PM मोदी का मिशन यूरोप 2026 नॉर्वे से इटली तक मचेगी धूम, भारत-EU ट्रेड डील पर लगेगी मुहर जानें पूरा शेड्यूल

News India Live, Digital Desk: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी मई 2026 में एक बार फिर वैश्विक मंच पर भारत की धमक जमाने के लिए तैयार हैं। पीएम मोदी अगले महीने यूरोप के चार महत्वपूर्ण देशों नॉर्वे, स्वीडन, नीदरलैंड और इटली के आधिकारिक दौरे पर जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, यह दौरा भारत और यूरोपीय संघ (EU) के बीच हुए ऐतिहासिक मुक्त व्यापार समझौते (FTA) के बाद पहला बड़ा कूटनीतिक कदम है। इस यात्रा का मुख्य केंद्र नॉर्वे में होने वाला ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ होगा, जहाँ सुरक्षा, ऊर्जा और व्यापार जैसे मुद्दों पर बड़ी रणनीति तैयार की जाएगी।नॉर्वे में ‘भारत-नॉर्डिक समिट’: रणनीतिक साझेदारी पर जोरप्रधानमंत्री की यात्रा का पहला पड़ाव नॉर्वे की राजधानी ओस्लो होने की उम्मीद है। यहाँ पीएम मोदी तीसरे ‘भारत-नॉर्डिक शिखर सम्मेलन’ (India-Nordic Summit) में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन में नॉर्वे, स्वीडन, फिनलैंड, डेनमार्क और आइसलैंड के राष्ट्राध्यक्ष शामिल होंगे। गौरतलब है कि जनवरी 2026 में भारत और EU के बीच ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ यानी FTA संपन्न हुआ है, जिसके बाद नॉर्डिक देशों के साथ तकनीकी और निवेश की नई राहें खुलने वाली हैं।इटली और नीदरलैंड: व्यापारिक रिश्तों को मिलेगी नई ऊंचाईनॉर्वे के बाद पीएम मोदी स्वीडन और नीदरलैंड का दौरा करेंगे। नीदरलैंड भारत का एक प्रमुख व्यापारिक भागीदार है, जहाँ कृषि और जल प्रबंधन तकनीकों पर चर्चा संभावित है। इसके बाद यात्रा का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण पड़ाव इटली होगा। इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी के निमंत्रण पर पीएम मोदी रोम पहुंचेंगे। भारत और इटली के बीच ‘इंडिया-मिडिल ईस्ट-यूरोप इकोनॉमिक कॉरिडोर’ (IMEEC) को आगे बढ़ाने और रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।क्यों खास है यह दौरा?यह दौरा ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया भू-राजनीतिक अस्थिरता और ऊर्जा संकट से जूझ रही है। भारत-EU ट्रेड डील के तहत भारत के 99% से अधिक निर्यात को यूरोपीय बाजारों में ड्यूटी-फ्री एक्सेस मिला है। पीएम मोदी की यह यात्रा इस समझौते को जमीनी स्तर पर उतारने और भारतीय ‘मेक इन इंडिया’ उत्पादों के लिए यूरोप में बड़ा बाजार सुनिश्चित करने की दिशा में मील का पत्थर साबित होगी। साथ ही, हरित ऊर्जा (Green Energy) और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी कई समझौतों की उम्मीद है।G-7 और फ्रांस की यात्रा की भी तैयारीरिपोर्ट्स के अनुसार, मई के इस दौरे के बाद जून 2026 में प्रधानमंत्री मोदी फ्रांस के एविअन-लेस-बैंस भी जा सकते हैं, जहाँ राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों द्वारा आयोजित G-7 शिखर सम्मेलन में वे ‘आउटरीच’ अतिथि के रूप में शिरकत करेंगे। यूरोप के इन बैक-टू-बैक दौरों से साफ है कि भारत अब वैश्विक सप्लाई चेन और कूटनीति में यूरोप को एक अनिवार्य साझेदार के रूप में देख रहा है।