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AAP vs Avadh Ojha : सांस नहीं ले पा रहा था ओझा सर की इस दलील पर सोमनाथ भारती का तीखा वार

News India Live, Digital Desk : UPSC की दुनिया के बेताज बादशाह और अपनी दमदार स्पीच के लिए मशहूर अवध ओझा सर (Avadh Ojha) एक बार फिर सुर्ख़ियों में हैं। कुछ समय पहले जब उन्होंने राजनीति में कदम रखा था और ‘आम आदमी पार्टी’ (AAP) का दामन थामा था, तो उनके छात्रों और फैंस को लगा था कि अब राजनीति में भी उनका जलवा दिखेगा।लेकिन यह क्या? अभी साल भर भी नहीं हुआ और ओझा सर ने हाथ खड़े कर दिए। उन्होंने सक्रिय राजनीति से संन्यास लेने का ऐलान कर दिया है। उनके इस फैसले पर अब आम आदमी पार्टी के भीतर से तीखी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। पार्टी के वरिष्ठ नेता सोमनाथ भारती (Somnath Bharti) ने ओझा सर के बयानों पर करारा पलटवार किया है।अवध ओझा को क्यों हुई ‘घुटन’?चुनाव (दिल्ली विधानसभा 2025) हारने के बाद से ही अवध ओझा शांत थे। अब संन्यास लेते हुए उन्होंने कहा कि वे एक “फ्री बर्ड” (स्वतंत्र पक्षी) की तरह हैं और राजनीति के पिंजरे में उन्हें “घुटन” (Suffocation) महसूस हो रही थी।उनका कहना है:”मैं अपनी मर्जी से बोल नहीं पा रहा था।””पार्टी लाइन फॉलो करना मेरे बस की बात नहीं है।”उन्होंने यह भी कहा कि अगर वो सच नहीं बोलेंगे, तो उन्हें लगेगा कि वो मर रहे हैं। इसलिए, उन्हें अपनी टीचिंग और मस्ती वाली दुनिया ही ज्यादा रास आ रही है।सोमनाथ भारती ने लगाई ‘क्लास’ओझा सर की ये बातें सुनकर सोमनाथ भारती से रहा नहीं गया। उन्होंने ओझा सर को एक राजनेता की जिम्मेदारियां याद दिलाईं। भारती ने तंज कसते हुए कहा कि राजनीति कोई “एक्सपेरिमेंट लैब” (प्रयोगशाला) नहीं है, जहाँ जब मन किया कोट पहनकर आ गए और जब मन किया उतारकर चल दिए।सोमनाथ भारती ने दो टूक शब्दों में कहा:आपको पार्टी जॉइन करने से पहले सोचना चाहिए था। हर संगठन का अपना अनुशासन (Discipline) होता है। यह बच्चों का खेल नहीं है।”भारती का गुस्सा इस बात पर भी था कि जब चुनाव का मौसम था, तब टिकट ले लिया, चुनाव लड़ लिया, और जब नतीजे पक्ष में नहीं आए (ओझा सर अपनी सीट हार गए थे), तो अब राजनीति को ही बुरा बताकर भाग रहे हैं। भारती ने कहा कि ऐसे ‘यू-टर्न’ से कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटता है जिन्होंने आपके लिए पसीना बहाया।सियासत और क्लासरूम का फर्कदोस्तों, यह पूरा मामला हमें एक बात सिखाता है। क्लासरूम में ‘राजा’ बनकर भाषण देना अलग बात है, और जनता के बीच जाकर, पार्टी के नियमों में बंधकर राजनीति करना बिल्कुल अलग। अवध ओझा सर को शायद यही फर्क समझने में देर हो गई।सोमनाथ भारती की बातों में दम है कि राजनीति धैर्य मांगती है, जो शायद ओझा सर जैसे बेबाक इंसान के पास नहीं था। खैर, अब ओझा सर वापस अपनी किताबों और मोटिवेशनल वीडियो की दुनिया में लौट रहे हैं। फैंस के लिए तो यही अच्छी खबर है, लेकिन राजनीति में उनकी यह पारी बहुत छोटी और विवादित रही।

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