E20 विवाद के बीच अचानक बढ़ी Ethanol-Free Fuel की मांग, प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री दोगुनी से ज्यादा उछली

देशभर के वाहन मालिकों के बीच इन दिनों E20 ईंधन (20% इथेनॉल मिश्रित पेट्रोल) को लेकर एक नई बहस छिड़ गई है। इस विवाद और कार-बाइक चालकों की बढ़ती चिंताओं के बीच भारतीय ऑटोमोबाइल और फ्यूल मार्केट से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। देश में अचानक बिना इथेनॉल वाले यानी इथेनॉल-फ्री पेट्रोल की मांग में जबरदस्त तेजी देखी जा रही है, जिसके चलते प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री का आंकड़ा दोगुने से भी ज्यादा हो गया है।
क्यों प्रीमियम पेट्रोल की तरफ भाग रहे हैं वाहन चालक
दरअसल, बाजार में मिलने वाले सामान्य पेट्रोल में अब इथेनॉल की मात्रा बढ़ाई जा रही है, जिससे कई पुराने और नॉन-ई20 कंपेटिबल वाहनों के इंजनों में तकनीकी खराबी आने का डर बना हुआ है। वाहन मालिकों को शिकायत है कि E20 ईंधन से माइलेज में कमी आ रही है और इंजन के पार्ट्स जल्दी खराब हो रहे हैं। इसी डर और असमंजस के कारण लोग अब अपने वाहनों की सुरक्षा के लिए महंगे और प्रीमियम पेट्रोल (जैसे एक्स्ट्राप्रीमियम, स्पीड और एक्सपी95) का रुख कर रहे हैं, जो पूरी तरह से या काफी हद तक इथेनॉल-मुक्त होता है।
मेट्रो शहरों से लेकर छोटे जिलों तक बदली ईंधन की खपत
फ्यूल स्टेशनों से मिले आंकड़ों के मुताबिक, दिल्ली-एनसीआर, मुंबई, बेंगलुरु जैसे महानगरों के साथ-साथ अब टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री में 100% से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई है। स्थानीय डीलरों का कहना है कि पहले जहां प्रीमियम फ्यूल की बिक्री कुल सेल का महज एक छोटा हिस्सा होती थी, वहीं अब लोग स्वेच्छा से अधिक कीमत चुकाकर इसे खरीद रहे हैं ताकि उनके वाहनों की लाइफ बची रहे।
वाहन कंपनियों और एक्सपर्ट्स की क्या है सलाह
ऑटोमोबाइल सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि यदि आपकी गाड़ी का इंजन E20 फ्यूल के लिए डिजाइन नहीं किया गया है, तो इथेनॉल-फ्री या प्रीमियम ईंधन का इस्तेमाल करना इंजन की लंबी उम्र के लिए बेहतर विकल्प है। हालांकि सरकार लगातार ग्रीन एनर्जी को बढ़ावा देने के लिए इथेनॉल ब्लेंडिंग पर जोर दे रही है, लेकिन उपभोक्ताओं में अपने वाहनों के इंजन को लेकर बैचेनी साफ दिख रही है। आने वाले दिनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि कंपनियां इस मांग को पूरा करने के लिए क्या कदम उठाती हैं।