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आलोचकों को शालीनता से दिया जवाब ,अभिषेक बच्चन के करियर की सबसे खास फिल्म को हुआ एक साल

News India Live, Digital Desk: बॉलीवुड में ‘नेपोटिज्म’ और ‘स्टार किड’ की बहस के बीच, एक एक्टर ऐसा है जिसने हमेशा चुपचाप अपना सिर झुकाकर काम किया है। चाहे फ़िल्में हिट रही हों या फ्लॉप, उसने कभी हार नहीं मानी। हम बात कर रहे हैं अभिषेक बच्चन (Abhishek Bachchan) की।आज से ठीक एक साल पहले (नवंबर 2024), उनकी एक फिल्म रिलीज हुई थी— ‘आई वांट टू टॉक’ (I Want To Talk)। और आज जब यह फिल्म अपना पहला साल पूरा कर रही है, तो यह जश्न सिर्फ एक फिल्म का नहीं, बल्कि एक कलाकार की जीत का है।वो फिल्म जिसने ‘बेस्ट एक्टर’ का सूखा मिटा दियाहम सब जानते हैं कि अभिषेक बच्चन एक बेहतरीन कलाकार हैं। उन्होंने ‘युवा’ और ‘सरकार’ जैसी फिल्मों में शानदार काम किया, जिसके लिए उन्हें बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर के अवार्ड भी मिले। लेकिन ‘हीरो’ यानी लीड रोल में बेस्ट एक्टर (Best Actor Award) का खिताब उनसे हमेशा दूर रहा।शूजित सरकार (Shoojit Sircar) की फिल्म ‘आई वांट टू टॉक’ ने उस इतिहास को बदल दिया। इस फिल्म ने न सिर्फ़ बॉक्स ऑफिस और ओटीटी पर दर्शकों का दिल जीता, बल्कि अभिषेक को उनका पहला फिल्मफेयर बेस्ट एक्टर अवार्ड भी दिलाया। यह उनके 20-22 साल के करियर का वो पल था, जब उनकी आँखों में खुशी के आंसू और हाथ में वो काली लेडी (Black Lady Trophy) थी।ऐसा क्या खास था इस किरदार में?इस फिल्म में अभिषेक ने कोई “लार्जर दैन लाइफ” हीरो का रोल नहीं किया था। बल्कि, उन्होंने ‘अर्जुन’ का किरदार निभाया—एक ऐसा आदमी जो एक गंभीर बीमारी से जूझ रहा है और सर्जरी की तैयारी कर रहा है।अभिषेक ने इस रोल के लिए अपना वजन बढ़ाया, प्रोस्थेटिक्स का इस्तेमाल किया और अपनी पूरी बॉडी लैंग्वेज बदल दी। उनका यह रूप देखकर लोग भूल गए कि वो अमिताभ बच्चन के बेटे हैं, सबको सिर्फ़ वो बीमार और लाचार, लेकिन जिंदादिल इंसान नज़र आया।ट्रोलर्स भी हुए फैनसोशल मीडिया पर अक्सर अभिषेक को उनकी पुरानी फिल्मों को लेकर निशाना बनाया जाता था। लेकिन इस फिल्म के बाद आलोचकों की बोलती बंद हो गई। शूजित सरकार, जो ‘पीकू’ और ‘अक्टूबर’ जैसी संवेदनशील फिल्में बनाने के लिए जाने जाते हैं, उन्होंने अभिषेक के अंदर छिपे दर्द और ठहराव को स्क्रीन पर ऐसे उतारा कि हर कोई वाह-वाह कर उठा।आज जब फिल्म को एक साल हो गया है, तो अभिषेक ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर उन पलों को याद किया है। यह फिल्म सबूत है कि अगर आप मेहनत करते रहें, तो दुनिया को झुकना ही पड़ता है।अगर आपने अभी तक अभिषेक का यह ‘मास्टरपीस’ नहीं देखा है, तो आप सच में एक बेहतरीन सिनेमा मिस कर रहे हैं।

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