TMC सांसद कल्याण बनर्जी मानसून सत्र से सस्पेंड, विरोधी सांसद को कहा था ‘चोर’; मची सियासी खलबली

संसद के मानसून सत्र के दौरान देश की राजनीति से इस वक्त की सबसे बड़ी और हंगामेदार खबर सामने आ रही है। तृणमूल कांग्रेस (TMC) के तेजतर्रार और फायरब्रांड सांसद कल्याण बनर्जी पर लोकसभा/राज्यसभा की कार्यवाही के दौरान अनुशासनहीनता का गंभीर आरोप लगा है, जिसके बाद उनके खिलाफ बड़ा एक्शन लिया गया है। सदन की गरिमा को ठेस पहुंचाने और एक अन्य सांसद के खिलाफ आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल करने के चलते कल्याण बनर्जी को आगामी पूरे मानसून सत्र के लिए सदन से निलंबित कर दिया गया है। इस कार्रवाई के बाद संसद से लेकर बाहर तक सियासी पारा सातवें आसमान पर पहुंच गया है।
क्या है पूरा मामला और क्यों भड़के कल्याण बनर्जी?
संसद की कार्यवाही के दौरान तीखी बहस उस वक्त हिंसक और अमर्यादित रूप ले ली जब तृणमूल कांग्रेस के सांसद कल्याण बनर्जी और एनसीपी (NCPI) के एक सांसद के बीच तीखी नोकझोक शुरू हो गई। बात इतनी बढ़ गई कि गुस्से में बेकाबू होकर कल्याण बनर्जी ने सदन के भीतर ही विरोधी सांसद को 'चोर' कह डाला। सदन के भीतर इस तरह की असंसदीय भाषा और आक्रामक रवैये को पीठासीन अधिकारी और लोकसभा/राज्यसभा अध्यक्ष ने बेहद गंभीरता से लिया। लोकतंत्र के मंदिर में इस तरह की भाषा के प्रयोग को नियमों का खुला उल्लंघन मानते हुए तत्काल प्रभाव से अनुशासनात्मक कार्रवाई का प्रस्ताव लाया गया।
मानसून सत्र के बचे हुए हिस्से में नहीं ले सकेंगे हिस्सा
इस निलंबन के बाद अब कल्याण बनर्जी संसद के इस पूरे मानसून सत्र की बैठकों में हिस्सा नहीं ले पाएंगे। वह सदन के परिसर में होने वाली बैठकों और संसदीय समितियों की कार्यवाहियों से भी दूर रहेंगे। विपक्षी दलों के सांसदों का एक धड़ा इस कार्रवाई को तानाशाही करार दे रहा है, वहीं सत्ता पक्ष का साफ कहना है कि संसद में कानून और मर्यादा का पालन करना हर सांसद की नैतिक जिम्मेदारी है और अभद्र भाषा के लिए सदन में कोई जगह नहीं होनी चाहिए। टीएमसी खेमे में इस कार्रवाई के बाद खासी नाराजगी देखने को मिल रही है और पार्टी अपने सांसद के समर्थन मेंजल्द ही बड़ा बयान जारी कर सकती है।
दिल्ली से लेकर कोलकाता तक गरमाई सियासत
संसद में हुई इस अनुशासनात्मक कार्रवाई का सीधा असर क्षेत्रीय राजनीति पर भी पड़ रहा है। दिल्ली के सियासी गलियारों से लेकर पश्चिम बंगाल की राजधानी कोलकाता तक इस मुद्दे पर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया है। बीजेपी और एनडीए के नेताओं का कहना है कि विपक्ष के पास सदन में चर्चा करने के लिए कोई ठोस मुद्दा नहीं बचा है, इसलिए उनके सांसद लगातार मर्यादा लांघ रहे हैं। वहीं, टीएमसी समर्थकों का आरोप है कि विपक्षी सांसदों की आवाज को दबाने के लिए सत्ताधारी दल इस तरह के निलंबन अस्त्र का धड़ल्ले से इस्तेमाल कर रहा है।