धर्म

Mithun Sankranti 2026: मिथुन संक्रांति पर बन रहा है सोमवती अमावस्या का महासंयोग, जानें स्नान-दान का शुभ मुहूर्त और महत्व

सनातन धर्म में सूर्य देव के राशि परिवर्तन को संक्रांति के रूप में बेहद उत्साह के साथ मनाया जाता है। अब जल्द ही ग्रहों के राजा सूर्य देव वृषभ राशि से निकलकर अपने मित्र ग्रह बुध की राशि मिथुन में प्रवेश करने जा रहे हैं, जिसे मिथुन संक्रांति (Mithun Sankranti 2026) कहा जाता है। हिंदू कैलेंडर और सूर्य गणना के अनुसार, इस दिन से सूर्य वर्ष का तीसरा महीना शुरू हो जाता है। सूर्य देव इस राशि में अगले 30 दिनों तक विराजमान रहेंगे, जिसका असर सभी 12 राशियों के जीवन पर देखने को मिलेगा। इस बार मिथुन संक्रांति पर पूरे 6 घंटे से अधिक समय का विशेष पुण्य काल मिल रहा है, जो साधना और दान के लिए बेहद फलदायी है।

सर्वार्थ सिद्धि और सोमवती अमावस्या का दुर्लभ संयोग

साल 2026 की मिथुन संक्रांति बेहद खास और ऐतिहासिक होने जा रही है। ज्योतिषीय गणना के अनुसार, 15 जून 2026 (सोमवार) को सूर्य का मिथुन राशि में गोचर होगा। सबसे विशेष बात यह है कि इसी दिन ज्येष्ठ अधिक मास की अमावस्या तिथि भी पड़ रही है। सोमवार के दिन अमावस्या होने के कारण इस दिन 'सोमवती अमावस्या' (Somvati Amavasya) का महादुर्लभ संयोग बन रहा है। इसके साथ ही इस दिन आकाश मंडल में 'सर्वार्थ सिद्धि योग' और 'अमृत सिद्धि योग' का निर्माण भी हो रहा है। इन शुभ योगों की उपस्थिति के कारण इस दिन किए गए स्नान, ध्यान और दान का फल कई गुना बढ़कर प्राप्त होगा।

मिथुन संक्रांति 2026: पुण्य काल और महा पुण्य काल का समय

पंचांग के अनुसार, 15 जून सोमवार को दोपहर 12 बजकर 59 मिनट पर सूर्य देव मिथुन राशि में प्रवेश करेंगे। संक्रांति के दौरान स्नान-दान के लिए पुण्य काल का समय इस प्रकार रहेगा:

  • मिथुन संक्रांति पुण्य काल: दोपहर 12:59 बजे से शुरू होकर शाम 07:20 बजे तक रहेगा। इस पुण्य काल की कुल अवधि 6 घंटे 21 मिनट की होगी।

  • मिथुन संक्रांति महा पुण्य काल: दोपहर 12:59 बजे से दोपहर 03:19 बजे तक रहेगा। इस अत्यंत शुभ अवधि की कुल समय सीमा 2 घंटे 20 मिनट की होगी।

  • अमृत व सर्वार्थ सिद्धि योग: यह दोनों मांगलिक योग सुबह 05:23 बजे से शुरू होकर शाम 07:08 बजे तक सक्रिय रहेंगे, जिसमें शुरू किए गए सभी कार्य सफल सिद्ध होते हैं।

सोमवती अमावस्या पर ब्रह्म मुहूर्त में स्नान का विशेष महत्व

यूं तो संक्रांति के महा पुण्य काल (दोपहर 12:59 से 03:19) में पवित्र नदियों में डुबकी लगाना और दान करना सर्वश्रेष्ठ माना गया है। लेकिन इस दिन सोमवती अमावस्या का संयोग होने के कारण जो श्रद्धालु सुबह के समय पूजन करना चाहते हैं, उनके लिए ब्रह्म मुहूर्त प्रात: 04:03 बजे से प्रात: 04:43 बजे के बीच का समय पवित्र स्नान के लिए बेहद उत्तम है। इस दिन गंगा, यमुना या किसी भी पवित्र नदी में स्नान करने से पितरों की आत्मा को शांति मिलती है और जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं।

सूर्य को मजबूत करने के लिए संक्रांति पर क्या करें दान?

ज्योतिष शास्त्र में सूर्य को मान-सम्मान, सरकारी नौकरी, सेहत और पिता का कारक माना गया है। मिथुन संक्रांति के पावन अवसर पर तांबे के पात्र में जल, शुद्ध अन्न, मौसमी फल, नए वस्त्र, गुड़, चने की दाल और सामर्थ्य अनुसार धन का दान करना चाहिए। ऐसा करने से कुंडली में सूर्य ग्रह मजबूत होता है, जिससे नौकरी और बिजनेस में तरक्की के रास्ते खुलते हैं। साथ ही पिता के साथ संबंधों में मधुरता आती है और पैतृक संपत्ति का पूर्ण लाभ मिलता है।

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