उत्तर प्रदेश

UP Politics : अखिलेश के PDA पर ब्रजेश पाठक का बड़ा प्रहार, पूछा कहां है मुस्लिम नेतृत्व?, यूपी की सियासत में छिड़ा घमासान

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश की राजनीति में ‘PDA’ (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) का नारा देने वाले समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव अब विपक्षी दलों के निशाने पर हैं। प्रदेश के उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने अखिलेश यादव के इस फॉर्मूले पर तीखा हमला बोलते हुए इसे ‘छलावा’ करार दिया है। पाठक ने सीधे तौर पर सवाल उठाया है कि अगर अखिलेश वास्तव में अल्पसंख्यकों के हक की बात करते हैं, तो उनकी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व और महत्वपूर्ण निर्णयों में ‘मुस्लिम नेतृत्व’ की हिस्सेदारी कहां गायब है? इस बयान के बाद लखनऊ से लेकर दिल्ली तक सियासी पारा चढ़ गया है।ब्रजेश पाठक का ‘मुस्लिम कार्ड’ और तीखे सवालडिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने एक जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि समाजवादी पार्टी केवल चुनाव के समय ही मुसलमानों और पिछड़ों को याद करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा के शासनकाल में केवल एक विशेष परिवार का उत्थान हुआ, जबकि बाकी ‘PDA’ वर्ग हाशिए पर रहा। पाठक ने पूछा, “अखिलेश जी बताएं कि उनके संगठन के बड़े पदों पर कितने मुस्लिम चेहरों को जगह दी गई है? क्या वे केवल वोट बैंक हैं या उन्हें नेतृत्व का अवसर भी मिलेगा?”अखिलेश यादव का पलटवार: “बीजेपी की घबराहट का नतीजा”ब्रजेश पाठक के आरोपों पर समाजवादी पार्टी ने भी कड़ा रुख अपनाया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने सोशल मीडिया और पार्टी प्रवक्ताओं के जरिए पलटवार करते हुए कहा कि बीजेपी ‘PDA’ की बढ़ती ताकत से घबरा गई है। अखिलेश का तर्क है कि उनका गठबंधन समाज के हर वर्ग को साथ लेकर चल रहा है और बीजेपी केवल सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करने के लिए ऐसे सवाल उठा रही है। सपा नेताओं का कहना है कि बीजेपी ने खुद कितने मुस्लिम नेताओं को मुख्यधारा में जगह दी है, इसका जवाब उन्हें पहले देना चाहिए।2026 के सियासी समीकरणों की बिसातजानकारों का मानना है कि ब्रजेश पाठक का यह हमला सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। बीजेपी का लक्ष्य मुस्लिम मतदाताओं के बीच यह संदेश देना है कि सपा केवल उनका उपयोग करती है। वहीं, अखिलेश यादव अपने ‘PDA’ फॉर्मूले के जरिए दलितों और पिछड़ों के साथ-साथ अल्पसंख्यकों के एक बड़े हिस्से को एकजुट करने की कोशिश कर रहे हैं। पश्चिमी यूपी से लेकर पूर्वांचल तक, इस जुबानी जंग का असर आने वाले चुनावों के ध्रुवीकरण पर पड़ना तय है।नेतृत्व पर छिड़ी बहसयह विवाद केवल बयानों तक सीमित नहीं है। उत्तर प्रदेश में मुस्लिम लीडरशिप की शून्यता को लेकर समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ब्रजेश पाठक के इस बयान ने उस दुखती रग पर हाथ रख दिया है, जिससे सपा को अपने कोर वोट बैंक के बीच सफाई देनी पड़ सकती है। दूसरी ओर, बीजेपी इसे अपनी ‘सबका साथ, सबका विकास’ की नीति के मुकाबले सपा की ‘परिवारवाद’ वाली राजनीति साबित करने में जुटी है।

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