Supreme Court Verdict on Tamil Nadu Voter List Revision: सुप्रीम कोर्ट ने बंद की तमिलनाडु मतदाता सूची पुनरीक्षण को चुनौती देने वाली 13 याचिकाओं पर कार्यवाही; चुनाव याचिकाओं के जल्द निस्तारण की PIL पर सुनवाई से इनकार

भारत के सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने देश की लोकतांत्रिक और चुनावी प्रक्रियाओं से जुड़े दो बेहद महत्वपूर्ण मामलों पर बड़ा फैसला सुनाया है। अदालत ने एक तरफ जहां तमिलनाडु में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) को चुनौती देने वाली द्रविड़ मुनेत्र कड़गम (DMK) समेत कुल 13 याचिकाओं पर कार्यवाही को पूरी तरह बंद कर दिया है, वहीं दूसरी तरफ 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से संबंधित याचिकाओं के समयबद्ध निस्तारण के लिए विशेष पीठ गठित करने वाली जनहित याचिका (PIL) पर विचार करने से साफ इनकार कर दिया है।
प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत, न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची और न्यायमूर्ति वी. मोहना की तीन सदस्यीय विशेष पीठ ने इन मामलों की सुनवाई करते हुए महत्वपूर्ण कानूनी टिप्पणियां की हैं। आइए जानते हैं क्या है पूरा मामला और शीर्ष अदालत का अंतिम रुख:
1. मतदाता सूची पुनरीक्षण (SIR) से जुड़ी 13 याचिकाएं बंद
तमिलनाडु में मतदाता सूची का विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision – SIR) कराने के निर्वाचन आयोग (Election Commission) के फैसले के खिलाफ डीएमके (DMK) ने पिछले साल 3 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। याचिका में आयोग के इस कदम को असंवैधानिक, मनमाना और लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए खतरा बताया गया था।
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वकील की दलील: सुनवाई के दौरान डीएमके के संगठन सचिव आरएस भारती की ओर से पेश हुए अधिवक्ता विवेक सिंह ने पीठ के समक्ष दलील दी कि अब इन याचिकाओं पर आगे सुनवाई या किसी नए फैसले की आवश्यकता नहीं रह गई है।
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बिहार फैसले का हवाला: वकील ने स्पष्ट किया कि हाल ही में 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने बिहार में एसआईआर (SIR) प्रक्रिया को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर अपना विस्तृत फैसला सुना दिया है। उस फैसले में शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग के इस विशेष अधिकार को पूरी तरह से वैध और बरकरार रखा था।
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कोर्ट का आदेश: बिहार मामले में आए नजीर (Precedent) को स्वीकार करते हुए, सीजेआई की अगुवाई वाली पीठ ने इस मुद्दे से संबंधित सभी 13 याचिकाओं को आधिकारिक तौर पर निस्तारित (डिस्पोज) करते हुए कार्यवाही बंद कर दी।
2. चुनाव याचिकाओं के जल्द निपटारे वाली PIL पर सुनवाई से इनकार
सुप्रीम कोर्ट के समक्ष एक अन्य जनहित याचिका भी पेश हुई, जिसमें अनुरोध किया गया था कि मद्रास हाईकोर्ट को निर्देश दिया जाए कि वह 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव से संबंधित लंबित 54 चुनाव याचिकाओं (Election Petitions) का शीघ्र और समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित करे।
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क्या था मामला: याचिकाकर्ता के. वेंकटचलपति की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता डी. एस. नायडू और अधिवक्ता समीर मलिक ने दलील दी कि जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (RPA) की धारा 86(7) के तहत चुनाव से जुड़े विवादों का छह महीने के भीतर निपटारा हो जाना चाहिए।
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चुनाव परिणाम: याचिका के अनुसार, इस साल 23 अप्रैल 2026 को हुए तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में अभिनेता से नेता बने जोसेफ विजय के नेतृत्व वाली तमिलगा वेत्री कषगम (TVK) ने बड़ी जीत हासिल की थी। इसके बाद 4 मई को घोषित परिणामों की वैधता को चुनौती देते हुए 3 जून से 18 जून के बीच विभिन्न क्षेत्रों से 54 चुनाव याचिकाएं दायर की गईं, जो लंबे समय से लंबित हैं।
"गलत नजीर स्थापित होगी" – सीजेआई सूर्यकांत:
जब याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से मद्रास हाईकोर्ट को एक विशेष पीठ (Special Bench) गठित करने का निर्देश देने की मांग की, तो प्रधान न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई। सीजेआई ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि, "अगर सुप्रीम कोर्ट हर हाईकोर्ट को इस तरह के प्रशासनिक निर्देश देने लगेगा, तो इससे न्यायिक व्यवस्था में एक गलत नजीर (Wrong Precedent) स्थापित होगी।"
मद्रास हाईकोर्ट जाने की मिली छूट
सर्वोच्च अदालत ने भले ही इस जनहित याचिका पर सीधे विचार करने से इनकार कर दिया, लेकिन पीठ ने याचिकाकर्ता के कानूनी अधिकारों को सुरक्षित रखा है। अदालत ने याचिकाकर्ता को यह पूरी छूट (Liberty) प्रदान की है कि वे अपनी इस मांग और आवश्यक राहत के लिए सीधे मद्रास हाईकोर्ट (Madras High Court) के मुख्य न्यायाधीश का रुख कर सकते हैं।
इस प्रकार, सुप्रीम कोर्ट ने साफ कर दिया है कि चुनाव आयोग के पास मतदाता सूचियों को दुरुस्त करने का पूर्ण संवैधानिक अधिकार है और उच्च न्यायालयों के आंतरिक प्रशासनिक मामलों में शीर्ष अदालत सीधे हस्तक्षेप कर कोई गलत परंपरा शुरू नहीं करना चाहती।