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SA20 लीग का असली हीरो ,निजी ज़िंदगी में आया भूचाल, फिर भी मैदान पर मचा रहा धमाल

News India Live, Digital Desk : क्रिकेट के मैदान पर हम अक्सर खिलाड़ियों के चौके-छक्के देखते हैं, उनकी जीत का जश्न देखते हैं। लेकिन कभी-कभी उस जर्सी और हेलमेट के पीछे एक ऐसा इंसान होता है जो अपने अंदर आंसुओं का सैलाब रोके खड़ा होता है। जिम्बाब्वे के स्टार ऑलराउंडर सिकंदर रज़ा (Sikandar Raza) ने इस वक्त जो हिम्मत दिखाई है, उसे देखकर हर क्रिकेट फैन का सिर सम्मान से झुक गया है।रज़ा इस वक्त दक्षिण अफ्रीका में चल रही SA20 लीग में खेल रहे हैं, लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वे किस दौर से गुजर रहे हैं।निजी जिंदगी में टूटा दुखों का पहाड़अभी हाल ही की बात है, सिकंदर रज़ा के परिवार पर एक ऐसी मुसीबत आई जिसने सबको झकझोर कर रख दिया। रज़ा ने अपने सगे छोटे भाई (Taymoor) को खो दिया। और दर्दनाक बात यह है कि उनके भाई की उम्र महज 13 साल थी। सोचकर देखिए, एक हंसता-खेलता 13 साल का बच्चा चला जाए, तो उस घर के बड़े भाई पर क्या बीत रही होगी?गम में डूबे नहीं, लड़ना चुनाआमतौर पर जब घर में ऐसी त्रासदी होती है, तो इंसान का काम-काज से मन उचट जाता है। लोग ब्रेक लेते हैं और परिवार के साथ वक्त बिताते हैं। रज़ा के पास भी यह विकल्प था। वह टूर्नामेंट छोड़ सकते थे। लेकिन, उन्होंने जो रास्ता चुना वह बहुत मुश्किल था।’टूटे हुए दिल लेकिन मजबूत इरादों’ के साथ सिकंदर रज़ा दक्षिण अफ्रीका पहुंचे। उन्होंने जोबर्ग सुपर किंग्स (Joburg Super Kings) के लिए खेलने का फैसला किया। उनका यह कदम बताता है कि उनके लिए खेल सिर्फ एक नौकरी नहीं, बल्कि इबादत है।मैदान पर दिखा रहे हैं कमालसिर्फ मैदान पर उतरना बड़ी बात नहीं है, बड़ी बात यह है कि इस मानसिक तनाव के बावजूद रज़ा का प्रदर्शन फीका नहीं पड़ा। वे मैदान पर पहले से भी ज्यादा आक्रामक और फोकस्ड नजर आ रहे हैं। मानो वे अपनी हर पारी, हर विकेट अपने उस छोटे भाई को समर्पित कर रहे हों जो अब इस दुनिया में नहीं है।जब उनसे पूछा गया, तो उनका जज़्बा साफ़ था—”ज़िंदगी रुकती नहीं है।” उनके साथी खिलाड़ी भी उनकी इस मानसिक दृढ़ता (Mental Strength) के कायल हो गए हैं।असली ‘सिकंदर’मैच हारना या जीतना खेल का हिस्सा है, लेकिन अपनी भावनाओं पर काबू पाकर अपना 100% देना ही एक खिलाड़ी को महान बनाता है। सिकंदर रज़ा ने साबित कर दिया है कि वे नाम के ही नहीं, बल्कि काम के भी ‘सिकंदर’ हैं। उनकी यह कहानी उन तमाम युवाओं के लिए प्रेरणा है जो छोटी-छोटी मुश्किलों से हार मान लेते हैं।

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