Iran Israel Conflict : फिर बरसेंगी मिसाइलें पाकिस्तान की मध्यस्थता फेल? ईरान की नई धमकी से दुनिया में हड़कंप

News India Live, Digital Desk: मिडल ईस्ट में शांति की उम्मीदों को एक बार फिर बड़ा झटका लगा है। पाकिस्तान की ओर से कराई गई सीजफायर (संघर्ष विराम) की पहल अब टूटने की कगार पर खड़ी नजर आ रही है। ईरान ने इजरायल को सीधी चेतावनी देते हुए कहा है कि अगर लेबनान में हमले नहीं रुके, तो वह इस समझौते से पीछे हट जाएगा। इस घटनाक्रम ने न केवल इस्लामाबाद की कूटनीतिक कोशिशों पर पानी फेर दिया है, बल्कि पूरी दुनिया को एक बड़े युद्ध की आशंका से भर दिया है।ईरान का अल्टीमेटम: “हल्के में न ले इजरायल”ईरान के विदेश मंत्रालय ने बुधवार को एक कड़ा बयान जारी करते हुए कहा कि इजरायल लगातार सीजफायर की शर्तों का उल्लंघन कर रहा है। ईरान का आरोप है कि समझौते के बावजूद इजरायल ने लेबनान में हिजबुल्लाह के ठिकानों पर बमबारी जारी रखी है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अरागची ने पाकिस्तानी सैन्य नेतृत्व और मध्यस्थों से बात करते हुए साफ कर दिया कि “धैर्य की एक सीमा होती है।” अगर हमले बंद नहीं हुए, तो तेहरान अपनी रक्षा के लिए फिर से मिसाइल हमलों का सहारा ले सकता है।पाकिस्तान की ‘डिप्लोमेसी’ पर उठ रहे सवालहाल ही में पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शाहबाज शरीफ और सेना प्रमुख जनरल असीम मुनीर ने अमेरिका और ईरान के बीच दो सप्ताह के युद्धविराम का दावा कर बड़ी वाहवाही बटोरी थी। इस्लामाबाद को उम्मीद थी कि वह इस संकट में एक बड़े ‘पीसमेकर’ के रूप में उभरेगा। लेकिन इजरायल के सख्त रुख और ईरान की पलटवार की धमकी ने पाकिस्तान को मुश्किल में डाल दिया है। अब यह सवाल उठ रहा है कि क्या पाकिस्तान ने बिना पूरी तैयारी और इजरायल की सहमति के ही इस समझौते का ढिंढोरा पीट दिया था?इजरायल का दोटूक जवाब: “लेबनान समझौते का हिस्सा नहीं”विवाद की सबसे बड़ी जड़ ‘लेबनान’ बना हुआ है। जहां पाकिस्तान और ईरान का दावा है कि सीजफायर सभी मोर्चों (लेबनान सहित) पर प्रभावी है, वहीं इजरायली प्रधानमंत्री कार्यालय ने स्पष्ट कर दिया है कि यह समझौता केवल ईरान के साथ सीधे टकराव को रोकने के लिए है, इसमें लेबनान शामिल नहीं है। इजरायल का कहना है कि वह अपनी सुरक्षा के लिए लेबनान में ऑपरेशन जारी रखेगा। दोनों पक्षों के इन विरोधाभासी दावों ने इस समझौते को कागजों तक ही सीमित कर दिया है।क्या फिर से बंद होगा होर्मुज का रास्ता?ईरान की इस नई धमकी के साथ ही ‘होर्मुज की जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) को फिर से बंद करने की चर्चा तेज हो गई है। अगर ईरान सीजफायर से पीछे हटता है, तो वह सबसे पहले इस समुद्री रास्ते को ब्लॉक कर सकता है, जिससे वैश्विक तेल सप्लाई ठप हो जाएगी। व्हाइट हाउस ने इस पर गहरी चिंता जताई है और पाकिस्तान के जरिए बातचीत का रास्ता खुला रखने की कोशिश कर रहा है। लेकिन फिलहाल, मिडल ईस्ट की हवाओं में शांति के बजाय बारूद की गंध ज्यादा महसूस हो रही है।