरो की विस्तृत रिपोर्ट (CIR) में वह खाता हमेशा के लिए 'Settled' या 'Written-Off' के रूप में दर्ज रहता है। क्रेडिट मैनेजर इस विवरण को देखते ही एप्लीकेशन को असुरक्षित मानकर खारिज कर देते हैं।

4. 'क्रेडिट हंग्री' बर्ताव और बार-बार हार्ड इन्क्वायरी

जब कोई व्यक्ति एक ही महीने में 4-5 अलग-अलग बैंकों या लोन ऐप्स में पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड के लिए आवेदन करता है, तो हर बैंक उसकी सिबिल रिपोर्ट खींचता है। इसे 'हार्ड इन्क्वायरी' कहा जाता है। कम अंतराल में दर्जनों हार्ड इन्क्वायरी दिखने पर एल्गोरिदम आवेदक को वित्तीय संकट में फंसा या 'क्रेडिट हंग्री' मान लेता है, जिससे लोन प्रोसेसिंग सिस्टम अपने आप आवेदन को रिजेक्ट कर देता है।

5. बैंक स्टेटमेंट में बाउंस और कैश सैलरी की समस्या

अंडरराइटिंग टीम आवेदक के पिछले 6 महीने के बैंक स्टेटमेंट की बारीकी से जांच करती है। यदि खाते में न्यूनतम बैलेंस (MAB) न रहने पर पेनल्टी लगी हो, खाते से कटी कोई ईएमआई या चेक बाउंस हुआ हो, या वेतन खाते में सीधे एनईएफटी/आरटीजीएस के बजाय नकद (Cash) जमा होता हो, तो बैंक इसे आय का वैध और पारदर्शी प्रमाण नहीं मानते।

6. प्रॉपर्टी के दस्तावेजों और लीगल वेरिफिकेशन में कमी

विशेष रूप से होम लोन या लोन अगेंस्ट प्रॉपर्टी (LAP) के मामलों में आवेदक की वित्तीय क्षमता के साथ-साथ गिरवी रखी जाने वाली संपत्ति की वैधता मुख्य आधार होती है। यदि संपत्ति का लेआउट स्थानीय विकास प्राधिकरण (जैसे DDA, LDA, NOIDA) से स्वीकृत नहीं है, जमीन फ्रीहोल्ड नहीं है, या 30 साल की टाइटल सर्च रिपोर्ट में किसी पिछले वारिस का विवाद सामने आता है, तो बैंक लोन देने से तुरंत इनकार कर देता है।

7. सह-आवेदक या गारंटर की पुरानी चूक

यदि आपने किसी रिश्तेदार या मित्र के लोन में 'गारंटर' (Guarantor) के रूप में हस्ताक्षर किए थे और उस मुख्य कर्जदार ने किस्तें चुकाने में देरी की है, तो उसका सीधा नकारात्मक प्रभाव आपकी प्रोफाइल पर भी पड़ता है। इसी तरह, यदि आप पति-पत्नी मिलकर जॉइंट होम लोन के लिए आवेदन कर रहे हैं और को-एप्लिकेंट का वित्तीय रिकॉर्ड कमजोर है, तो संयुक्त पात्रता प्रभावित हो जाती है।

लोन रिजेक्शन से बचने के लिए क्या सावधानियां बरतें?

नया लोन अप्लाई करने से पहले इन व्यावहारिक कदमों पर ध्यान दें:

  • एफओआईआर को 40% से नीचे लाएं: यदि पहले से छोटे पर्सनल लोन या क्रेडिट कार्ड ईएमआई चल रही हैं, तो नए बड़े लोन (जैसे होम लोन) से पहले उन छोटे कर्जों का प्री-पेमेंट कर दें।

  • मल्टीपल एप्लीकेशन से बचें: एक साथ कई बैंकों में अप्लाई करने के बजाय पहले किसी एक बैंक से अपनी पात्रता (Eligibility) की सैद्धांतिक जांच करवाएं।

  • क्रेडिट रिपोर्ट का पूरा ऑडिट करें: अपनी विस्तृत सिबिल रिपोर्ट निकालें और देखें कि कहीं किसी बंद हो चुके खाते की गलत एंट्री तो नहीं दर्ज है। यदि कोई तकनीकी त्रुटि है, तो सिबिल के ऑनलाइन डिस्प्यूट पोर्टल पर शिकायत दर्ज कराएं।

  • आय का पक्का डिजिटल रिकॉर्ड रखें: सैलरी हमेशा अधिकृत बैंकिंग चैनल से लें और व्यवसाय के मामले में समय पर सही टैक्स ऑडिट व आईटीआर दाखिल करें।

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