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हॉर्मुज की जंग में अमेरिका को अकेला छोड़ेगा यूरोप, ड्रैगन और रूस के साथ मिलकर नई घेराबंदी की तैयारी, ट्रंप की बढ़ी टेंशन

News India Live, Digital Desk: अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के मंच से एक बेहद चौंकाने वाली खबर सामने आ रही है। हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) में जारी तनाव के बीच यूरोपीय देशों ने अमेरिका को बड़ा झटका देने की तैयारी कर ली है। रिपोर्ट्स के अनुसार, यूरोपीय संघ (EU) के देश अब हॉर्मुज की सुरक्षा के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले गठबंधन से अलग होकर एक नया ‘कोएलिशन’ (Coalition) बनाने पर विचार कर रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि इस नए सुरक्षा घेरे में चीन और रूस को शामिल करने की योजना है, जबकि वर्तमान अमेरिकी प्रशासन को इससे बाहर रखा जा सकता है।ट्रंप की नीतियों से नाराज यूरोप ने बदला पासायूरोपीय देशों के इस संभावित कदम के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की सख्त विदेश नीतियों को मुख्य कारण माना जा रहा है। दरअसल, अमेरिका ने जिस तरह से हॉर्मुज जलडमरूमध्य में ईरान की घेराबंदी की है, उससे यूरोप के ऊर्जा हितों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। यूरोपीय देशों को डर है कि अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता तनाव पूरे पश्चिम एशिया को युद्ध की आग में झोंक सकता है। ऐसे में यूरोप अब वाशिंगटन पर निर्भर रहने के बजाय खुद का रास्ता तलाश रहा है।चीन और रूस के साथ हाथ मिलाएगा यूरोपीय संघ?प्रस्तावित योजना के मुताबिक, यूरोपीय देश हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के लिए चीन और रूस जैसी महाशक्तियों के साथ सहयोग कर सकते हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह गठबंधन हकीकत बनता है, तो यह वैश्विक राजनीति में एक ऐतिहासिक बदलाव होगा। यह पहली बार होगा जब अमेरिका के पारंपरिक मित्र देश सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दे पर उसके प्रतिद्वंद्वियों (चीन-रूस) के पाले में खड़े नजर आएंगे।वैश्विक तेल बाजार और भारत पर असरहॉर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण तेल गलियारा है। यहाँ से होने वाली सप्लाई में जरा सी भी बाधा वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला सकती है। यूरोप की इस नई रणनीति का असर कच्चे तेल की कीमतों पर भी पड़ सकता है। भारत जैसे देशों के लिए, जो अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए इसी समुद्री मार्ग पर निर्भर हैं, यह कूटनीतिक फेरबदल काफी महत्वपूर्ण है। यदि यूरोप और चीन मिलकर सुरक्षा की जिम्मेदारी संभालते हैं, तो अमेरिका के वर्चस्व को बड़ी चुनौती मिल सकती है।

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