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Exclusive: बिना वैध बीमा के नहीं मिलेगा पेट्रोल! IRDAI ला रहा ANPR कैमरा पायलट प्रोजेक्ट, पेट्रोल पंप पर होंगे 2 बड़े नुकसान

देश की सड़कों पर चलने वाले करोड़ों वाहनों में से लगभग 50% वाहनों के पास वैध थर्ड पार्टी या कॉम्प्रिहेंसिव मोटर इंश्योरेंस न होने की गंभीर समस्या से निपटने के लिए भारतीय बीमा विनियामक और विकास प्राधिकरण (IRDAI) और सड़क परिवहन मंत्रालय एक अभूतपूर्व तकनीकी रणनीति पर काम कर रहे हैं। इस नई योजना के तहत पेट्रोल पंपों पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकॉग्निशन (ANPR) कैमरों के जरिए वाहनों के बीमा की रियल-टाइम जांच करने का विशेष पायलट प्रोजेक्ट तैयार किया गया है।

इस व्यवस्था के तहत 'नो इंश्योरेंस, नो फ्यूल' (बीमा नहीं तो पेट्रोल नहीं) की सख्त नीति को चरणबद्ध तरीके से लागू करने की तैयारी है। यानी यदि आपकी गाड़ी का बीमा लैप्स हो चुका है और आप पेट्रोल या डीजल भरवाने पंप पर पहुंचते हैं, तो ऑटोमैटिक सिस्टम से आपकी गाड़ी की पहचान तुरंत हो जाएगी।

पेट्रोल पंप पर एक साथ होंगे 2 बड़े नुकसान: न मिलेगा तेल, कटेगा चालान

यदि कोई वाहन चालक बिना सक्रिय बीमा के पेट्रोल पंप के नोजल तक पहुंचता है, तो उसे मौके पर ही दोहरे झटके का सामना करना पड़ेगा:

  1. पेट्रोल-डीजल देने से इनकार: जैसे ही वाहन फ्यूल डिस्पेंसिंग स्टेशन (पेट्रोल पंप नोजल) के पास पहुंचेगा, वहां लगा हाई-स्पीड ANPR कैमरा गाड़ी की नंबर प्लेट को स्कैन कर लेगा। यदि वाहन पोर्टल पर बीमा 'अमान्य' या 'लैप्स' मिला, तो डिस्पेंसिंग मशीन लॉक हो सकती है या पंप कर्मचारी को अलर्ट मिल जाएगा, जिससे वाहन को ईंधन देने से मना कर दिया जाएगा।

  2. तत्काल ₹2,000 से ₹4,000 का ई-चालान: नंबर प्लेट स्कैन होते ही सिस्टम डेटाबेस में दर्ज मोबाइल नंबर पर तुरंत मोटर वाहन अधिनियम की धारा 196 के तहत ई-चालान जनरेट कर भेज देगा। पहली बार पकड़े जाने पर ₹2,000 का जुर्माना और बार-बार उल्लंघन करने पर ₹4,000 का जुर्माना और 3 महीने तक की सजा का प्रावधान है।

कैसे काम करेगा यह ANPR सिस्टम: जानिए पूरी तकनीक

यह पूरी प्रणाली पूरी तरह स्वचालित (Automated) और क्लाउड-बेस्ड नेटवर्क पर आधारित होगी:

  • एंट्री पर ANPR कैमरा स्कैनिंग: पेट्रोल पंप के प्रवेश द्वार और फ्यूल नोजल बे पर हाई-डेफिनिशन एआई-इनेबल्ड ANPR कैमरे स्थापित किए जाएंगे।

  • केंद्रीय डेटाबेस 'वाहन' से मिलान: कैमरा गाड़ी की नंबर प्लेट पढ़ते ही मात्र 1 से 2 सेकंड के भीतर 'वाहन' (VAHAN) पोर्टल और भारतीय बीमा सूचना ब्यूरो (IIB) के सेंट्रलाइज्ड सर्वर से डेटा का मिलान करेगा।

  • स्क्रीन पर सिग्नल/अलर्ट: यदि बीमा वैध है, तो स्क्रीन पर हरा सिग्नल दिखेगा और ईंधन भरने की अनुमति मिल जाएगी। यदि बीमा समाप्त है, तो लाल सिग्नल के साथ पंप स्क्रीन पर वार्निंग दिखेगी और ऑटो-चालान ट्रिगर हो जाएगा।

इस सख्त कदम की नौबत क्यों आई: 50% गाड़ियां सड़कों पर बिना इंश्योरेंस

भारत में मोटर वाहन अधिनियम के तहत किसी भी वाहन का कम से कम 'थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस' होना कानूनी रूप से अनिवार्य है। इसके बावजूद जनरल इंश्योरेंस काउंसिल के आंकड़ों के अनुसार:

  • देश में पंजीकृत कुल वाहनों में से लगभग 50% से अधिक गाड़ियां बिना किसी वैध बीमा के सड़कों पर दौड़ रही हैं, जिनमें दोपहिया वाहनों की तादाद सबसे ज्यादा है।

  • नई गाड़ी खरीदते समय लोग 3 या 5 साल का बंडल इंश्योरेंस तो ले लेते हैं, लेकिन उसकी अवधि समाप्त होने के बाद करोड़ों लोग पॉलिसी को रिन्यू नहीं कराते।

  • सड़क हादसों की स्थिति में जब पीड़ित या उसके परिजनों को मुआवजा (Third Party Claims) देने की बात आती है, तो बीमा न होने के कारण पीड़ितों को अदालतों के चक्कर काटने पड़ते हैं और उन्हें उचित आर्थिक सुरक्षा नहीं मिल पाती।

पहले चरण में कहां और कब शुरू होगा पायलट प्रोजेक्ट?

सूत्रों के मुताबिक, इस महत्वाकांक्षी परियोजना को शुरुआत में मेट्रो शहरों और राष्ट्रीय राजमार्गों (NH) पर स्थित चुनिंदा प्रमुख तेल कंपनियों (IOCL, BPCL, HPCL) के स्वामित्व वाले पेट्रोल पंपों पर पायलट आधार पर परखा जाएगा।

शुरुआती महीनों में चालान काटने के बजाय वाहन मालिकों को पंप पर ही बीमा रिन्यू कराने के लिए चेतावनी संदेश और मौके पर ही डिजिटल पॉलिसी खरीदने के लिए क्यूआर कोड की सुविधा दी जाएगी। पायलट प्रोजेक्ट के सफल परीक्षण और तकनीकी खामियां दूर होने के बाद इसे पूरे देश के पेट्रोल पंप नेटवर्क पर अनिवार्य करने की योजना बनाई जा रही है।

इसलिए, पेट्रोल पंप पर अचानक होने वाले भारी जुर्माने और ईंधन न मिलने की शर्मिंदगी से बचने के लिए वाहन चालकों को सलाह दी जाती है कि वे आज ही अपने वाहन के इंश्योरेंस की वैधता जांच लें और समय रहते उसे रिन्यू करा लें।

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