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ITR Filing Deadline: इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने का आज आखिरी मौका, डेडलाइन चूके तो लगेगा ₹5,000 तक का जुर्माना और ब्याज; तुरंत करें ई-फाइलिंग

वित्तीय वर्ष के लिए व्यक्तिगत और गैर-ऑडिट करदाताओं (Non-Audit Taxpayers) के लिए इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) दाखिल करने की अंतिम समय सीमा समाप्त होने के करीब है। आयकर विभाग ने स्पष्ट किया है कि समय सीमा के भीतर रिटर्न दाखिल न करने पर करदाताओं को न केवल वित्तीय जुर्माने (Late Fee Penalty) का सामना करना पड़ेगा, बल्कि कई महत्वपूर्ण टैक्स बेनेफिट्स से भी हाथ धोना पड़ सकता है।

यदि आपने अभी तक अपना ITR फाइल नहीं किया है, तो आखिरी पलों के सर्वर लोड और भारी पेनल्टी से बचने के लिए आयकर विभाग के ई-फाइलिंग पोर्टल पर जाकर तुरंत यह प्रक्रिया पूरी कर लें।

डेडलाइन चूकने पर कितना लगेगा जुर्माना? (सेक्शन 234F के नियम)

आयकर अधिनियम की धारा 234F के तहत तय तारीख के बाद रिटर्न दाखिल करने (Belated ITR) पर लेट फीस का कड़ा प्रावधान है:

कुल करयोग्य आय (Total Taxable Income) लेट फाइलिंग पेनल्टी (सेक्शन 234F)
₹5 लाख से अधिक आय होने पर ₹5,000
₹5 लाख तक या उससे कम आय होने पर ₹1,000
बेसिक छूट सीमा से कम आय (Nil Tax) कोई पेनल्टी नहीं (शून्य)

केवल जुर्माना ही नहीं, इन 4 बड़े वित्तीय नुकसानों का भी करना पड़ेगा सामना

तय समय सीमा के बाद रिटर्न भरने पर केवल लेट फीस ही नहीं लगती, बल्कि कई अन्य नियम भी आपकी जेब पर भारी पड़ते हैं:

1. धारा 234A के तहत 1% प्रति माह ब्याज

यदि आपकी कोई टैक्स देनदारी (Tax Liability) बाकी है और आप डेडलाइन के बाद रिटर्न भरते हैं, तो बकाया टैक्स पर धारा 234A के तहत 1% प्रति माह (या महीने के किसी हिस्से) की दर से साधारण ब्याज देना होगा। यह ब्याज तय तारीख से लेकर वास्तविक फाइलिंग की तारीख तक लगातार जुड़ता रहेगा।

2. नुकसान को आगे ले जाने (Carry Forward of Losses) की सुविधा खत्म

यदि आपको शेयर बाजार (Equity), म्यूचुअल फंड, प्रॉपर्टी या बिजनेस में कैपिटल लॉस हुआ है, तो समय पर ITR फाइल करके ही आप उस नुकसान को अगले 8 वर्षों तक के मुनाफे से एडजस्ट (Set-off) करने के लिए कैरी फॉरवर्ड कर सकते हैं। डेडलाइन चूकने पर (मकान संपत्ति के नुकसान को छोड़कर) यह लाभ हमेशा के लिए समाप्त हो जाता है।

3. टैक्स रिफंड में देरी और ब्याज का नुकसान

यदि आपका अधिक टीडीएस (TDS) कट चुका है और आप रिफंड के हकदार हैं, तो देर से फाइलिंग करने पर रिफंड प्रोसेसिंग में कई महीनों की देरी होगी। इसके साथ ही आयकर विभाग से मिलने वाला रिफंड पर ब्याज भी वास्तविक फाइलिंग की तारीख से ही गिना जाएगा, जिससे आपका ब्याज घट जाएगा।

4. लोन और वीजा अप्रूवल में बाधा

बैंक से होम लोन, कार लोन या विदेश यात्रा के लिए वीजा अप्लाई करते समय पिछले 3 सालों की समय पर फाइल की गई ITR रसीद (Acknowledgement) मांगी जाती है। लेट फाइलिंग से आपकी वित्तीय क्रेडिबिलिटी और सिबिल प्रोफाइल पर नकारात्मक असर पड़ता है।

आज फाइल करते समय इन 3 बातों का रखें विशेष ध्यान

  • AIS और Form 26AS का मिलान: अपने बैंक ब्याज, शेयर डिविडेंड, सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन और टीडीएस का डेटा एनुअल इंफॉर्मेशन स्टेटमेंट (AIS) से अच्छी तरह क्रॉस-वेरिफाई कर लें।

  • सही टैक्स रिजीम का चयन: अपनी आय और कटौतियों (80C, 80D, HRA) के आधार पर न्यू टैक्स रिजीम और ओल्ड टैक्स रिजीम में से सबसे फायदेमंद विकल्प चुनें।

  • ई-वेरिफिकेशन (e-Verification) न भूलें: ITR सबमिट करने के बाद 30 दिनों के भीतर आधार ओटीपी, नेट बैंकिंग या बैंक ईवीसी (EVC) के जरिए ई-वेरिफाई करना अनिवार्य है। बिना वेरिफिकेशन के भरा गया ITR अमान्य (Invalid) माना जाता है।

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