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8.25 लाख करोड़ का घाटा! कमाई से ज्यादा खर्च कर रही सरकार, जानिए आपकी जेब पर क्या होगा असर

अक्सर हम अपने घर के बजट में देखते हैं कि अगर कमाई से ज्यादा खर्चा हो जाए,तो उधारी बढ़ जाती है। कुछ ऐसा ही हाल अभी देश के सरकारी खजाने के आंकड़ों में देखने को मिल रहा है। इस वित्तीय वर्ष के पहले सात महीनों (अप्रैल से अक्टूबर) का लेखा-जोखा सामने आया है,और आंकड़े बताते हैं कि सरकार काराजकोषीय घाटा (Fiscal Deficit)उम्मीद से थोड़ा ज्यादा तेजी से बढ़ा है।आसान भाषा में समझें तो,सरकार ने पूरे साल के लिए जितना कर्ज या घाटा अनुमानित किया था,उसका आधे से ज्यादा हिस्सा (52.6%)तो इन शुरुआती सात महीनों में ही पूरा हो गया है। रुपयों में बात करें तो यह रकम8.25लाख करोड़ रुपयेके पार जा चुकी है। पिछले साल इसी समय तक सरकार ने अपने कोटे का लगभग46%ही इस्तेमाल किया था,यानी इस बार खर्च की रफ्तार तेज है।आखिर पैसा जा कहां रहा है? (Good News vs Bad News)इन आंकड़ों के दो पहलू हैं। एक तरफ घाटा बढ़ रहा है,जो चिंता का विषय हो सकता है,लेकिन दूसरी तरफ एक अच्छी खबर भी छिपी है।सरकार का’कैपिटल एक्सपेंडिचर’यानी विकास कार्यों (सड़क,पुल,इंफ्रास्ट्रक्चर) पर होने वाला खर्च काफी अच्छा रहा है। सरकार ने पूरे साल के लिए जो बजट तय किया था,उसका55%अब तक खर्च किया जा चुका है। पिछले साल यह आंकड़ा सिर्फ42%था। इसका सीधा मतलब है कि सरकार विकास कार्यों में पैसा लगाने में कोई कसर नहीं छोड़ रही है,जो भविष्य के लिए अच्छा संकेत है।कमाई के मोर्चे पर थोड़ी चुनौतीदिक्कत खर्च करने में नहीं,बल्कि कमाई (Tax Collection) में आ रही है। इस साल टैक्स से होने वाली कमाई की रफ्तार थोड़ी धीमी पड़ी है। जहां पिछले साल अक्टूबर तक कुल टारगेट का50%से ज्यादा टैक्स आ गया था,वहीं इस साल यह करीब45%के आसपास ही सिमट गया है।हालांकि,रिज़र्व बैंक (RBI)ने इस बार सरकार की काफी मदद की है।RBIकी तरफ से मिले2.7लाख करोड़ रुपये के डिविडेंड ने स्थिति को काफी हद तक संभाला है,वरना हालात और टाइट हो सकते थे।सरकार औरIMFक्या सोच रहे हैं?अंतर्राष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF)की नज़र भी भारत के बही-खाते पर है। उन्होंने हाल ही में कहा है कि जीएसटी (GST)और इनकम टैक्स में हुए बदलावों का असर देखना होगा। वहीं,वित्त मंत्रालय का मानना है कि घबराने की जरूरत नहीं है। सरकार को भरोसा है कि वित्तीय वर्ष के अंत तक वे सबकुछ बैलेंस कर लेंगे और घाटे को तय सीमा (टारगेट) के अंदर ही रखेंगे। फिलहाल सरकार का जोर टैरिफ बढ़ाने की बजाय खर्च और कमाई के बीच संतुलन बनाने पर है।संक्षेप में,सरकार देश को बनाने मेंदिल खोलकर पैसा लगा रही है,लेकिन अब चुनौती यह है कि आने वाले महीनों में टैक्स कलेक्शन को कैसे पटरी पर लाया जाए ताकि बैलेंस शीट’लाल निशान’में ज्यादा गहरी न हो जाए।

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