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ITR Filing 2026: कंपनी ने न्यू टैक्स रिजीम से काट लिया TDS? चिंता न करें, रिटर्न भरते समय ऐसे चुनें ओल्ड टैक्स रिजीम और पाएं पूरा रिफंड

इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने का सीजन शुरू होते ही नौकरीपेशा कर्मचारियों (Salaried Employees) के बीच टैक्स रिजीम को लेकर असमंजस की स्थिति बन जाती है। अक्सर देखा जाता है कि कई कर्मचारी अपनी व्यस्तता या जानकारी के अभाव में कंपनी (Employer) द्वारा तय की गई समय सीमा के भीतर यह डिक्लेरेशन नहीं दे पाते कि वे ओल्ड टैक्स रिजीम (Old Tax Regime) चुनना चाहते हैं।

ऐसी स्थिति में कंपनियां नियमों के मुताबिक डिफॉल्ट रूप से न्यू टैक्स रिजीम (New Tax Regime) के आधार पर कर्मचारी की सैलरी से टीडीएस (TDS) काटना शुरू कर देती हैं। लेकिन, यदि आपके साथ भी ऐसा हुआ है तो बिल्कुल भी परेशान न हों। आपका टैक्स बचाने का मौका अभी खत्म नहीं हुआ है।

मुंबई के जाने-माने चार्टर्ड अकाउंटेंट (CA) और सर्टिफाइड फाइनेंशियल प्लानर (CFP) बलवंत जैन के मुताबिक, कंपनी द्वारा काटा गया टीडीएस अंतिम नहीं होता। टैक्सपेयर्स के पास अपना इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करते समय अपनी पसंद का टैक्स रिजीम चुनने का पूरा कानूनी अधिकार होता है।

सैलरीड क्लास की सबसे बड़ी चिंता: HRA और 80C की छूट का क्या होगा?

एक परेशान टैक्सपेयर ने हाल ही में सवाल उठाया कि समय पर डिक्लेरेशन न देने के कारण कंपनी ने उसे न्यू टैक्स रिजीम में मानकर भारी TDS काट लिया। इस वजह से उसे मिलने वाले कई बड़े टैक्स बेनिफिट्स जैसे—हाउस रेंट अलाउंस (HRA), लीव ट्रैवल अलाउंस (LTA), धारा 80C (PPF, LIC, ELSS आदि) के तहत ₹1.5 लाख की छूट और धारा 80D के तहत मेडिकल इंश्योरेंस प्रीमियम का फायदा कंपनी के पेरोल सिस्टम में शामिल नहीं हो सका। कर्मचारी को डर था कि इस चूक के कारण उसे भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ेगा।

कंपनी ने ऐसा क्यों किया?

सीए बलवंत जैन स्पष्ट करते हैं कि आयकर नियमों के अनुसार, किसी भी कंपनी के लिए कर्मचारी को वेतन देने से पहले अनुमानित टैक्स के आधार पर टीडीएस काटना अनिवार्य है। चूंकि सरकार ने अब न्यू टैक्स रिजीम को 'डिफॉल्ट' व्यवस्था बना दिया है, इसलिए यदि कोई कर्मचारी समय पर अपनी पसंद नहीं बताता, तो कंपनी नियमों के तहत न्यू टैक्स रिजीम के स्लैब के हिसाब से ही टैक्स काटने के लिए बाध्य है। इसलिए कंपनी की यह कार्रवाई पूरी तरह कानूनी थी।

रिटर्न फाइलिंग के समय पासा पलटने का है मौका; ऐसे मिलेगा रिफंड

बलवंत जैन के अनुसार, कंपनी को साल की शुरुआत में बताया गया टैक्स रिजीम सिर्फ अस्थाई टीडीएस की गणना के लिए होता है। टैक्स रिजीम चुनने का अंतिम और संप्रभु फैसला तब होता है, जब आप आयकर विभाग के पोर्टल पर अपना फाइनल रिटर्न (ITR) दाखिल करते हैं।

  • दावा करें और रिफंड पाएं: जब आप वित्त वर्ष 2025-26 का आईटीआर भरेंगे, तो वहां आप मैनुअली 'Old Tax Regime' का विकल्प चुन सकते हैं। जैसे ही आप ओल्ड रिजीम चुनेंगे, आप अपने सभी निवेशों, जैसे धारा 80C, 80D, होम लोन का ब्याज और HRA की छूट का पूरा ब्यौरा दर्ज कर पाएंगे।

  • रिफंड क्रेडिट: इन सभी कटौतियों (Deductions & Exemptions) के बाद जब आपकी वास्तविक टैक्स देनदारी की गणना होगी, तो वह कंपनी द्वारा काटे गए टीडीएस से काफी कम निकलेगी। ऐसे में, जो भी अतिरिक्त टैक्स कंपनी ने काटा था, वह आयकर विभाग द्वारा टैक्स रिफंड (Tax Refund) के रूप में सीधे आपके रजिस्टर्ड बैंक खाते में ब्याज सहित वापस भेज दिया जाएगा।

कौन हर साल बदल सकता है रिजीम? सैलरी और बिजनेस क्लास के लिए अलग नियम

आयकर विभाग ने टैक्स रिजीम बदलने की छूट को लेकर टैक्सपेयर्स को दो अलग-अलग श्रेणियों में बांटा है:

1. नौकरीपेशा और पेंशनभोगी (No Business Income)

जिन करदाताओं की आय का जरिया केवल सैलरी, पेंशन, हाउस प्रॉपर्टी या अन्य स्रोतों (जैसे ब्याज और डिविडेंड) से है और उनकी कोई बिजनेस या प्रोफेशन से कमाई नहीं है, उनके लिए नियम बेहद लचीले हैं। ऐसे लोग हर साल अपनी सुविधानुसार ओल्ड और न्यू टैक्स रिजीम के बीच स्विच कर सकते हैं। यानी इस साल ओल्ड रिजीम और अगले साल न्यू रिजीम चुनना पूरी तरह उनके हाथ में है।

2. कारोबारी और प्रोफेशनल्स (With Business Income)

अगर आपकी कमाई "बिजनेस या प्रोफेशन से होने वाले लाभ" (PGBP) के दायरे में आती है, तो नियम कड़े हैं। ऐसे टैक्सपेयर्स को जीवन में केवल एक बार ओल्ड टैक्स रिजीम छोड़कर न्यू टैक्स रिजीम में जाने का मौका मिलता है। लेकिन एक बार यदि उन्होंने न्यू टैक्स रिजीम चुन लिया, तो वे दोबारा तब तक ओल्ड टैक्स रिजीम में वापस नहीं लौट सकते, जब तक कि उनकी बिजनेस इनकम पूरी तरह बंद नहीं हो जाती।

सावधान! 31 जुलाई 2026 की डेडलाइन चूक गए, तो विकल्प हो जाएगा खत्म

सीए बलवंत जैन ने बिना बिजनेस इनकम वाले करदाताओं को एक बेहद जरूरी चेतावनी दी है। यदि आप अपनी कंपनी की चूक को सुधारकर ओल्ड टैक्स रिजीम का फायदा उठाना चाहते हैं और अपना रिफंड क्लेम करना चाहते हैं, तो आपको वित्त वर्ष 2025-26 के लिए अपना ITR हर हाल में 31 जुलाई 2026 की तय समय सीमा (Deadline) से पहले दाखिल करना होगा।

डेडलाइन चूकने का नुकसान: यदि आप 31 जुलाई 2026 तक अपना रिटर्न दाखिल नहीं कर पाते हैं और बिलेटेड रिटर्न (Belated ITR) भरते हैं, तो आयकर विभाग आपको ओल्ड टैक्स रिजीम चुनने की अनुमति बिल्कुल नहीं देगा। उस स्थिति में आपको अनिवार्य रूप से डिफॉल्ट न्यू टैक्स रिजीम के तहत ही टैक्स देना होगा और आपके सभी निवेश (80C, HRA आदि) बेकार हो जाएंगे। इसलिए समय रहते अपने फॉर्म 16 और निवेश के दस्तावेजों को जुटाएं और समझदारी से टैक्स प्लानिंग करें।

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