RBI Plastic Currency Notes: अब फटने और भीगने से खराब नहीं होंगे नोट; 100, 200 और 500 के प्लास्टिक नोट लाने की तैयारी में रिजर्व बैंक

हम सबके साथ कभी न कभी ऐसा जरूर हुआ है कि जेब या पर्स में रखा कोई जरूरी नोट अचानक फट गया हो, या फिर कपड़ों के साथ वाशिंग मशीन में धुलकर पूरी तरह गल गया हो। इसके बाद उस फटे-गंदे नोट को बदलने के लिए बैंकों के चक्कर काटना किसी सिरदर्द से कम नहीं होता। लेकिन आने वाले समय में आपको इस झंझट से हमेशा के लिए मुक्ति मिल सकती है। भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) अब देश में कागज के पारंपरिक नोटों को धीरे-धीरे बंद करने और उनकी जगह ज्यादा टिकाऊ और सुरक्षित प्लास्टिक (पॉलिमर) के नोट लाने की दिशा में बहुत संजीदगी से काम कर रहा है। यह कोई दूर की कल्पना नहीं है, बल्कि देश के कैश मैनेजमेंट को सुधारने के लिए केंद्रीय बैंक इस योजना पर तेजी से कदम आगे बढ़ा रहा है। चुनिंदा शहरों से शुरू होगा प्लास्टिक नोटों का 'पायलट प्रोजेक्ट' देश में डिजिटल पेमेंट यानी यूपीआई (UPI) के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद भी बाजार में नकदी (कैश) की मांग में कोई कमी नहीं आई है। वर्तमान में भारत के बाजार में लगभग 42.86 ट्रिलियन रुपये का भारी-भरकम कैश सर्कुलेशन मौजूद है। इतने बड़े पैमाने पर कागज के नोटों की छपाई, उनकी सुरक्षा और फटने-कटने पर उन्हें बदलने की प्रक्रिया रिजर्व बैंक के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहती है। इसी चुनौती से निपटने के लिए रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरबीआई जल्द ही 100, 200 और 500 रुपये के प्लास्टिक नोटों का एक पायलट प्रोजेक्ट (पायलट ट्रायल) शुरू कर सकता है। ये नए प्लास्टिक नोट सबसे पहले देश के कुछ चुनिंदा शहरों में ट्रायल के तौर पर आम जनता के बीच उतारे जाएंगे। इस ट्रायल का मुख्य उद्देश्य यह देखना होगा कि आम लोग इन नोटों को कितना पसंद कर रहे हैं और क्या हमारी मौजूदा एटीएम (ATM) मशीनें बिना किसी तकनीकी खराबी के इन प्लास्टिक नोटों को स्वीकार कर पा रही हैं। अगर यह पायलट प्रोजेक्ट हर पैमाने पर पूरी तरह सफल रहता है, तो भविष्य में देश के सभी कागजी नोटों को चरणबद्ध तरीके से प्लास्टिक नोटों से बदल दिया जाएगा। कागज बनाम प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट: एक तुलनात्मक अध्ययन तुलना का आधार पारंपरिक कागजी नोट नए प्लास्टिक (पॉलिमर) नोट औसत उम्र (Lifespan) बहुत कम (जल्दी फटते और गलते हैं) कागजी नोटों के मुकाबले 4 से 5 गुना अधिक टिकाऊ वाटरप्रूफ क्षमता पानी लगते ही गलकर नष्ट हो जाते हैं पूरी तरह से वाटरप्रूफ (धुलने पर भी सुरक्षित) छपाई की लागत शुरुआती लागत कम, लेकिन बार-बार छापना पड़ता है शुरुआती लागत अधिक, लेकिन लंबे समय में बड़ी बचत रीसाइक्लिंग (Recycling) खराब होने पर नष्ट करना पड़ता है पूरी तरह रीसायकल करके नए उत्पाद बनाए जा सकते हैं सरकार और RBI को छपाई के खर्च से मिलेगी बड़ी राहत कागज के नोटों को बार-बार छापने और पुराने या कटे-फटे नोटों को बाजार से वापस लेकर उन्हें सुरक्षित तरीके से नष्ट करने में सरकार और रिजर्व बैंक का हर साल अरबों रुपया खर्च होता है। आंकड़ों की बात करें तो केवल वित्त वर्ष 2025 में ही नए नोटों की छपाई पर लगभग 6,372.8 करोड़ रुपये की एक बहुत बड़ी रकम खर्च हुई थी। प्लास्टिक या पॉलिमर से बने नोटों की सबसे बड़ी खासियत यह होती है कि ये आसानी से मुड़ते या फटते नहीं हैं। हालांकि इन्हें बनाने की शुरुआती लागत जरूर थोड़ी ज्यादा आती है, लेकिन चूंकि ये सालों-साल बिना खराब हुए चलते हैं, इसलिए बार-बार नोट छापने का खर्च बच जाता है। लंबे समय में यह तकनीक देश के राजस्व की एक बहुत बड़ी राशि बचाने में मददगार साबित होगी। क्यों खास होंगे ये नए प्लास्टिक नोट? पूरी तरह से वाटरप्रूफ: ये नोट पानी के प्रति पूरी तरह प्रतिरोधी (Waterproof) होंगे। अगर बारिश में आपका बटुआ भीग जाता है या गलती से नोट पैंट की जेब में रहकर पानी में धुल जाता है, तब भी इसकी छपाई और इसके वजूद पर कोई आंच नहीं आएगी। पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly): जब ये प्लास्टिक नोट बहुत ज्यादा पुराने या इस्तेमाल के लायक नहीं रह जाएंगे, तो इन्हें कचरे में फेंकने या जलाने की जरूरत नहीं होगी। इन्हें पूरी तरह से पिघलाकर रीसायकल किया जा सकेगा, जिससे अन्य उपयोगी प्लास्टिक प्रोडक्ट्स बनाए जा सकेंगे। इससे पर्यावरण को भी कोई नुकसान नहीं पहुंचेगा।