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Paresh Rawal Shocking: ‘ब्लड प्रेशर की तीन गोलियां खानी पड़ती…’Paresh Rawal ने इस वजह से छोड़ा था पॉलिटिक्स

भारतीय सिनेमा जगत में अपनी बेजोड़ कॉमिक टाइमिंग और दमदार अभिनय से करोड़ों दिलों पर राज करने वाले दिग्गज अभिनेता परेश रावल (Paresh Rawal) एक बार फिर सुर्खियों में हैं। सिल्वर स्क्रीन पर बाबूराव गणपतराव आप्टे जैसे यादगार किरदारों को जीवंत करने वाले परेश रावल का एक समय भारतीय राजनीति में भी अच्छा-खासा रसूख था। वह साल 2014 से 2019 तक देश की सत्ताधारी भारतीय जनता पार्टी (BJP) के एक बेहद सक्रिय और प्रभावशाली सांसद रहे थे। हालांकि, 2019 के आम चुनाव से ठीक पहले उन्होंने अचानक सक्रिय राजनीति से दूरी बना ली थी। अब करीब 12 साल बाद अभिनेता ने एक मशहूर पॉडकास्ट में अपनी राजनीतिक पारी और उसे अचानक छोड़ने के पीछे के बेहद चौंकाने वाले और स्वास्थ्य से जुड़े कारणों का खुलासा किया है, जिसने सियासी और फिल्मी गलियारों में हलचल पैदा कर दी है।

विक्की लालवानी के पॉडकास्ट में बड़ा खुलासा: नेताओं की 'एसी और काजू-किशमिश' वाली जिंदगी का सच

वरिष्ठ पत्रकार विक्की लालवानी के टॉक शो (Podcast) में बेहद बेबाकी से बात करते हुए 76 वर्षीय अभिनेता ने स्वीकार किया कि उन्हें बहुत जल्दी इस बात का अहसास हो गया था कि राजनीति कोई पार्ट-टाइम जॉब नहीं है, बल्कि इसके लिए शत-प्रतिशत समर्पण और त्याग की आवश्यकता होती है। परेश रावल ने जनता के बीच नेताओं की छवि को लेकर बने मिथक को तोड़ते हुए कहा, "हम आम लोग अक्सर यह मानकर बैठ जाते हैं कि राजनेता हर वक्त फुल एसी कमरों में आराम से बैठे रहते हैं, कोई उनके पैर दबा रहा होता है और वे थाली में काजू-किशमिश खा रहे होते हैं। लेकिन जब मैं खुद उस व्यवस्था के अंदर गया, तब मुझे जमीन पर काम की असलियत का पता चला। वहां तो भगा-भगा कर थका देते हैं और काम का इतना भयानक दबाव होता है जिसकी कोई कल्पना नहीं कर सकता।"

अहमदाबाद पूर्व सीट से सांसद बनने का सफर: जब सेहत पर भारी पड़ीं सियासी जिम्मेदारियां

अपनी राजनीतिक यात्रा को याद करते हुए परेश रावल ने बताया कि साल 2014 के ऐतिहासिक लोकसभा चुनाव में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें गुजरात की हाई-प्रोफाइल सीट 'अहमदाबाद पूर्व' (Ahmedabad East Lok Sabha Constituency) से चुनावी मैदान में उतारा था। मोदी लहर के बीच वे भारी मतों से जीतकर देश की संसद पहुंचे। लेकिन सांसद बनने के बाद लगातार दिल्ली से गुजरात और मुंबई की यात्राएं, निर्वाचन क्षेत्र के लोगों की अनगिनत समस्याएं सुलझाना और संसद सत्रों में भाग लेने के व्यस्त शेड्यूल का उनकी सेहत पर बेहद बुरा और प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

बीपी की तीन गोलियों का दर्द: अभिनेता ने बताया क्यों लिया सन्यास का बड़ा फैसला

परेश रावल ने अपने स्वास्थ्य में आए गिरावट के दौर को साझा करते हुए बेहद भावुक अंदाज में कहा, "साल 2014 में जब मैं सक्रिय रूप से राजनीति में गया, तो उसके तुरंत बाद मेरा असली संघर्ष शुरू हुआ। मुझे ब्लड प्रेशर (BP) की समस्या तो पहले से थी, लेकिन राजनीति के तनाव और काम के भारी दबाव के चलते मुझे रोज बीपी की तीन-तीन गोलियां खानी पड़ने लगीं। मुझे समझ आ गया था कि यदि मैं अपना एक्टिंग करियर भी जारी रखना चाहता हूं, तो मैं इस क्षेत्र के साथ पूरा न्याय नहीं कर पाऊंगा। राजनीति एक बेहद नोबेल और पवित्र कार्य है, जिसके लिए आपको 24 घंटे जनता के बीच रहना पड़ता है। चूंकि मैं एक समर्पित अभिनेता हूं और मेरा मन कला में बसता है, इसलिए मैंने एक लिमिटेड टाइम के बाद समझदारी से अपने कदम पीछे खींच लिए।"

कला और सिनेमा के प्रति वफादारी: 2019 में खुद को चुनावी दौड़ से किया था अलग

गौरतलब है कि साल 2019 के लोकसभा चुनाव के दौरान जब पूरी पार्टी उन्हें दोबारा अहमदाबाद पूर्व सीट से चुनाव लड़ाना चाहती थी, तब परेश रावल ने खुद आगे बढ़कर तत्कालीन आलाकमान से टिकट न देने का लिखित अनुरोध किया था। उन्होंने स्पष्ट कर दिया था कि वे अपना पूरा जीवन सिनेमा और रंगमंच को समर्पित करना चाहते हैं। 12 साल बाद सामने आए इस बेबाक इंटरव्यू ने यह साबित कर दिया है कि भले ही परेश रावल आज संसद का हिस्सा न हों, लेकिन देश के सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर उनकी समझ आज भी उतनी ही सटीक और ईमानदार है।

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