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Google 28th Birthday: गैराज से निकलकर 6 महाद्वीपों तक फैला साम्राज्य, टी-रेक्स डायनासोर से लेकर चांद पर ऑफिस तक

दुनिया भर में सूचनाओं को व्यवस्थित करने और इंटरनेट की दुनिया को एक नई दिशा देने वाला सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन 'गूगल' (Google) आज अपना 28वां जन्मदिन मना रहा है। साल 1998 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो छात्रों, लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन द्वारा मेनलो पार्क, कैलिफोर्निया के एक साधारण गैराज से शुरू की गई यह छोटी सी टेक परियोजना आज 6 महाद्वीपों के 200 से भी अधिक बड़े शहरों में अपना विशालकाय नेटवर्क स्थापित कर चुकी है। गूगल केवल एक टेक फर्म नहीं बल्कि आधुनिक मानव सभ्यता के दैनिक जीवन, शोध, संचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।

कंपनी की 28 वर्षों की इस अभूतपूर्व यात्रा के दौरान उसके वैश्विक परिसरों, डेटा सेंटर्स और इंजीनियरिंग लैब्स ने स्थानीय संस्कृति, अनूठे वास्तुकला डिजाइन, पर्यावरण अनुकूलता (सस्टेनेबिलिटी) और अत्याधुनिक तकनीक का ऐसा अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है जो कॉर्पोरेट जगत में दुर्लभ माना जाता है। माउंटेन व्यू स्थित हेडक्वार्टर के बीचों-बीच खड़े डायनासोर के कंकाल से लेकर 2007 में घोषित चांद पर ऑफिस खोलने के मजेदार प्रोजेक्ट तक, गूगल के पास इतिहास के ऐसे दर्जनों पहलू हैं जो दुनिया भर के टेक प्रेमियों को आज भी रोमांचित करते हैं।

हेडक्वार्टर में 'स्टैन' डायनासोर और चांद पर लूनर बेस की योजना: गूगल के ऐतिहासिक किस्से

गूगल के कैलिफोर्निया स्थित मुख्य मुख्यालय 'गूगलप्लेक्स' (Googleplex) के प्रांगण में कदम रखते ही आगंतुकों का स्वागत एक विशाल कांस्य (ब्रॉन्ज) निर्मित टायरानोसॉरस रेक्स (T-Rex) डायनासोर के कंकाल से होता है, जिसे प्यार से 'स्टैन' (Stan) नाम दिया गया है। कंपनी के संस्थापकों ने इस प्राचीन जीवाश्म प्रतीक को हेडक्वार्टर के बीचों-बीच इसलिए स्थापित कराया था ताकि यह हर इंजीनियर और कर्मचारी को हर दिन याद दिला सके कि यदि कंपनी ने वक्त के साथ खुद को नहीं बदला, नवाचार नहीं किया और तकनीक के साथ तेजी से विकास नहीं किया, तो उसका हश्र भी डायनासोर की तरह विलुप्त होने जैसा हो सकता है। यह स्टैन डायनासोर निरंतर बदलाव और सजगता का कॉर्पोरेट प्रतीक बन चुका है।

वहीं गूगल के इतिहास का सबसे मजेदार और लंबा खिंचने वाला प्रसंग इसका तथाकथित 'मून बेस प्रोजेक्ट' है। कंपनी ने वर्ष 2007 में बड़े उत्साह के साथ 'गूगल कोपरनिकस होस्टिंग एनवायरनमेंट एंड एक्सपेरिमेंट इन सर्च इंजीनियरिंग' यानी G.C.H.E.E.S.E. प्रोजेक्ट की रूपरेखा रखी थी, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर दुनिया का पहला लूनर डेटा सेंटर और रिसर्च ऑफिस स्थापित करना था। यद्यपि यह योजना अपने प्रारंभिक शेड्यूल से काफी पीछे चल रही है, लेकिन गूगल की इंजीनियरिंग टीमें हल्के-फुल्के अंदाज में आज भी कहती हैं कि वे एक बार में एक छोटा कदम उठा रहे हैं और अंतरिक्ष में इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर के द्वार खोलने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

अमेरिकी कैंपस का अनूठा इकोसिस्टम: ड्रैगनस्केल छतें, मधुमक्खी के छत्ते और 7.6 लाख मील की GBikes

गूगल के कॉर्पोरेट ऑफिस केवल कंक्रीट की इमारतें नहीं हैं बल्कि अपने आप में एक आत्मनिर्भर पर्यावरण मॉडल हैं। वर्ष 2010 में कंपनी ने माउंटेन व्यू हेडक्वार्टर के आसपास कई मधुमक्खी के छत्ते (Beehives) स्थापित किए। इस प्रोजेक्ट का दोहरा उद्देश्य था: सिलिकॉन वैली के स्थानीय पर्यावरण में परागण और मधुमक्खियों की घटती आबादी को सहारा देना, और साथ ही गूगल के कैफेटेरिया व रसोई के लिए सौ प्रतिशत शुद्ध, जैविक और स्थानीय शहद उपलब्ध कराना। कर्मचारियों के विशाल कैंपस में एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक तेजी से आवागमन के लिए 2007 में लाल, नीली, पीली और हरी 'GBikes' शुरू की गईं। इन साइकिलों से 2019 तक 19 लाख ट्रिप पूरी हो चुकी थीं, जो कुल 7,65,000 मील की दूरी तय करने के बराबर है—यानी पृथ्वी के लगभग 31 पूरे चक्कर लगाने जितनी दूरी।

पर्यावरण संरक्षण के मामले में कैलिफोर्निया स्थित बे व्यू कैंपस की छत पूरी दुनिया के लिए वास्तुकला का अजूबा मानी जाती है। इसकी छत पर "ड्रैगनस्केल" (Dragonscale) सोलर कैनोपी डिजाइन तैयार किया गया है, जिसमें 90,000 से अधिक विशेष सोलर पैनल्स लगे हैं। यह भव्य छत न केवल इमारत के अंदरूनी भाग को बिजली देती है बल्कि ऊर्जा का ऐसा स्वच्छ भंडारण करती है जो आधुनिक ग्रीन एनर्जी का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी हेडक्वार्टर के कुल पार्किंग स्पेस के 10 प्रतिशत हिस्से को सीधे अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशनों से लैस किया गया है ताकि कर्मचारी जीवाश्म ईंधन से मुक्त होकर पर्यावरण अनुकूल परिवहन अपना सकें।

ग्लोबल वर्कप्लेस संस्कृति: 6 महाद्वीपों में स्थानीय कला, विरासत और आधुनिकता का संगम

वैश्विक विस्तार के मामले में गूगल ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कार्यालय वर्ष 2001 में टोक्यो (जापान) में और दूसरा हैम्बर्ग (जर्मनी) में स्थापित किया था। आज टोक्यो के व्यस्त शिबुया स्क्रैम्बल क्रॉसिंग के ऊपर बने टोक्यो स्ट्रीम ऑफिस से लेकर अफ्रीका के रेगिस्तानी किनारों तक कंपनी की मौजूदगी है। जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) के ऑफिस में स्थानीय महिला कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित विशाल आर्ट इंस्टॉलेशन लगाया गया है, जिस पर स्थानीय जुबां में "Howzit" लिखा है, जिसका अर्थ "आप कैसे हैं?" होता है। वहीं मॉन्ट्रियल (कनाडा) ऑफिस में कैरेन डेस्पारोइस और नादिया मायरे जैसे मशहूर स्थानीय कलाकारों की कृतियां सजी हैं, जबकि मेक्सिको सिटी के दफ्तर में बारीक नक्काशीदार मैक्सिकन लोक-कला "पैपेल पिकाडो" की दीवारें लैटिन संस्कृति का जीवंत परिचय देती हैं।

अटलांटा के ऑफिस में स्थापित WERD कैफे अमेरिका के पहले अश्वेत-स्वामित्व और अश्वेत-संचालित ऐतिहासिक रेडियो स्टेशन को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। दूसरी ओर, लंदन के 6 पैनक्रास स्क्वायर ऑफिस में 200 से अधिक गूगल कर्मचारियों ने मिलकर रंग-बिरंगे स्टिकी-नोट्स से एक अनूठी आर्ट गैलरी बनाई है जिसमें पिकाचू, सुपर मारियो और 'डॉक्टर हू' जैसे लोकप्रिय पॉप-कल्चर किरदार मुस्कुराते नजर आते हैं। पेरिस (फ्रांस) स्थित गूगल का दफ्तर 19वीं सदी का एक प्राचीन फ्रांसीसी महलनुमा घर 'होटल डी वैट्री' था, जिसे बाद में रेलवे कंपनी ने अपने हेडक्वार्टर के रूप में इस्तेमाल किया था। गूगल ने उस विरासत को सुरक्षित रखते हुए छत पर पश्चिमी फ्रांस के उन ऐतिहासिक रेलवे स्टेशनों के नाम आज भी संरक्षित रखे हैं।

सस्टेनेबिलिटी, हाइड्रोपावर और लैटिन अमेरिका का पहला अर्बन फार्म

वर्ष 2030 तक अपनी पूरी ग्लोबल वैल्यू चेन और दैनिक संचालन को 'नेट-जीरो कार्बन एमिशन' के स्तर पर लाने के लिए गूगल ने 'अडैप्टिव रियूज' नीति पर काम करना शुरू किया है। इसके तहत नई इमारतें खड़ी करने के बजाय 150 साल पुरानी औद्योगिक इमारतों को पुनर्जीवित किया जाता है, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण डबलिन (आयरलैंड) में बोलैंड मिल्स की ऐतिहासिक फ्लोर मिल इमारत में बना आधुनिक टेक ऑफिस है। न्यूयॉर्क शहर के विशाल कॉर्पोरेट ऑफिस को हाल ही में अपग्रेड किए गए हाइड्रोपावर (जलविद्युत) सिस्टम से पूरी तरह जोड़ दिया गया है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा की खपत सुनिश्चित हुई है और पारंपरिक थर्मल पावर प्लांटों पर निर्भरता समाप्त हो गई है।

ब्राजील के बेलो होरिजोंटे स्थित गूगल कार्यालय का इंटीरियर डिजाइन अमेजन के बाद दूसरे सबसे बड़े सेराडो बायोम के दुर्लभ पेड़-पौधों से सजाया गया है। यहां 360 से अधिक दुर्लभ ऑर्किड के पौधे एक नियंत्रित वातावरण में उगाए गए हैं ताकि कोई बीमारी न फैले। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह ऑफिस लैटिन अमेरिका के पहले 'अर्बन फार्म' के साथ एक ही इमारत में स्थित है, और गूगल कर्मचारियों के कैफेटेरिया में परोसा जाने वाला ताजा सलाद इसी फार्म से सीधे टेबल तक पहुंचता है। बेल्जियम के सेंट घिसलेन में कंपनी ने वर्ष 2010 में दुनिया का पहला ऐसा अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित किया था जो बिना किसी पारंपरिक रेफ्रिजरेशन सिस्टम के प्राकृतिक हवा और पानी के वाष्पीकरण से ठंडा रहता है।

दिव्यांग-अनुकूल समावेशी डिजाइन से लेकर अकरा की एआई लैब्स तक मानवीय पहल

गूगल का कार्यस्थल केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक समावेशन को भी प्राथमिकता देता है। दक्षिण कोरिया के सियोल ऑफिस में जब एक नए फ्लोर का निर्माण हुआ, तो कंपनी के 'डिसएबिलिटी अलायंस' समूह से जुड़े दिव्यांग कर्मचारियों के सुझावों को हूबहू लागू किया गया। इसमें दृष्टिहीनों के लिए स्पर्शनीय ब्रेल साइनेज, व्हीलचेयर के सुगम आवागमन के लिए चौड़े गलियारे और बिना छुए स्वतः खुलने वाले सेंसरयुक्त स्लाइडिंग दरवाजे लगाए गए। दुबई का यूएई ऑफिस रेगिस्तान की रेतीली थीम और मध्य-पूर्वी संस्कृति की विविधता को मीटिंग रूम्स के नामों में दर्शाता है।

अफ्रीका महाद्वीप पर तकनीक का लोकतंत्रीकरण करने के लिए 2018 में घाना की राजधानी अकरा में गूगल ने अपना पहला समर्पित 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रिसर्च सेंटर' शुरू किया। यह लैब दूरदराज के अफ्रीकी गांवों में बिजली वितरण सुधारने के लिए उपग्रहों से इमारतों की सटीक मैपिंग और क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान तलाशने में जुटी है। सिंगापुर कैंपस में 2019 से संचालित 'डेवलपर स्पेस' पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया के स्टार्टअप्स और युवा कोडर्स को मेंटरशिप प्रदान कर रहा है। वहीं ताइवान, जो 2006 में महज एक कर्मचारी के साथ शुरू हुआ था, आज अमेरिका के बाहर गूगल का सबसे विशाल हार्डवेयर इंजीनियरिंग हब बन चुका है, जहां पिक्सल फोन और स्मार्ट डिवाइसेस के भविष्य को आकार दिया जाता है। अपने 28वें जन्मदिन पर गूगल आज भी दुनिया भर की सर्च क्वेरीज को सुलझाते हुए भविष्य की जनरेटिव एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग की दहलीज पर मजबूती से खड़ा है।

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Google 28th Birthday: गैराज से निकलकर 6 महाद्वीपों तक फैला साम्राज्य, टी-रेक्स डायनासोर से लेकर चांद पर ऑफिस तक

दुनिया भर में सूचनाओं को व्यवस्थित करने और इंटरनेट की दुनिया को एक नई दिशा देने वाला सबसे लोकप्रिय सर्च इंजन 'गूगल' (Google) आज अपना 28वां जन्मदिन मना रहा है। साल 1998 में स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के दो छात्रों, लैरी पेज और सर्गेई ब्रिन द्वारा मेनलो पार्क, कैलिफोर्निया के एक साधारण गैराज से शुरू की गई यह छोटी सी टेक परियोजना आज 6 महाद्वीपों के 200 से भी अधिक बड़े शहरों में अपना विशालकाय नेटवर्क स्थापित कर चुकी है। गूगल केवल एक टेक फर्म नहीं बल्कि आधुनिक मानव सभ्यता के दैनिक जीवन, शोध, संचार और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है।

कंपनी की 28 वर्षों की इस अभूतपूर्व यात्रा के दौरान उसके वैश्विक परिसरों, डेटा सेंटर्स और इंजीनियरिंग लैब्स ने स्थानीय संस्कृति, अनूठे वास्तुकला डिजाइन, पर्यावरण अनुकूलता (सस्टेनेबिलिटी) और अत्याधुनिक तकनीक का ऐसा अद्भुत संगम प्रस्तुत किया है जो कॉर्पोरेट जगत में दुर्लभ माना जाता है। माउंटेन व्यू स्थित हेडक्वार्टर के बीचों-बीच खड़े डायनासोर के कंकाल से लेकर 2007 में घोषित चांद पर ऑफिस खोलने के मजेदार प्रोजेक्ट तक, गूगल के पास इतिहास के ऐसे दर्जनों पहलू हैं जो दुनिया भर के टेक प्रेमियों को आज भी रोमांचित करते हैं।

हेडक्वार्टर में 'स्टैन' डायनासोर और चांद पर लूनर बेस की योजना: गूगल के ऐतिहासिक किस्से

गूगल के कैलिफोर्निया स्थित मुख्य मुख्यालय 'गूगलप्लेक्स' (Googleplex) के प्रांगण में कदम रखते ही आगंतुकों का स्वागत एक विशाल कांस्य (ब्रॉन्ज) निर्मित टायरानोसॉरस रेक्स (T-Rex) डायनासोर के कंकाल से होता है, जिसे प्यार से 'स्टैन' (Stan) नाम दिया गया है। कंपनी के संस्थापकों ने इस प्राचीन जीवाश्म प्रतीक को हेडक्वार्टर के बीचों-बीच इसलिए स्थापित कराया था ताकि यह हर इंजीनियर और कर्मचारी को हर दिन याद दिला सके कि यदि कंपनी ने वक्त के साथ खुद को नहीं बदला, नवाचार नहीं किया और तकनीक के साथ तेजी से विकास नहीं किया, तो उसका हश्र भी डायनासोर की तरह विलुप्त होने जैसा हो सकता है। यह स्टैन डायनासोर निरंतर बदलाव और सजगता का कॉर्पोरेट प्रतीक बन चुका है।

वहीं गूगल के इतिहास का सबसे मजेदार और लंबा खिंचने वाला प्रसंग इसका तथाकथित 'मून बेस प्रोजेक्ट' है। कंपनी ने वर्ष 2007 में बड़े उत्साह के साथ 'गूगल कोपरनिकस होस्टिंग एनवायरनमेंट एंड एक्सपेरिमेंट इन सर्च इंजीनियरिंग' यानी G.C.H.E.E.S.E. प्रोजेक्ट की रूपरेखा रखी थी, जिसका उद्देश्य चंद्रमा की सतह पर दुनिया का पहला लूनर डेटा सेंटर और रिसर्च ऑफिस स्थापित करना था। यद्यपि यह योजना अपने प्रारंभिक शेड्यूल से काफी पीछे चल रही है, लेकिन गूगल की इंजीनियरिंग टीमें हल्के-फुल्के अंदाज में आज भी कहती हैं कि वे एक बार में एक छोटा कदम उठा रहे हैं और अंतरिक्ष में इंटरनेट इन्फ्रास्ट्रक्चर के द्वार खोलने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं।

अमेरिकी कैंपस का अनूठा इकोसिस्टम: ड्रैगनस्केल छतें, मधुमक्खी के छत्ते और 7.6 लाख मील की GBikes

गूगल के कॉर्पोरेट ऑफिस केवल कंक्रीट की इमारतें नहीं हैं बल्कि अपने आप में एक आत्मनिर्भर पर्यावरण मॉडल हैं। वर्ष 2010 में कंपनी ने माउंटेन व्यू हेडक्वार्टर के आसपास कई मधुमक्खी के छत्ते (Beehives) स्थापित किए। इस प्रोजेक्ट का दोहरा उद्देश्य था: सिलिकॉन वैली के स्थानीय पर्यावरण में परागण और मधुमक्खियों की घटती आबादी को सहारा देना, और साथ ही गूगल के कैफेटेरिया व रसोई के लिए सौ प्रतिशत शुद्ध, जैविक और स्थानीय शहद उपलब्ध कराना। कर्मचारियों के विशाल कैंपस में एक बिल्डिंग से दूसरी बिल्डिंग तक तेजी से आवागमन के लिए 2007 में लाल, नीली, पीली और हरी 'GBikes' शुरू की गईं। इन साइकिलों से 2019 तक 19 लाख ट्रिप पूरी हो चुकी थीं, जो कुल 7,65,000 मील की दूरी तय करने के बराबर है—यानी पृथ्वी के लगभग 31 पूरे चक्कर लगाने जितनी दूरी।

पर्यावरण संरक्षण के मामले में कैलिफोर्निया स्थित बे व्यू कैंपस की छत पूरी दुनिया के लिए वास्तुकला का अजूबा मानी जाती है। इसकी छत पर "ड्रैगनस्केल" (Dragonscale) सोलर कैनोपी डिजाइन तैयार किया गया है, जिसमें 90,000 से अधिक विशेष सोलर पैनल्स लगे हैं। यह भव्य छत न केवल इमारत के अंदरूनी भाग को बिजली देती है बल्कि ऊर्जा का ऐसा स्वच्छ भंडारण करती है जो आधुनिक ग्रीन एनर्जी का सर्वश्रेष्ठ उदाहरण है। इसके अतिरिक्त, अमेरिकी हेडक्वार्टर के कुल पार्किंग स्पेस के 10 प्रतिशत हिस्से को सीधे अत्याधुनिक इलेक्ट्रिक व्हीकल (EV) चार्जिंग स्टेशनों से लैस किया गया है ताकि कर्मचारी जीवाश्म ईंधन से मुक्त होकर पर्यावरण अनुकूल परिवहन अपना सकें।

ग्लोबल वर्कप्लेस संस्कृति: 6 महाद्वीपों में स्थानीय कला, विरासत और आधुनिकता का संगम

वैश्विक विस्तार के मामले में गूगल ने अपना पहला अंतरराष्ट्रीय कार्यालय वर्ष 2001 में टोक्यो (जापान) में और दूसरा हैम्बर्ग (जर्मनी) में स्थापित किया था। आज टोक्यो के व्यस्त शिबुया स्क्रैम्बल क्रॉसिंग के ऊपर बने टोक्यो स्ट्रीम ऑफिस से लेकर अफ्रीका के रेगिस्तानी किनारों तक कंपनी की मौजूदगी है। जोहान्सबर्ग (दक्षिण अफ्रीका) के ऑफिस में स्थानीय महिला कारीगरों द्वारा हस्तनिर्मित विशाल आर्ट इंस्टॉलेशन लगाया गया है, जिस पर स्थानीय जुबां में "Howzit" लिखा है, जिसका अर्थ "आप कैसे हैं?" होता है। वहीं मॉन्ट्रियल (कनाडा) ऑफिस में कैरेन डेस्पारोइस और नादिया मायरे जैसे मशहूर स्थानीय कलाकारों की कृतियां सजी हैं, जबकि मेक्सिको सिटी के दफ्तर में बारीक नक्काशीदार मैक्सिकन लोक-कला "पैपेल पिकाडो" की दीवारें लैटिन संस्कृति का जीवंत परिचय देती हैं।

अटलांटा के ऑफिस में स्थापित WERD कैफे अमेरिका के पहले अश्वेत-स्वामित्व और अश्वेत-संचालित ऐतिहासिक रेडियो स्टेशन को श्रद्धांजलि अर्पित करता है। दूसरी ओर, लंदन के 6 पैनक्रास स्क्वायर ऑफिस में 200 से अधिक गूगल कर्मचारियों ने मिलकर रंग-बिरंगे स्टिकी-नोट्स से एक अनूठी आर्ट गैलरी बनाई है जिसमें पिकाचू, सुपर मारियो और 'डॉक्टर हू' जैसे लोकप्रिय पॉप-कल्चर किरदार मुस्कुराते नजर आते हैं। पेरिस (फ्रांस) स्थित गूगल का दफ्तर 19वीं सदी का एक प्राचीन फ्रांसीसी महलनुमा घर 'होटल डी वैट्री' था, जिसे बाद में रेलवे कंपनी ने अपने हेडक्वार्टर के रूप में इस्तेमाल किया था। गूगल ने उस विरासत को सुरक्षित रखते हुए छत पर पश्चिमी फ्रांस के उन ऐतिहासिक रेलवे स्टेशनों के नाम आज भी संरक्षित रखे हैं।

सस्टेनेबिलिटी, हाइड्रोपावर और लैटिन अमेरिका का पहला अर्बन फार्म

वर्ष 2030 तक अपनी पूरी ग्लोबल वैल्यू चेन और दैनिक संचालन को 'नेट-जीरो कार्बन एमिशन' के स्तर पर लाने के लिए गूगल ने 'अडैप्टिव रियूज' नीति पर काम करना शुरू किया है। इसके तहत नई इमारतें खड़ी करने के बजाय 150 साल पुरानी औद्योगिक इमारतों को पुनर्जीवित किया जाता है, जिसका सबसे बड़ा प्रमाण डबलिन (आयरलैंड) में बोलैंड मिल्स की ऐतिहासिक फ्लोर मिल इमारत में बना आधुनिक टेक ऑफिस है। न्यूयॉर्क शहर के विशाल कॉर्पोरेट ऑफिस को हाल ही में अपग्रेड किए गए हाइड्रोपावर (जलविद्युत) सिस्टम से पूरी तरह जोड़ दिया गया है, जिससे स्वच्छ ऊर्जा की खपत सुनिश्चित हुई है और पारंपरिक थर्मल पावर प्लांटों पर निर्भरता समाप्त हो गई है।

ब्राजील के बेलो होरिजोंटे स्थित गूगल कार्यालय का इंटीरियर डिजाइन अमेजन के बाद दूसरे सबसे बड़े सेराडो बायोम के दुर्लभ पेड़-पौधों से सजाया गया है। यहां 360 से अधिक दुर्लभ ऑर्किड के पौधे एक नियंत्रित वातावरण में उगाए गए हैं ताकि कोई बीमारी न फैले। सबसे दिलचस्प बात यह है कि यह ऑफिस लैटिन अमेरिका के पहले 'अर्बन फार्म' के साथ एक ही इमारत में स्थित है, और गूगल कर्मचारियों के कैफेटेरिया में परोसा जाने वाला ताजा सलाद इसी फार्म से सीधे टेबल तक पहुंचता है। बेल्जियम के सेंट घिसलेन में कंपनी ने वर्ष 2010 में दुनिया का पहला ऐसा अत्याधुनिक डेटा सेंटर स्थापित किया था जो बिना किसी पारंपरिक रेफ्रिजरेशन सिस्टम के प्राकृतिक हवा और पानी के वाष्पीकरण से ठंडा रहता है।

दिव्यांग-अनुकूल समावेशी डिजाइन से लेकर अकरा की एआई लैब्स तक मानवीय पहल

गूगल का कार्यस्थल केवल तकनीकी नवाचार तक सीमित नहीं है बल्कि सामाजिक समावेशन को भी प्राथमिकता देता है। दक्षिण कोरिया के सियोल ऑफिस में जब एक नए फ्लोर का निर्माण हुआ, तो कंपनी के 'डिसएबिलिटी अलायंस' समूह से जुड़े दिव्यांग कर्मचारियों के सुझावों को हूबहू लागू किया गया। इसमें दृष्टिहीनों के लिए स्पर्शनीय ब्रेल साइनेज, व्हीलचेयर के सुगम आवागमन के लिए चौड़े गलियारे और बिना छुए स्वतः खुलने वाले सेंसरयुक्त स्लाइडिंग दरवाजे लगाए गए। दुबई का यूएई ऑफिस रेगिस्तान की रेतीली थीम और मध्य-पूर्वी संस्कृति की विविधता को मीटिंग रूम्स के नामों में दर्शाता है।

अफ्रीका महाद्वीप पर तकनीक का लोकतंत्रीकरण करने के लिए 2018 में घाना की राजधानी अकरा में गूगल ने अपना पहला समर्पित 'आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) रिसर्च सेंटर' शुरू किया। यह लैब दूरदराज के अफ्रीकी गांवों में बिजली वितरण सुधारने के लिए उपग्रहों से इमारतों की सटीक मैपिंग और क्षेत्रीय समस्याओं का समाधान तलाशने में जुटी है। सिंगापुर कैंपस में 2019 से संचालित 'डेवलपर स्पेस' पूरे दक्षिण-पूर्व एशिया के स्टार्टअप्स और युवा कोडर्स को मेंटरशिप प्रदान कर रहा है। वहीं ताइवान, जो 2006 में महज एक कर्मचारी के साथ शुरू हुआ था, आज अमेरिका के बाहर गूगल का सबसे विशाल हार्डवेयर इंजीनियरिंग हब बन चुका है, जहां पिक्सल फोन और स्मार्ट डिवाइसेस के भविष्य को आकार दिया जाता है। अपने 28वें जन्मदिन पर गूगल आज भी दुनिया भर की सर्च क्वेरीज को सुलझाते हुए भविष्य की जनरेटिव एआई और क्वांटम कंप्यूटिंग की दहलीज पर मजबूती से खड़ा है।

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