उत्तर प्रदेश

यूपी की यूनिवर्सिटी 6-6 आंगनबाड़ी केंद्र गोद लेंगी, छात्रों को मिलेगा इंटर्नशिप और रिसर्च का मौका

News India Live, Digital Desk: उत्तर प्रदेश के उच्च शिक्षा क्षेत्र और बुनियादी बाल विकास के लिए एक बड़ी खबर सामने आई है। विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के निर्देश पर अब प्रदेश के सभी विश्वविद्यालय अपने आसपास के छह-छह आंगनबाड़ी केंद्रों को गोद लेंगे। इस पहल का मुख्य उद्देश्य नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत प्री-प्राइमरी शिक्षा की नींव को मजबूत करना और विश्वविद्यालयों को सीधे समाज की जमीनी हकीकत से जोड़ना है।छात्रों के लिए खुलेगा ‘अनुभव’ का द्वारइस योजना की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे शैक्षणिक पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाया जा रहा है। विश्वविद्यालय में पढ़ रहे स्नातक (UG) और स्नातकोत्तर (PG) के छात्रों को इन आंगनबाड़ी केंद्रों में इंटर्नशिप (Internship) के लिए भेजा जाएगा। छात्र वहां जाकर न केवल बच्चों को पढ़ाएंगे, बल्कि अपने शोध प्रबंध (Dissertation) और कम्युनिटी प्रोग्राम भी आयोजित कर सकेंगे। इससे छात्रों को व्यावहारिक अनुभव और सामाजिक जिम्मेदारी का वास्तविक प्रशिक्षण मिलेगा।3 से 6 साल के बच्चों की बदलेगी दुनियाआंगनबाड़ी केंद्रों में 3 से 6 वर्ष की आयु के बच्चों को खेल-खेल में प्रारंभिक शिक्षा दी जाती है। विश्वविद्यालयों के जुड़ने से इन केंद्रों को बेहतर शैक्षणिक संसाधन और आधुनिक शिक्षण तकनीकें मिल सकेंगी। विश्वविद्यालय के फैकल्टी और छात्र मिलकर बच्चों के लिए आकर्षक शैक्षणिक सामग्री (TLM) तैयार करेंगे और उनकी भाषाई व गणितीय दक्षता (Nipun Goals) को सुधारने में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं की मदद करेंगे।सरकार की मदद और ‘स्कूल रेडीनेस’ पर जोरइस पहल के जरिए सरकार आंगनबाड़ी केंद्रों की सूरत संवारने में भी विश्वविद्यालयों का सहयोग लेगी। केंद्रों में साफ-सफाई, पर्यावरण जागरूकता और बेहतर इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए यूनिवर्सिटी फंड और सीएसआर (CSR) का उपयोग किया जा सकता है। बेसिक शिक्षा महानिदेशक ने इसके लिए जिला शिक्षा और प्रशिक्षण संस्थानों (DIET) को भी विशेष जिम्मेदारी सौंपी है, ताकि आंगनबाड़ी के बच्चों को ‘स्कूल रेडीनेस’ कार्यक्रम के तहत सीधे प्राथमिक स्कूलों से जोड़ा जा सके।निगरानी और दीर्घकालिक मेंटरशिपयह केवल एक बार की गतिविधि नहीं होगी, बल्कि एक स्थायी फ्रेमवर्क (Sustained Framework) के तहत काम करेगा। विश्वविद्यालय इन केंद्रों के लिए ‘मेंटर’ की भूमिका निभाएंगे। समय-समय पर बच्चों की प्रगति की मॉनिटरिंग की जाएगी और यह देखा जाएगा कि उच्च शिक्षण संस्थानों के हस्तक्षेप से बच्चों के सीखने के स्तर में कितना सुधार आया है। राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने भी हाल ही में विश्वविद्यालयों से गांवों और आंगनबाड़ियों के साथ अपने संबंधों को और मजबूत करने का आह्वान किया था।

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