Sabarimala Temple Case : न्यायिक समीक्षा की शक्ति पर हमला ठीक नहीं, सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी,जानें CJI की बेंच ने क्या कहा

News India Live, Digital Desk: देश के चर्चित सबरीमाला मंदिर मामले से जुड़े कानूनी पहलुओं पर सुप्रीम कोर्ट में एक बार फिर अहम सुनवाई हुई। इस दौरान शीर्ष अदालत ने न्यायिक समीक्षा (Judicial Review) की शक्ति को लेकर बेहद महत्वपूर्ण टिप्पणी की। जस्टिस सूर्यकांत और अन्य जजों की पीठ ने स्पष्ट किया कि न्यायपालिका की समीक्षा करने वाली शक्ति पर इस तरह प्रहार करना उचित नहीं है। कोर्ट ने यह बातें तब कहीं जब सुनवाई के दौरान मंदिर की परंपराओं और अदालती हस्तक्षेप के अधिकार को लेकर बहस छिड़ी।क्या है पूरा कानूनी पेच?दरअसल, यह सुनवाई सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश और उससे जुड़े 9 जजों की बेंच के रेफरेंस मामले पर केंद्रित थी। सुनवाई के दौरान जब दलीलें दी जा रही थीं कि क्या अदालत धार्मिक परंपराओं की समीक्षा कर सकती है, तब जस्टिस सूर्यकांत ने हस्तक्षेप किया। उन्होंने कहा कि संविधान के तहत मिली ‘न्यायिक समीक्षा’ की शक्ति लोकतंत्र का मूल ढांचा है। इसे इस हद तक चुनौती नहीं दी जानी चाहिए कि न्यायपालिका की स्वायत्तता पर ही सवाल उठने लगें।धार्मिक आस्था बनाम संवैधानिक अधिकारसबरीमाला मामला शुरू से ही ‘धार्मिक विश्वास’ और ‘संवैधानिक समानता’ के बीच की जंग रहा है। जहाँ एक पक्ष का कहना है कि मंदिर की सदियों पुरानी परंपराओं को बरकरार रखा जाना चाहिए, वहीं दूसरा पक्ष अनुच्छेद 14 (समानता का अधिकार) और अनुच्छेद 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का हवाला देते हुए इसे गलत बताता है। कोर्ट ने संकेत दिया कि वह केवल उन कानूनी सवालों पर गौर कर रहा है जो बड़ी बेंच को भेजे गए हैं, न कि किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुँचाना उनका उद्देश्य है।CJI और जस्टिस सूर्यकांत का कड़ा रुखपीठ ने वकीलों को टोकते हुए कहा कि न्यायिक समीक्षा की शक्ति वह सुरक्षा कवच है जो नागरिकों के अधिकारों की रक्षा करता है। यदि इसे कमजोर किया गया या इस पर बार-बार हमला किया गया, तो यह संतुलन बिगड़ सकता है। कोर्ट ने यह भी साफ किया कि धार्मिक मामलों में हस्तक्षेप केवल तभी किया जाता है जब वे मौलिक अधिकारों का उल्लंघन करते हों।अब आगे क्या होगा?सबरीमाला मामले से जुड़े इन संवैधानिक सवालों पर सुप्रीम कोर्ट की बड़ी बेंच गहनता से विचार कर रही है। आने वाले दिनों में यह तय होगा कि धार्मिक प्रथाओं में अदालती हस्तक्षेप की सीमा क्या होनी चाहिए। इस फैसले का असर न केवल सबरीमाला, बल्कि भविष्य में मस्जिदों में महिलाओं के प्रवेश और अन्य धार्मिक प्रथाओं से जुड़े मुकदमों पर भी पड़ेगा। पूरा देश अब सुप्रीम कोर्ट के अगले आदेश की प्रतीक्षा कर रहा है।