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Malviya Nagar Fire: जब जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदने लगे लोग; चश्मदीद ने सड़क पर गद्दे बिछाकर बचाई 8 मासूम जानें

Malviya Nagar Fire: जब जान बचाने के लिए खिड़कियों से कूदने लगे लोग; चश्मदीद ने सड़क पर गद्दे बिछाकर बचाई 8 मासूम जानें

राजधानी दिल्ली के मालवीय नगर इलाके में हुए भीषण होटल अग्निकांड ने पूरी दिल्ली को हिलाकर रख दिया है। इस दर्दनाक हादसे में 21 लोगों ने अपनी जान गंवा दी, जबकि कई लोग जिंदगी और मौत के बीच झूल रहे हैं। इस बीच, राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल भी तेज हो गई है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता गुरुवार को साकेत के मैक्स हॉस्पिटल पहुंचीं, जहां उन्होंने घायल हुए लोगों से मुलाकात की और उनके इलाज का जायजा लिया। मुख्यमंत्री ने डॉक्टरों को घायलों के बेहतर इलाज के निर्देश दिए हैं।

दूसरी तरफ, पुलिस की तफ्तीश जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, इस हादसे के पीछे की लापरवाही और होटल मालिक के चौंकाने वाले बयान सामने आ रहे हैं, जिसने हर किसी को हैरान कर दिया है।

चश्मदीद की बहादुरी: 'दुकान से गद्दे निकाले और सड़क पर बिछा दिए'

जिस वक्त होटल में आग लगी, उस दौरान चीख-पुकार के बीच कुछ स्थानीय लोग मसीहा बनकर सामने आए। चश्मदीद रियाजुद्दीन मंसूरी ने उस डरावनी सुबह का मंजर बयां करते हुए बताया कि कैसे उन्होंने अपनी जान पर खेलकर लोगों को रेस्क्यू किया।

 चश्मदीद रियाजुद्दीन मंसूरी ने बताया:

"मैंने देखा कि लोग अपनी जान बचाने के लिए बिल्डिंग से नीचे कूद रहे थे। हालात बेहद खौफनाक थे। मैंने बिना वक्त गंवाए अपनी दुकान से गद्दे बाहर निकाले और सड़क पर बिछा दिए। इसकी वजह से नीचे कूदने वाले 8 लोगों की जान बच गई। हमने मृतकों के शवों को ढकने के लिए अपनी दुकान से चादरें भी दीं। फायर ब्रिगेड की गाड़ियां समय पर आ गई थीं और हम सबने मिलकर 20 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बाहर निकाला।"

एक और चश्मदीद मोहम्मद वसीम खान ने बताया कि सुबह करीब 8:30 बजे जब वे मौके पर पहुंचे, तो हालात बेकाबू हो चुके थे। उन्होंने तुरंत सुबह 8:52 पर होटल के मालिक को फोन घुमाया। वसीम के मुताबिक, "मैंने मालिक से सिर्फ 26 सेकंड बात की और उसे बताया कि अंदर फंसे लोगों के बचने की उम्मीद बहुत कम है। मालिक को आग की खबर तो थी, लेकिन उसे अंदाजा नहीं था कि लपटें इतनी भयानक हो चुकी हैं।"

होटल मालिक का शॉकिंग कबूलनामा: 'मेरे पास समय नहीं था'

पुलिस की गिरफ्त में आए होटल मालिक लोकेश बजाज से जब पूछताछ की गई, तो उसने अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ते हुए बेहद गैर-जिम्मेदाराना खुलासे किए। सूत्रों के अनुसार, बजाज ने पुलिस के सामने माना कि वह होटल को खुद मैनेज नहीं करता था।

  • मैनेजमेंट आउटसोर्स था: बजाज ने दावा किया कि उसके पास होटल के रोजमर्रा के कामकाज, बिलिंग और अकाउंट्स को खुद देखने का समय नहीं था। उसने यह पूरा काम किसी दूसरे व्यक्ति को सौंप रखा था।

  • 'दिल्ली में सब चलता है' का रवैया: पूछताछ में सामने आया कि उस मैनेजर ने मालिक को भरोसा दिलाया था कि बिना कागजातों के होटल चलाना एक 'आम बात' है और 'दिल्ली में सब जुगाड़ से चलता है।'

  • फायर NOC गायब: सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि मालिक लोकेश बजाज ने खुद कबूल किया कि इतने बड़े होटल के पास फायर डिपार्टमेंट का नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट (NOC) तक नहीं था।

एक नजर में समझें मामले की बड़ी कड़ियां

यह हादसा साफ तौर पर दर्शाता है कि कैसे चंद पैसों के फायदे और 'सब चलता है' वाली घटिया सोच के कारण 21 मासूम लोगों को अपनी जान देकर इसकी कीमत चुकानी पड़ी। पुलिस अब इस मामले में शामिल अन्य दोषियों की तलाश कर रही है ताकि सख्त से सख्त कार्रवाई की जा सके।

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