Saba Haider Wins US Election: अमेरिका में बुलंदशहर की सबा हैदर ने रचा इतिहास, इलिनोइस से जीतीं स्टेट रिप्रेजेंटेटिव चुनाव

भारतीय मूल की प्रतिभाओं का डंका एक बार फिर सात समंदर पार अमेरिकी राजनीति में गूंजा है। उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद कस्बे की रहने वाली सबा हैदर ने संयुक्त राज्य अमेरिका के इलिनोइस (Illinois) राज्य में हुए चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज की है। डेमोक्रेटिक पार्टी के टिकट पर मैदान में उतरीं सबा हैदर ने इलिनोइस के 84वें डिस्ट्रिक्ट से स्टेट रिप्रेजेंटेटिव (State Representative) का चुनाव भारी मतों से जीतकर देश और अपने गृह राज्य का नाम पूरी दुनिया में रोशन किया है। चुनाव परिणामों में उन्हें करीब 70 प्रतिशत वोट हासिल हुए, जिसके साथ उन्होंने अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी ब्रायन स्कोपा को एकतरफा मुकाबले में करारी शिकस्त दी। उनकी इस धमाकेदार जीत की खबर मिलते ही बुलंदशहर के औरंगाबाद और गाजियाबाद स्थित उनके पैतृक आवास व परिजनों में जश्न का माहौल बन गया है।
बुलंदशहर के औरंगाबाद से अमेरिकी संसद तक का प्रेरणादायक सफर
सबा हैदर मूल रूप से पश्चिमी उत्तर प्रदेश के बुलंदशहर जिले के औरंगाबाद की रहने वाली हैं। उनका परिवार लंबे समय से सामाजिक और शैक्षणिक गतिविधियों से जुड़ा रहा है। अपनी उच्च शिक्षा पूरी करने के बाद वह करीब 20 वर्ष पहले अपने पति के साथ अमेरिका चली गई थीं। उनके पति अमेरिका में एक स्थापित सॉफ्टवेयर इंजीनियर हैं और उनका परिवार इलिनोइस में बस गया था। दो बच्चों (एक बेटा और एक बेटी) की मां सबा ने वहां सिर्फ एक गृहिणी तक खुद को सीमित नहीं रखा, बल्कि स्थानीय स्तर पर सामुदायिक सेवाओं, स्वास्थ्य, पर्यावरण और प्रवासी भारतीयों के अधिकारों से जुड़े सामाजिक मुद्दों में बढ़-चढ़कर भाग लेना शुरू किया। उनकी इसी जमीनी पकड़ और सेवा भावना ने उन्हें अमेरिकी राजनीति के मुख्य मंच पर ला खड़ा किया।
ड्यूपेज काउंटी बोर्ड से लेकर स्टेट विधायिका तक की राजनीतिक सीढ़ियां
सबा हैदर की यह जीत कोई इत्तेफाक नहीं, बल्कि उनकी निरंतर सक्रियता और नेतृत्व क्षमता का परिणाम है। स्टेट रिप्रेजेंटेटिव बनने से पहले उन्होंने ड्यूपेज काउंटी (DuPage County Board) के सदस्य के रूप में चुनाव जीतकर अपनी राजनीतिक योग्यता साबित की थी। काउंटी बोर्ड में रहते हुए उन्होंने स्थानीय बजट प्रबंधन, स्वास्थ्य सेवाओं के विस्तार, जलवायु संकट से निपटने के ठोस बुनियादी ढांचों और आम नागरिकों की सुविधाओं के लिए कई महत्वपूर्ण नीतियों पर काम किया। जब इलिनोइस के 84वें डिस्ट्रिक्ट की सीट पर डेमोक्रेटिक पार्टी की पूर्व विधायक स्टेफनी किफोविट के हटने के बाद पार्टी को एक मजबूत और लोकप्रिय चेहरे की जरूरत थी, तब सबा हैदर ने पहले प्राइमरी चुनाव में भारी अंतर से जीत दर्ज की और फिर मुख्य चुनाव में रिपब्लिकन प्रत्याशी को हराकर सीट अपनी झोली में डाल ली।
70% वोटों से रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी को दी करारी मात: क्या रहे मुख्य चुनावी मुद्दे?
इलिनोइस के 84वें डिस्ट्रिक्ट में हुए इस चुनाव में सबा हैदर को मतदाताओं का अभूतपूर्व समर्थन मिला। उन्होंने अपने अभियान में स्वास्थ्य सेवाओं को सस्ता व सुलभ बनाने, सार्वजनिक स्कूलों में गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का विस्तार करने, महिलाओं के अधिकारों की रक्षा और स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने जैसे जनहितकारी मुद्दों को केंद्र में रखा। उनके प्रतिद्वंद्वी ब्रायन स्कोपा उनके आक्रामक और जनसंपर्क-आधारित अभियान के सामने टिक नहीं सके। अमेरिकी मीडिया और चुनाव विश्लेषकों का मानना है कि सबा हैदर की यह प्रचंड जीत यह दर्शाती है कि अमेरिकी समाज में एशियाई और भारतीय मूल के प्रवासियों का प्रभाव नीति-निर्माण स्तर पर लगातार गहरा और प्रभावी हो रहा है।
परिजनों और गृह जनपद में जश्न की लहर: पिता बोले—'यह पूरे भारत का गौरव'
सबा हैदर की इस ऐतिहासिक जीत के बाद बुलंदशहर के औरंगाबाद कस्बे और गाजियाबाद में रह रहे उनके परिजनों के यहां बधाइयों का तांता लग गया है। स्थानीय लोग मिठाईयां बांटकर और आतिशबाजी करके अपनी बेटी की कामयाबी का उत्सव मना रहे हैं। उनके पिता सैयद अली हैदर और परिजनों ने खुशी व्यक्त करते हुए कहा कि यह सिर्फ उनके परिवार या जनपद की नहीं, बल्कि समूचे भारत और उत्तर प्रदेश की बेटियों की जीत है। उन्होंने साबित कर दिया है कि अगर लगन, ईमानदारी और सेवा की भावना हो, तो एक छोटे कस्बे से निकलकर भी दुनिया के सबसे शक्तिशाली लोकतंत्र की विधायिका तक अपनी आवाज पहुंचाई जा सकती है। सबा हैदर की यह उपलब्धि विदेशों में रह रही भारतीय महिलाओं के लिए प्रेरणा की एक नई मिसाल बन गई है।