NEET पेपर लीक पर संसद में होगा बड़ा संग्राम: चर्चा के लिए सीना तानकर तैयार सरकार, किरेन रिजिजू की हुंकार से गरमाया सियासी पारा

देश के सबसे संवेदनशील और लाखों युवाओं के भविष्य से जुड़े नीट पेपर लीक (NEET Paper Leak) मामले को लेकर संसद के भीतर और बाहर सियासी तापमान चरम पर पहुंच गया है। विपक्ष के लगातार आक्रामक तेवरों और हंगामे के बीच अब मोदी सरकार की तरफ से बहुत बड़ा और स्पष्ट बयान सामने आया है। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने सदन में हुंकार भरते हुए दो टूक शब्दों में ऐलान किया है कि सरकार इस बेहद गंभीर मुद्दे पर संसद के भीतर हर पहलू पर चर्चा करने के लिए पूरी तरह से तैयार है, बशर्ते विपक्ष सदन की गरिमा बनाए रखे।
विपक्ष के हंगामे के बीच सरकार का आया बड़ा और कड़ा रुख
संसद के सत्र की शुरुआत के साथ ही विपक्ष ने नीट पेपर लीक और अन्य व्यवस्थागत कमियों को लेकर सरकार को घेरने की रणनीति पर काम शुरू कर दिया था। विपक्षी दलों के सांसदों ने सदन के वेल में आकर नारेबाजी की और इस मुद्दे पर तत्काल काम रोको प्रस्ताव के तहत चर्चा की मांग पर अड़े रहे। इस भारी हंगामे और शोरगुल के बीच सरकार की तरफ से मोर्चा संभालते हुए किरेन रिजिजू ने स्पष्ट किया कि सरकार किसी भी मुद्दे से भागने वाली नहीं है। उन्होंने कहा कि देश के लाखों छात्रों और उनके अभिभावकों की भावनाओं से जुड़ा यह मामला सरकार के लिए भी बेहद संवेदनशील है और सदन में इस पर खुली बहस होनी चाहिए।
किरेन रिजिजू की दो टूक: चर्चा से क्यों भाग रहा विपक्ष?
संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने विपक्ष पर निशाना साधते हुए कहा कि सरकार संसद के नियमों और प्रक्रियाओं के तहत हर गंभीर विषय पर जवाब देने के लिए तैयार है, लेकिन विपक्ष केवल राजनीतिक रोटियां सेकने के लिए सदन की कार्यवाही को बाधित कर रहा है। उन्होंने कहा कि अगर विपक्ष वाकई छात्रों के हितों के प्रति गंभीर है, तो उन्हें नारेबाजी छोड़कर सदन की डिबेट में हिस्सा लेना चाहिए और अपने सुझाव रखने चाहिए। रिजिजू की इस खुली चुनौती के बाद संसद के दोनों सदनों में सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव और अधिक तीव्र हो गया है।
देश भर के छात्रों और युवाओं की नजरें संसद की कार्यवाही पर टिकीं
इस पूरे राजनीतिक घमासान का असर दिल्ली से लेकर लखनऊ, पटना और कोटा जैसे देश के प्रमुख शिक्षा और राजनीतिक केंद्रों पर साफ तौर पर देखा जा रहा है। लाखों युवा, जो प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारियों में जुटे हैं, उनकी निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि संसद की इस हाई-वोल्टेज चर्चा से क्या कोई ठोस निष्कर्ष निकल पाता है या नहीं। छात्र संगठनों और अभिभावकों का कहना है कि राजनीति से ऊपर उठकर इस परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए सख्त कानून और कदम उठाए जाने चाहिए, ताकि भविष्य में इस तरह की धांधली की कोई गुंजाइश न बचे।