व्यापार

NCR में 110 करोड़ की कमाई वाला नया रियल एस्टेट ट्रेंड: डेटा सेंटर के लिए जमीन खरीदने की मची होड़, गुरुग्राम-मानेसर बना देश का सबसे बड़ा हब

राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (NCR) का रियल एस्टेट बाजार इन दिनों एक ऐतिहासिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है। अब तक जहां बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स और निवेशक केवल लग्जरी हाउसिंग सोसायटियों, मॉल और कमर्शियल ऑफिस स्पेस के लिए जमीन खरीदते थे, वहीं अब बाजार में एक नया और अत्यधिक मुनाफा देने वाला ट्रेंड उभरकर सामने आया है—डेटा सेंटर के लिए लैंड पार्सल का अधिग्रहण। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) क्रांति, 5G नेटवर्क विस्तार, क्लाउड स्टोरेज और डेटा संप्रभुता (Data Sovereignty) से जुड़े कड़े सरकारी नियमों के चलते ग्लोबल टेक दिग्गज और हाइपरस्केल डेटा सेंटर ऑपरेटर दिल्ली-एनसीआर में जमीन खरीदने के लिए अरबों रुपये का निवेश कर रहे हैं। इसी कड़ी में गुरुग्राम, मानेसर और ग्रेटर सदर्न पेरिफेरल रोड (Greater SPR) जैसे रणनीतिक कॉरिडोर्स पर 100 से 110 करोड़ रुपये से अधिक के लैंड सौदों की होड़ मच गई है।

गुरुग्राम और मानेसर क्यों बने डेटा सेंटर दिग्गजों की पहली पसंद?

देश के शीर्ष औद्योगिक और आईटी हब के रूप में स्थापित गुरुग्राम और आईएमटी मानेसर (IMT Manesar) अब उत्तर भारत के प्रमुख डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर कॉरिडोर के रूप में तेजी से उभर रहे हैं। किसी भी आधुनिक टियर-3 या टियर-4 डेटा सेंटर को स्थापित करने के लिए तीन बुनियादी चीजों की आवश्यकता होती है: निर्बाध भारी बिजली आपूर्ति (Heavy Power Load), ऑप्टिकल फाइबर केबल का मल्टी-पाथ नेटवर्क और प्राकृतिक आपदाओं से सुरक्षित विशाल जमीन।

मानेसर और न्यू गुरुग्राम का इलाका इन सभी तकनीकी पैमानों पर पूरी तरह खरा उतरता है। दिल्ली-जयपुर हाईवे (NH-48), द्वारका एक्सप्रेसवे और कुंडली-मानेसर-पलवल (KMP) एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी के कारण यह क्षेत्र इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे (IGI Airport) से सीधा जुड़ा हुआ है। इसके साथ ही, हरियाणा सरकार की आईटी व डेटा सेंटर नीतियों और बिजली वितरण कंपनियों द्वारा डेडिकेटेड 24×7 हाई-वोल्टेज सब-स्टेशन की उपलब्धता ने इस बेल्ट को निवेशकों का पसंदीदा गंतव्य बना दिया है।

जमीनों की कीमतों में ऐतिहासिक उछाल और 110 करोड़ की मेगा डील्स

डेटा सेंटर डेवलपर्स को आमतौर पर 5 एकड़ से लेकर 20 एकड़ या उससे अधिक के बड़े और स्पष्ट मालिकाना हक (Clear Title) वाले लैंड पार्सल की जरूरत होती है। जमीन की सीमित उपलब्धता और अत्यधिक मांग के चलते प्राइम इंडस्ट्रियल और कमर्शियल जोन्स में प्रति एकड़ जमीन के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच गए हैं।

ग्रेटर एसपीआर रोड और मानेसर इंडस्ट्रियल क्लस्टर के आसपास बड़े संस्थागत और डेटा सेंटर लैंड पार्सल के लिए 100 करोड़ से 110 करोड़ रुपये तक के लेनदेन और मूल्यांकन देखे जा रहे हैं। जहां किसान और मूल भूस्वामी अपनी रणनीतिक जमीनों के बदले करोड़ों का मुआवजा और रिटर्न हासिल कर रहे हैं, वहीं रियल एस्टेट कंसल्टेंसी फर्मों और जमीन मालिकों के लिए यह कमाई का एक नया 'गोल्ड माइन' साबित हो रहा है।

हाइपरस्केलर्स और क्लाउड कंपनियों की आक्रामक एंट्री

एनसीआर मार्केट में भारती एयरटेल की 'नेक्स्ट्रा' (Nxtra), अनंत राज क्लाउड (Anant Raj Cloud), योटा (Yotta), एसटीटी जीडीसी (STT GDC) और कई बहुराष्ट्रीय हाइपरस्केलर्स पहले ही अपनी विशाल डेटा सेंटर सुविधाएं स्थापित कर चुके हैं या तेजी से अपनी क्षमता का विस्तार कर रहे हैं।

माइक्रोसॉफ्ट, गूगल और एडब्ल्यूएस (AWS) जैसे वैश्विक क्लाउड सेवा प्रदाता भारतीय कॉर्पोरेट्स, बैंकिंग और वित्तीय क्षेत्र (BFSI) और सरकारी उपक्रमों के डेटा को देश की सीमाओं के भीतर प्रोसेस और स्टोर करने के लिए लगातार अपनी क्षमता बढ़ा रहे हैं। एआई वर्कलोड्स के लिए हाई-डेंसिटी रैक और अत्याधुनिक लिक्विड कूलिंग वाले बड़े परिसरों की जरूरत ने इस मांग को कई गुना तेज कर दिया है।

रियल एस्टेट सेक्टर के लिए नया एसेट क्लास: लंबी लीज और स्थिर रिटर्न

रियल एस्टेट जानकारों के अनुसार, डेटा सेंटर अब पारंपरिक ऑफिस रेंटल की तुलना में एक अधिक सुरक्षित और आकर्षक एसेट क्लास बन चुका है। ऑफिस स्पेस में जहां किराएदारों के आने-जाने और वर्क-फ्रॉम-होम के चलते अनिश्चितता रहती है, वहीं डेटा सेंटर के सौदे 15 से 25 साल की लंबी लॉक-इन अवधि के लिए होते हैं।

डेटा सेंटर ऑपरेटर भारी पूंजी लगाकर अत्यधिक कस्टमाइज्ड इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार करते हैं, जिससे वे लंबे समय तक एक ही लोकेशन पर टिके रहते हैं। यही कारण है कि संस्थागत फंड्स, प्राइवेट इक्विटी फर्म्स और बड़े रियल एस्टेट डेवलपर्स अब अपने पोर्टफोलियो का एक बड़ा हिस्सा डेटा सेंटर पार्कों के विकास के लिए सुरक्षित कर रहे हैं।

आने वाले वर्षों में कैसा रहेगा एनसीआर का डिजिटल रियल एस्टेट भविष्य?

आने वाले 3 से 5 वर्षों में भारत का डेटा सेंटर उद्योग 4.5 से 5 बिलियन डॉलर से अधिक का निवेश आकर्षित करने की दिशा में अग्रसर है। मुंबई और चेन्नई जैसे तटीय शहरों के बाद उत्तर भारत का सबसे बड़ा डेटा उपभोग केंद्र दिल्ली-एनसीआर ही है।

जैसे-जैसे स्मार्ट सिटीज, ऑटोनॉमस व्हीकल्स, फिनटेक और जेनरेटिव एआई का उपयोग बढ़ेगा, डेटा स्टोरेज और कंप्यूटिंग क्षमता की मांग कई गुना बढ़ेगी। गुरुग्राम से लेकर मानेसर और सोहना तक का यह कॉरिडोर आने वाले दशक में देश के डिजिटल ट्रांसफॉर्मेशन का सबसे बड़ा इंजन बनकर उभरेगा।

Back to top button