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Crude Oil Price: अमेरिका और ईरान में भिड़ंत से कच्चे तेल में लगी आग, लगातार चौथे दिन बढ़ा ब्रेंट क्रूड; क्या ₹110 के पार जाएगा भाव?

वैश्विक ऊर्जा बाजार (Global Energy Market) में एक बार फिर से भारी उथल-पुथल शुरू हो गई है। अमेरिका (US) द्वारा ईरान पर किए गए नए हमलों के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें लगातार चौथे दिन बढ़ गई हैं। पिछले तीन कारोबारी सत्रों में 12% की भारी-भरकम तेजी दर्ज करने के बाद ब्रेंट क्रूड अब 85 डॉलर प्रति बैरल के मनोवैज्ञानिक स्तर को पार कर गया है। वहीं, अमेरिकी बेंचमार्क वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी 80 डॉलर प्रति बैरल के स्तर पर पहुंच चुका है।

मिडिल ईस्ट (मध्य पूर्व) के इस संवेदनशील इलाके में सैन्य संघर्ष बढ़ने से दुनिया भर में कच्चे तेल की सप्लाई चेन में बड़ी रुकावट आने की आशंका गहरी हो गई है, जिससे वैश्विक बाजारों में हड़कंप मच गया है।

ताजा आंकड़ों पर एक नजर (Crude Oil Latest Rates)

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी मार्केट में कच्चे तेल के दाम एक महीने के उच्चतम स्तर (One-Month High) पर कारोबार कर रहे हैं:

  • ब्रेंट क्रूड (Brent Crude Futures): 33 सेंट (या 0.4%) की नई बढ़त के साथ $85.28 प्रति बैरल पर पहुंच गया है।

  • डब्ल्यूटीआई क्रूड (WTI Crude Futures): 42 सेंट (या 0.5%) की मजबूती के साथ $80.02 प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है।

आखिर क्यों लगी कच्चे तेल के दामों में आग? (उछाल की मुख्य वजहें)

  1. अमेरिका-ईरान के बीच सैन्य टकराव: अमेरिका ने बुधवार को ओपेक (OPEC) के सदस्य देश ईरान पर नए हवाई हमले किए और ईरान के पोर्ट की तरफ जा रहे एक खाली तेल टैंकर को अपने कब्जे में ले लिया। इसके बाद से ही युद्ध के बादल गहरे हो गए हैं।

  2. रणनीतिक पोर्ट और ऑयल टर्मिनल्स पर खतरा: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने साफ चेतावनी दी है कि जब तक तेहरान होर्मुज स्ट्रेट (Strait of Hormuz) से गुजरने वाले जहाजों पर हमले बंद नहीं करता, अमेरिकी सैन्य कार्रवाई जारी रहेगी। 'द वॉल स्ट्रीट जर्नल' के मुताबिक, अमेरिकी सेना ईरान के सबसे मुख्य तेल एक्सपोर्ट हब 'खार्ग आइलैंड' (Kharg Island) को भी निशाना बनाने की योजना पर विचार कर रही है।

  3. ईरान का पलटवार और स्ट्रेट बंद करने की धमकी: ईरान की 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' ने भी पीछे हटने से इनकार कर दिया है। उन्होंने एलान किया है कि जब तक अमेरिका अपने हमले बंद नहीं करता और ईरानी पोर्ट्स से पाबंदियां नहीं हटाता, तब तक होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait) से जहाजों की आवाजाही को पूरी तरह ब्लॉक रखा जाएगा।

  4. 'शटल रन' ट्रेड पर असर: हमलों की वजह से समुद्र के बीच में एक जहाज से दूसरे जहाज में क्रूड ट्रांसफर करने का व्यापार (Shuttle Run) बुरी तरह प्रभावित हुआ है, जो युद्ध के समय संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों के लिए एक लाइफलाइन बना हुआ था।

  5. रूस-यूक्रेन संकट: रूस की फ्यूल फैसिलिटीज और रिफाइनरियों पर यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों ने भी ग्लोबल एनर्जी मार्केट में सप्लाई की चिंता को बरकरार रखा है।

एक्सपर्ट्स की चेतावनी: क्या $110 के ऊपर जाएगी कीमत?

जियोपॉलिटिकल (भू-राजनीतिक) तनाव को देखते हुए दुनिया के बड़े वैश्विक ब्रोकरेज और वित्तीय संस्थानों ने कच्चे तेल को लेकर बड़े अनुमान जारी किए हैं:

  • गोल्डमैन सैक्स (Goldman Sachs) का अनुमान: दिग्गज ग्लोबल फर्म का मानना है कि अगर खाड़ी देशों से होने वाले तेल निर्यात (Gulf Exports) में यह रुकावट लंबे समय तक बनी रहती है, तो साल 2026 की चौथी तिमाही तक ब्रेंट क्रूड की कीमतें $110 प्रति बैरल को भी पार कर सकती हैं। हालांकि, बैंक ने यह भी कहा कि अगर तनाव कम होता है, तो साल के अंत तक कीमतें गिरकर $60 के आसपास भी आ सकती हैं।

  • चॉइस ब्रोकिंग (Choice Broking) की चेतावनी: कमोडिटी और करेंसी एनालिस्ट आमिर मकदा का कहना है कि यह तनाव केवल एक अटकल नहीं बल्कि एक गंभीर संभावित स्थिति बन चुका है। कीमतों में इस वक्त 'साइकोलॉजिकल रिस्क प्रीमियम' जुड़ा हुआ है। यदि होर्मुज स्ट्रेट से नेविगेशन बाधित होता है, तो ब्रेंट क्रूड आसानी से $100 प्रति बैरल के पार निकल जाएगा, जिससे दुनिया भर में स्टैगफ्लेशन (Stagflation – मंदी के साथ महंगाई) का भयंकर खतरा पैदा हो सकता है।

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