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Perfume Capital of India : भारत का वो छोटा सा शहर जिसकी गलियों में परफ्यूम नहीं, असली इत्र की मिठास बसती है

News India Live, Digital Desk : हम सभी को वो पल याद है, जब गर्मियों के बाद पहली बारिश होती है और ज़मीन से जो सोंधी सी खुशबू निकलती है, वह रूह को सुकून देती है। हम अक्सर सोचते हैं कि काश इस महक को हमेशा के लिए संजो कर रखा जा सकता! लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत में एक ऐसा शहर है, जिसने यह नामुमकिन काम सालों पहले मुमकिन कर दिखाया है?जी हाँ, हम बात कर रहे हैं उत्तर प्रदेश के कन्नौज की। इस शहर को दुनिया भर में ‘इत्र की राजधानी’ (Perfume Capital of India) कहा जाता है। अक्सर लोग परफ्यूम की बात चलते ही फ्रांस के ‘ग्रास’ (Grasse) का नाम लेने लगते हैं, लेकिन भारत के कन्नौज का इतिहास उससे भी कहीं ज़्यादा पुराना और समृद्ध है।यहाँ हवाओं में बसती है खुशबूकन्नौज की सबसे बड़ी खासियत यहाँ का पारंपरिक तरीका है। यहाँ आज भी पुराने स्टाइल की देग और भभका विधि से फूलों का अर्क निकाला जाता है। आपने महंगे परफ्यूम तो बहुत देखे होंगे, लेकिन क्या आपने कभी ‘मिट्टी अत्तर’ (Mitti Attar) के बारे में सुना है? यह कन्नौज की ही देन है, जहाँ सचमुच मिट्टी को भूनकर उसकी महक को चन्दन के तेल में उतारा जाता है। जब आप इसे सूंघते हैं, तो आपको वही अहसास होता है जैसे आप बारिश में भीग रहे हों।मुगलों से लेकर दुनिया के कोनों तककहते हैं कि कन्नौज में इत्र बनाने का काम सदियों से चल रहा है। मुगलों के दौर में तो यह राजघरानों की पहली पसंद हुआ करता था। आज भी यहाँ की गलियों से गुजरते वक़्त आपको मोगरे, केवड़े, गुलाब और हिना की मिली-जुली महक मदहोश कर देगी। बड़ी बात यह है कि जहाँ पूरी दुनिया अब केमिकल और शराब (Alcohol) आधारित परफ्यूम पर टिक गई है, वहीं कन्नौज ने बिना अल्कोहल वाला शुद्ध इत्र बनाना आज भी जारी रखा है।आज भी अरब देशों और यूरोप में कन्नौज के इत्र की जबरदस्त मांग है। इसे बनाना कोई फैक्ट्री का काम नहीं, बल्कि एक कला है जो यहाँ पीढ़ी-दर-पीढ़ी विरासत में दी जा रही है। अगर आप खुशबुओं के शौकीन हैं, तो एक बार इस ‘खुशबू वाले शहर’ के बारे में गहराई से ज़रूर जानें।

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