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Btech के बाद UPSC की तैयारी का कड़वा सच: ‘लगता है मैं खत्म हो गया

देश भर के लाखों युवाओं का सपना होता है कि वे इंजीनियरिंग या अन्य प्रोफेशनल डिग्रियां हासिल करने के बाद देश की सबसे प्रतिष्ठित सिविल सेवा परीक्षा यानी यूपीएससी (UPSC) की तैयारी करें और एक आईएएस या आईपीएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करें। लेकिन इस सुनहरे सपने के पीछे एक ऐसा छिपा हुआ और दर्दनाक सच भी है, जिसका सामना कई युवा इस कठिन सफर के दौरान करते हैं। हाल ही में सोशल मीडिया और विभिन्न डिजिटल मंचों पर एक बीटेक (B.Tech) ग्रेजुएट युवा का दर्द भरा संदेश तेजी से वायरल हो रहा है, जिसने देश के तमाम युवाओं और उनके अभिभावकों को झकझोर कर रख दिया है। इस युवा ने अपनी पहचान गुप्त रखते हुए अपनी कहानी साझा की है कि कैसे उसने इंजीनियरिंग की एक बेहतरीन नौकरी को अपनी मर्जी से लात मारकर यूपीएससी की तैयारी का कठिन रास्ता चुना था, लेकिन कई वर्षों तक लगातार असफलता और संसाधनों की कमी के चलते आज उसकी जिंदगी इस मोड़ पर आ चुकी है कि वह खुद को पूरी तरह से बर्बाद और 'खत्म' हुआ महसूस कर रहा है। यह मार्मिक कहानी सिर्फ एक अकेले शख्स की नहीं है, बल्कि यह उन हजारों युवाओं की व्यथा बन चुकी है जो दिल्ली के मुखर्जी नगर, राजेंद्र नगर या देश के अन्य कोचिंग hubs में अपने बहुमूल्य साल और ऊर्जा झोंक देते हैं, लेकिन अंत में हाथ निराशा के अलावा कुछ नहीं लगता।

अच्छी-खासी जॉब छोड़कर सिविल सेवा की तैयारी में कूदा था युवा, वर्षों की मेहनत के बाद भी हाथ लगी नाकामी

अपनी आपबीती साझा करते हुए उस बीटेक ग्रेजुएट ने बताया कि जब उसने कॉलेज पूरा किया था, तब उसके पास हाथ में एक अच्छी नौकरी का ऑफर था, जिसे उसने भविष्य के बड़े सपनों के चक्कर में ठुकरा दिया था। उसे पूरा विश्वास था कि उसकी बौद्धिक क्षमता और कड़ी मेहनत के दम पर वह पहले या दूसरे प्रयास में ही यूपीएससी की परीक्षा को क्रैक कर लेगा। लेकिन सिविल सेवा परीक्षा का स्तर और इसमें बैठने वाले लाखों उम्मीदवारों के बीच का कड़ा मुकाबला इतना भीषण है कि केवल चाहने से सफलता नहीं मिलती। पहला प्रयास निकला, फिर दूसरा आया, और देखते ही देखते जिंदगी के कई साल बीत गए। हर साल परीक्षा के पैटर्न में बदलाव, मेन्स और इंटरव्यू के चरणों में होने वाली असफलता ने उसके आत्मविश्वास को अंदर से तोड़कर रख दिया। जिन दोस्तों ने बीटेक के बाद नौकरी जारी रखी थी, वे आज अपने जीवन में आर्थिक रूप से काफी आगे निकल चुके हैं और अपने परिवारों का भरण-पोषण कर रहे हैं, जबकि यह युवा किताबों के बोझ तले दबा हुआ उम्र के उस पड़ाव पर पहुंच गया जहां उसके पास न तो कोई बैंक बैलेंस बचा है और न ही भविष्य की कोई निश्चितता। यह दौर किसी भी युवा के मानसिक स्वास्थ्य के लिए बेहद घातक साबित होता है, जहां अवसाद और निराशा हर पल साथ चलती है।

पैसे-पैसे को मोहताज हुआ करियर: आर्थिक तंगी और बदहाली ने तोड़ी कमर

किसी भी इंसान की जिंदगी में जब आर्थिक संकट गहरा जाता है, तो उसके जीने के रास्ते और उम्मीदें धीरे-धीरे दम तोड़ने लगती हैं। इस युवा ने अपने पोस्ट में इस बात का बेहद दर्दनाक खुलासा किया है कि वर्तमान स्थिति यह हो चुकी है कि वह पैसे-पैसे को मोहताज हो गया है। दिल्ली या अन्य बड़े शहरों में रहकर कमरा किराए पर लेना, महंगी किताबें खरीदना, टेस्ट सीरीज जॉइन करना और रोजमर्रा के खर्चों को उठाना परिवार के भेजे गए सीमित पैसों या खुद की जमा-पूंजी से ही संभव होता है। जब जमा-पूंजी पूरी तरह समाप्त हो जाती है और घर से भी पैसे मिलने बंद या सीमित हो जाते हैं, तब एक युवा का संघर्ष नरक से बदतर हो जाता है। खाने-पीने के लाले पड़ने लगते हैं और छोटी-छोटी जरूरतों के लिए भी दूसरों के सामने हाथ फैलाना पड़ता है। समाज का यह कड़वा सच है कि जब तक आप सफल हैं, तब तक हर कोई आपके साथ खड़ा रहता है, लेकिन जैसे ही आप असफल होते हैं और आर्थिक तंगी से गुजरते हैं, रिश्ते और दोस्त भी धीरे-धीरे दूरी बनाने लगते हैं। इस युवा की यह स्थिति इस बात का जीता-जागता उदाहरण है कि बिना किसी बैकअप प्लान (Backup Plan) के केवल एक परीक्षा के भरोसे अपनी पूरी जवानी और करियर को दांव पर लगाना कितना भारी जोखिम साबित हो सकता है।

मानसिक स्वास्थ्य पर मंडराता गहरा संकट और युवाओं के लिए एक बड़ी चेतावनी

यूपीएससी या अन्य उच्च स्तरीय प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के दौरान छात्रों पर जिस तरह का मानसिक दबाव रहता है, उसका अंदाजा वही लगा सकता है जो इस दौर से गुजरा हो। इस बीटेक ग्रेजुएट ने लिखा है कि "लगता है मैं खत्म हो गया…", जो उसके भीतर चल रहे भारी डिप्रेशन और एंग्जाइटी को साफ तौर पर बयां करता है। लगातार नाकामी मिलने के बाद जब समाज और परिवार की उम्मीदों का बोझ कंधों पर बढ़ता है, तो कई युवा मानसिक संतुलन खो बैठते हैं या अत्यधिक तनाव का शिकार हो जाते हैं। हाल के वर्षों में कोटा और दिल्ली जैसे शिक्षण केंद्रों से आने वाली दुखद खबरें इस बात की गवाही देती हैं कि असफलता का यह दबाव युवाओं की जान तक ले लेता है। विशेषज्ञों का मानना है कि परीक्षा जीवन का अंत नहीं है, बल्कि यह करियर का सिर्फ एक विकल्प मात्र है। यदि कोई युवा अपनी ऊर्जा और समय का सही इस्तेमाल करे, तो वह कॉर्पोरेट सेक्टर या अन्य क्षेत्रों में भी अपनी एक अलग पहचान बना सकता है। लेकिन जिद और समाज में अपनी नाक बचाने के चक्कर में युवा वर्षों तक इस दलदल में फंसे रहते हैं, जिससे न केवल उनका करियर बर्बाद होता है, बल्कि उनका मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य भी पूरी तरह तबाह हो जाता है।

इंटरनेट पर लोगों से मांगी सलाह: क्या इस मोड़ पर दोबारा शुरू हो सकता है कॉर्पोरेट करियर?

पैसे-पैसे को मोहताज होने और खुद को पूरी तरह टूटा हुआ महसूस करने के बाद इस युवा ने सोशल मीडिया पर लोगों से खुलकर सलाह मांगी है कि उसे अब आगे क्या करना चाहिए। उसने पूछा है कि क्या बीटेक की डिग्री और इतने साल के गैप के बाद उसे दोबारा से किसी आईटी कंपनी या अन्य कॉर्पोरेट सेक्टर में एंट्री मिल सकती है या फिर उसका पूरा प्रोफेशनल करियर हमेशा के लिए समाप्त हो चुका है। हैरान करने वाली बात यह है कि उसके इस पोस्ट के बाद इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं का बाढ़ सा आ गया है। हजारों लोगों ने उसके इस दर्द पर सहानुभूति जताई है और उसे ढांढस बंधाया है। कई सीनियर प्रोफेशनल्स और सॉफ्टवेयर इंजीनियरों ने आगे आकर उसे सलाह दी है कि उसे हिम्मत नहीं हारनी चाहिए और अपने रिज्यूमे को अपडेट करके स्किल्स पर काम करते हुए फिर से जॉब की तलाश शुरू करनी चाहिए। लोगों ने उसे समझाया कि उम्र अभी बहुत बाकी है और असफलता सिर्फ एक अनुभव है, अंत नहीं। यह वायरल पोस्ट देश के उन तमाम युवाओं के लिए एक बहुत बड़ी आंखें खोलने वाली सीख है जो बिना किसी प्लान बी के सिविल सेवा की अंधी दौड़ में कूद पड़ते हैं।

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