Justice Surya Kant: जस्टिस सूर्यकांत बनेंगे भारत के 53वें मुख्य न्यायाधीश, जानें कौन हैं वो

जब देश के मौजूदा चीफ जस्टिस (CJI)डी.वाई. चंद्रचूड़ नवंबर2025में रिटायर होंगे,तो उनकी कुर्सी संभालेंगे जस्टिस सूर्यकांत। वह भारत के52वें मुख्य न्यायाधीश बनेंगे। उनका कार्यकाल लगभग एक साल चार महीने का होगा और वह फरवरी2027में65वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त होंगे।जस्टिस सूर्यकांत का नाम आज देश के न्यायिक गलियारों में बड़े सम्मान से लिया जाता है,लेकिन उनका सफर हरियाणा के हिसार जिले के एक मध्यमवर्गीय परिवार से शुरू हुआ था। आइए जानते हैं उनके इस सफर और उन बड़े फैसलों के बारे में,जिनकी वजह से वह हमेशा चर्चा में रहे।पेगासस जासूसी से लेकरPMकी सुरक्षा तक,इन बड़े फैसलों में निभाई अहम भूमिकाअपने कार्यकाल के दौरान,जस्टिस सूर्यकांत देश को प्रभावित करने वाले कई ऐतिहासिक और संवेदनशील मामलों का हिस्सा रहे हैं। उनके कुछ बड़े और साहसिक फैसले इस प्रकार हैं:राजद्रोह कानून पर लगाई रोक:जस्टिस सूर्यकांत उस बेंच का हिस्सा थे जिसने ऐतिहासिक फैसला सुनाते हुए राजद्रोह कानून (Sedition Law)के तहत नईFIRदर्ज करने पर रोक लगा दी थी। बेंच ने निर्देश दिया था कि जब तक सरकार इस कानून की समीक्षा नहीं कर लेती,तब तक इसका इस्तेमाल नहीं किया जाएगा।पेगासस जासूसी मामला:जब पेगासस स्पाइवेयर के जरिए अवैध जासूसी के आरोप लगे,तो जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने ही इसकी जांच के लिए साइबर विशेषज्ञों की एक स्वतंत्र समिति का गठन किया था।PMमोदी की सुरक्षा में चूक: 2022में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की पंजाब यात्रा के दौरान हुई सुरक्षा में चूक की जांच के लिए भी जस्टिस सूर्यकांत की बेंच ने ही सुप्रीम कोर्ट की पूर्व न्यायाधीश इंदु मल्होत्रा की अध्यक्षता में एक कमेटी बनाई थी।अनुच्छेद370का फैसला:जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद370को हटाने के केंद्र सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई करने वाली ऐतिहासिक बेंच में भी वह शामिल थे।वन रैंक-वन पेंशन (OROP):उन्होंने रक्षा बलों के लिए’वन रैंक-वन पेंशन’योजना की संवैधानिक वैधता को बरकरार रखा था।अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU):वह उस सात-न्यायाधीशों की बेंच में भी शामिल थे,जोAMUके अल्पसंख्यक दर्जे पर1967के पुराने फैसले पर पुनर्विचार कर रही थी,जिसने इस मुद्दे पर एक नई बहस का रास्ता खोला।इनके अलावा,उन्होंने बिहार के मतदाता सूची विवाद से लेकर सेना में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने जैसे कई महत्वपूर्ण मामलों में भी अहम भूमिका निभाई है।