MF Investment Alert: बाजार की गिरावट में म्यूचुअल फंड्स ने दिखाया दम, मार्च में खरीदे ₹55,413 करोड़ के फाइनेंशियल स्टॉक्स; FII ने की भारी बिकवाली

नई दिल्ली: मार्च 2026 का महीना भारतीय शेयर बाजार के लिए उथल-पुथल भरा रहा, लेकिन इस गिरावट के बीच घरेलू म्यूचुअल फंड्स (Mutual Funds) ने खरीदारी का मोर्चा संभाले रखा। जियोपॉलिटिकल तनाव और ऊंचे बॉन्ड यील्ड के बावजूद, म्यूचुअल फंड्स ने सेकेंडरी मार्केट में सक्रियता दिखाते हुए लगभग 1.13 लाख करोड़ रुपये के शेयर खरीदे। इस कुल निवेश का लगभग 49 प्रतिशत हिस्सा (₹55,413 करोड़) अकेले फाइनेंशियल सेक्टर में आया, जो बैंकिंग और वित्तीय शेयरों पर उनके अटूट भरोसे को दर्शाता है।गिरावट में खरीदारी: फाइनेंशियल और कंज्यूमर स्टॉक्स पर दांवमार्च में निफ्टी बैंक (17% गिरावट) और निफ्टी फाइनेंशियल सर्विसेज (15.6% गिरावट) में मार्च 2020 के बाद की सबसे बड़ी मंथली गिरावट देखी गई। इसके बावजूद, म्यूचुअल फंड्स ने इस करेक्शन को खरीदारी के मौके के रूप में इस्तेमाल किया।सेक्टरम्यूचुअल फंड निवेश (मार्च 2026)फाइनेंशियल स्टॉक्स₹55,413 करोड़कंज्यूमर डिस्क्रिशनरी₹16,366 करोड़टेलीकॉम₹14,656 करोड़IT स्टॉक्स₹5,717 करोड़कमोडिटीज़₹4,883 करोड़बाजार की हिस्सेदारी और लिक्विडिटी का गणितबाजार में भारी गिरावट के कारण म्यूचुअल फंड्स की कुल संपत्ति (AUM) फरवरी के ₹51.29 लाख करोड़ से घटकर ₹46.6 लाख करोड़ रह गई। हालांकि, एक सकारात्मक पहलू यह रहा कि कुल मार्केट कैपिटलाइज़ेशन में म्यूचुअल फंड्स की हिस्सेदारी 11.1% से बढ़कर 11.3% पर पहुंच गई।यील्ड का दबाव: भारत की 10-साल की बॉन्ड यील्ड 7% के पार पहुंच गई, जिससे बैंकों के पोर्टफोलियो पर मार्क-टू-मार्केट नुकसान की चिंता बढ़ी। इसके पीछे मुख्य कारण कच्चे तेल की बढ़ती कीमतें और अमेरिका-ईरान संघर्ष रहा।FII बनाम DII: विदेशी निवेशकों ने की ₹1.26 लाख करोड़ की निकासीम्यूचुअल फंड्स की खरीदारी के विपरीत, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने बाजार से अपना हाथ खींचा। मार्च में FII ने सेकेंडरी मार्केट में करीब ₹1.26 लाख करोड़ के शेयर बेच दिए।सबसे ज्यादा बिकवाली: फाइनेंशियल सेक्टर से लगभग ₹60,000 करोड़ की निकासी हुई।हिस्सेदारी में कमी: भारतीय इक्विटी में FII की हिस्सेदारी 15.5% से घटकर 15.14% रह गई।मार्केट करेक्शन और आगे की राहमार्च में सेंसेक्स और निफ्टी दोनों में 11.5% की गिरावट दर्ज की गई। मिडकैप और स्मॉलकैप इंडेक्स भी 10% से अधिक टूटे। विशेषज्ञों का मानना है कि म्यूचुअल फंड्स की यह आक्रामक खरीदारी बाजार को निचले स्तरों पर सपोर्ट दे रही है। आरबीआई (RBI) द्वारा रुपये को बचाने के प्रयासों और सख्त लिक्विडिटी स्थितियों के बीच घरेलू निवेशकों का यह भरोसा बाजार की रिकवरी के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।