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सूरत का हीरा कारीगर रूसी सेना में शामिल होने के बाद 4 महीने से लापता, बेबस परिवार ने केंद्र सरकार से लगाई वतन वापसी की गुहार

गुजरात के सूरत में हीरा तराशने का काम करने वाला एक भारतीय युवक रूस-यूक्रेन युद्ध के मोर्चे पर रूसी सेना में शामिल होने के बाद पिछले चार महीने से रहस्यमय तरीके से लापता है। युवक के लंबे समय से संपर्क विहीन होने के चलते उसके गृह नगर सूरत में रहने वाले परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है। परिजनों ने अब प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) और विदेश मंत्रालय (MEA) से हस्तक्षेप की भावुक अपील करते हुए उसे सुरक्षित भारत वापस लाने की गुहार लगाई है।

प्राप्त जानकारी के अनुसार, आर्थिक तंगी और बेहतर भविष्य के सुनहरे सपनों के जाल में फंसकर युवक कथित तौर पर धोखेबाज एजेंटों के जरिए रूस पहुंचा था। वहां उसे सेना में सुरक्षा सहायक या गैर-लड़ाकू हेल्पर के रूप में उच्च वेतन वाली नौकरी का झांसा दिया गया था, लेकिन जमीनी हकीकत इसके बिल्कुल उलट निकली। युद्ध क्षेत्र में अग्रिम मोर्चे पर तैनाती के बाद से ही उसका अपने परिवार से कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है।

अच्छी नौकरी और बेहतर कमाई का सपना दिखाकर एजेंटों ने भेजा था रूस

लापता युवक सूरत के एक हीरा कारखाने में साधारण कारीगर के तौर पर काम करता था। डायमंड उद्योग में आई हालिया मंदी और पारिवारिक आर्थिक दिक्कतों के बीच वह बेहतर रोजगार के विकल्पों की तलाश में था। इसी दौरान वह स्थानीय और अंतरराष्ट्रीय मानव तस्कर एजेंटों के संपर्क में आया। एजेंटों ने उसे आश्वासन दिया था कि उसे रूसी सेना में किसी सैन्य युद्ध में भाग नहीं लेना होगा, बल्कि उसे मॉस्को या सुरक्षित इलाकों में सहायक, ड्राइवर या कैंटीन स्टाफ जैसी गैर-सैन्य सेवाओं में भारी-भरकम वेतन पर तैनात किया जाएगा।

लाखों रुपये की व्यवस्था करके युवक पर्यटक वीजा और वर्क परमिट के बहाने रूस रवाना हुआ था। वहां पहुंचते ही एजेंटों द्वारा कथित तौर पर उसका पासपोर्ट और कानूनी दस्तावेज जब्त कर लिए गए और एक बुनियादी संक्षिप्त सैन्य प्रशिक्षण के बाद उसे अग्रिम पंक्ति (Frontline) पर भेज दिया गया।

चार महीने से कटा संपर्क: आखिरी फोन कॉल में बयां किया था युद्ध का खौफ

परिजनों के अनुसार, युवक से उनकी आखिरी बातचीत लगभग चार महीने पहले हुई थी। उस आखिरी फोन कॉल में उसने रोते हुए बताया था कि उसे यूक्रेन सीमा से सटे बेहद संवेदनशील और सक्रिय युद्ध क्षेत्र में जबरन तैनात कर दिया गया है। उसने परिवार से कहा था कि यहां हर समय ड्रोन हमलों और मिसाइल गोलाबारी का भीषण खतरा बना रहता है और भाषा न समझ आने के कारण वहां के हालात बेहद भयावह हैं।

उस आखिरी कॉल के बाद से उसका फोन लगातार बंद आ रहा है। परिजनों ने एजेंटों से संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन एजेंट या तो भूमिगत हो गए हैं या कोई संतोषजनक जवाब नहीं दे रहे हैं। चार महीने से बेटे की कोई खोज-खबर न मिलने से बुजुर्ग माता-पिता और पत्नी गहरे अवसाद में हैं।

रूसी सेना में फंसे भारतीयों को लेकर केंद्र सरकार और विदेश मंत्रालय का कड़ा रुख

रूस-यूक्रेन संघर्ष के बीच भारतीय नागरिकों को धोखे से रूसी सेना में भर्ती कराए जाने का यह कोई पहला मामला नहीं है। भारत सरकार और विदेश मंत्रालय ने इस पूरे मामले को बेहद गंभीरता से लिया है। नई दिल्ली में रूसी दूतावास और मॉस्को में भारतीय दूतावास के जरिए भारत सरकार लगातार रूसी अधिकारियों के सामने इस मुद्दे को उठाती रही है।

प्रधानमंत्री और विदेश मंत्री स्तर पर रूस के शीर्ष नेतृत्व के साथ हुई उच्चस्तरीय बैठकों में यह स्पष्ट मांग रखी गई है कि जितने भी भारतीय नागरिकों को गलत तरीके से या धोखे से रूसी सशस्त्र बलों में शामिल किया गया है, उन्हें तत्काल सेवामुक्त (Discharge) कर भारत डिपोर्ट किया जाए। विदेश मंत्रालय के निरंतर कूटनीतिक प्रयासों के चलते अब तक कई दर्जनों भारतीय युवाओं को सुरक्षित स्वदेश वापस लाया जा चुका है, जबकि कई अन्य मामलों में कानूनी प्रक्रिया जारी है।

जांच एजेंसियों की कार्रवाई और परिजनों की मार्मिक अपील

केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) पहले ही देश के कई राज्यों में सक्रिय ऐसे वीजा कंसल्टेंट्स और मानव तस्कर नेटवर्क के खिलाफ एफआईआर दर्ज कर छापेमारी कर चुकी है, जो सोशल मीडिया के जरिए युवाओं को रूस में उच्च वेतन वाली नौकरियों का लालच देकर युद्ध के मोर्चे पर धकेल रहे थे।

सूरत के पीड़ित परिवार ने अब स्थानीय प्रशासन, जिला कलेक्टर और विदेश मंत्रालय को औपचारिक पत्र सौंपकर डीएनए नमूनों और पहचान दस्तावेजों के जरिए रूसी रक्षा मंत्रालय से संपर्क साधने की मांग की है। परिवार ने हाथ जोड़कर गुहार लगाई है कि सरकार राजनयिक चैनलों का इस्तेमाल कर यह पता लगाए कि उनका बेटा किस कैंप या अस्पताल में है और उसे जल्द से जल्द जीवित व सुरक्षित वतन वापस लाया जाए।

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