Panchak May 2026: मई में इस दिन से लग रहा है घातक रोग पंचक, भूलकर भी न करें ये 5 काम, वरना पछताना पड़ेगा

News India Live, Digital Desk: हिंदू धर्म और ज्योतिष शास्त्र में ‘पंचक’ को बहुत ही महत्वपूर्ण माना गया है। जब भी चंद्रमा कुंभ और मीन राशि में गोचर करते हैं, तो उस समय को पंचक कहा जाता है। मई 2026 में लगने वाला पंचक साधारण नहीं है, क्योंकि यह रविवार से शुरू हो रहा है, जिसे शास्त्रों में ‘रोग पंचक’ की संज्ञा दी गई है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, पंचक के दौरान कुछ विशेष कार्यों को करने की सख्त मनाही होती है। यदि इन नियमों की अनदेखी की जाए, तो व्यक्ति को शारीरिक, मानसिक और आर्थिक कष्टों का सामना करना पड़ सकता है।क्या होता है ‘रोग पंचक’ और क्यों है यह इतना खतरनाक? ज्योतिष गणना के अनुसार, मई 2026 में पंचक की शुरुआत एक विशेष योग में हो रही है। रविवार से शुरू होने के कारण इसे ‘रोग पंचक’ कहा जाता है। जैसा कि नाम से ही स्पष्ट है, इस दौरान शुरू होने वाली बीमारियां लंबे समय तक पीछा नहीं छोड़तीं और व्यक्ति को शारीरिक कष्ट झेलने पड़ते हैं। इस पांच दिनों की अवधि में स्वास्थ्य के प्रति विशेष सावधानी बरतने की सलाह दी जाती है। शुभ कार्यों के लिए भी यह समय अनुकूल नहीं माना जाता, इसलिए किसी भी नए प्रोजेक्ट की शुरुआत सोच-समझकर ही करें।सावधान! पंचक के दौरान वर्जित हैं ये 5 प्रमुख कार्य शास्त्रों में पंचक के दौरान पांच कार्यों को वर्जित बताया गया है। पहला, इस दौरान लकड़ी इकट्ठा करना या खरीदना अशुभ माना जाता है। दूसरा, घर की छत डलवाना यानी लेंटर डलवाना वर्जित है। तीसरा, दक्षिण दिशा की यात्रा करने से बचना चाहिए क्योंकि इसे यम की दिशा माना जाता है। चौथा, नया बिस्तर या चारपाई बनवाना अशुभ होता है। पांचवां और सबसे महत्वपूर्ण, यदि इस दौरान किसी की मृत्यु हो जाए, तो उसके अंतिम संस्कार के समय विशेष शांति पूजन कराना अनिवार्य होता है, अन्यथा परिवार पर संकट आने की आशंका रहती है।पंचक के अशुभ प्रभाव से बचने के उपाय और सावधानी अगर पंचक के दौरान कोई अनिवार्य कार्य करना ही पड़े, तो उसके लिए भी शास्त्रों में कुछ उपाय बताए गए हैं। ज्योतिषियों का कहना है कि यदि लकड़ी खरीदना जरूरी हो, तो गायत्री हवन करवाकर दोष कम किया जा सकता है। दक्षिण दिशा की यात्रा अनिवार्य हो, तो हनुमान जी के दर्शन कर और गुड़-प्रसाद चढ़ाकर ही घर से निकलें। मई 2026 के इस रोग पंचक के दौरान भगवान शिव और हनुमान जी की आराधना करना सबसे उत्तम फलदायी रहता है, जिससे हर प्रकार की नकारात्मक ऊर्जा का नाश होता है।