Sawan Shiv Puja: भगवान शिव को आखिर क्यों इतनी प्रिय हैं भांग और धतूरा? जानिए सावन में इन्हें चढ़ाने का पौराणिक रहस्य और वैज्ञानिक महत्व

लखनऊ। सावन (Sawan 2026) का पवित्र महीना शुरू होते ही देश भर के शिवालयों में 'हर-हर महादेव' और 'बम-बम भोले' की गूंज सुनाई देने लगती है। भगवान शिव के भक्त उन्हें प्रसन्न करने के लिए जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक के साथ-साथ कई तरह की पूजन सामग्रियां अर्पित करते हैं। लेकिन सनातन परंपरा में महादेव की पूजा तब तक अधूरी मानी जाती है, जब तक उन्हें भांग और धतूरा (Bhang and Dhatura) न चढ़ाया जाए। टीवी9 हिंदी की एक विशेष धार्मिक रिपोर्ट के मुताबिक, जहां अन्य देवी-देवताओं को छप्पन भोग और अत्यंत सुगंधित फूल चढ़ाए जाते हैं, वहीं देवों के देव महादेव को कड़वा धतूरा और नशीली भांग प्रिय है। कई लोग इसे सिर्फ एक लोक परंपरा मानते हैं, लेकिन इसके पीछे बेहद गंभीर पौराणिक कथाएं (Mythology) और आयुर्वेद से जुड़े गहरे वैज्ञानिक कारण छिपे हैं। आइए जानते हैं कि सावन में शिव जी को ये चीजें अर्पित करने का असली रहस्य क्या है।
पौराणिक कथा: समुद्र मंथन और हलाहल विष का प्रभाव
पौराणिक ग्रंथों और शिव पुराण (Shiva Purana) के अनुसार, सावन के महीने में भांग-धतूरा चढ़ाने की परंपरा का सीधा संबंध देव-असुर संग्राम और समुद्र मंथन से है:
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हलाहल विष की उत्पत्ति: जब देवताओं और दानवों ने मिलकर समुद्र मंथन किया, तो उसमें से चौदह रत्नों के साथ-साथ 'हलाहल' नामक अत्यंत विनाशकारी और भयंकर विष भी निकला। उस विष की गर्मी से ब्रह्मांड जलने लगा।
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महादेव का विषपान: सृष्टि की रक्षा के लिए भगवान शिव ने उस हलाहल विष को अपने कंठ में धारण कर लिया, जिससे उनका नाम 'नीलकंठ' पड़ा।
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जलन शांत करने का उपाय: विषपान करते ही महादेव का शरीर और मस्तिष्क अत्यधिक गर्म हो गए और वे तीव्र जलन से व्याकुल होने लगे। तब देवताओं और जड़ी-बूटी के ज्ञाता ऋषियों ने शिव जी के सिर की गर्मी और शरीर की तपन को शांत करने के लिए उन पर जल की अविरल धारा (जलाभिषेक) चढ़ाई और शीतल प्रवृत्ति वाली औषधियां जैसे—भांग, धतूरा और बेलपत्र अर्पित किए। इन औषधियों के प्रभाव से महादेव के शरीर की जलन शांत हुई। तभी से सावन मास में उन्हें ये चीजें चढ़ाने की परंपरा शुरू हुई।
धार्मिक महत्व: अहंकार और कड़वाहट का समर्पण
आध्यात्मिक दृष्टिकोण से, शिव जी को भांग और धतूरा चढ़ाना इंसानी विकारों के त्याग का प्रतीक है। धतूरा एक कांटेदार और अत्यंत कड़वा फल होता है, जिसे आम लोग किसी काम में नहीं लाते। महादेव को इसे अर्पित करने का अर्थ है कि मनुष्य अपने भीतर की कड़वाहट, ईर्ष्या, क्रोध और अहंकार जैसी बुराइयों को भगवान के चरणों में सौंप दे और सात्विक जीवन अपनाए। वहीं भांग मन को पूरी तरह शांत और एकाग्र करने का संदेश देती है, ताकि भक्त बाहरी दुनिया के आकर्षणों को भूलकर पूरी तरह शिव भक्ति में लीन हो सके।
वैज्ञानिक और आयुर्वेदिक पहलू: असाधारण जड़ी-बूटियां
टीवी9 हिंदी की रिपोर्ट में इसके वैज्ञानिक पहलू पर भी प्रकाश डाला गया है। आयुर्वेद (Ayurveda) में भांग और धतूरे को बेहद शक्तिशाली और महत्वपूर्ण जड़ी-बूटियों की श्रेणी में रखा गया है:
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तापमान को नियंत्रित करना: सावन के महीने में बारिश के कारण वातावरण में नमी और तापमान में तेजी से उतार-चढ़ाव होता है, जिससे कई तरह की संक्रामक बीमारियां फैलती हैं। धतूरा और भांग स्वभाव से बेहद गर्म और वात-कफ नाशक होते हैं।
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सीमित मात्रा में औषधि: आयुर्वेद के अनुसार, यदि अत्यंत सीमित और शुद्ध रूप में इनका औषधीय इस्तेमाल किया जाए, तो ये जोड़ों के दर्द, अस्थमा, त्वचा रोग और मानसिक तनाव को दूर करने में रामबाण सिद्ध होते हैं। चूंकि सावन में प्रकृति इन पौधों को बहुतायत में उगाती है, इसलिए प्राचीन ऋषियों ने इन्हें प्रकृति और ईश्वर के प्रति सम्मान प्रकट करने के रूप में पूजा पद्धति से जोड़ दिया।
शिव भक्तों के लिए आवश्यक सावधानी
धार्मिक जानकारों और डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि शिव जी को भांग और धतूरा चढ़ाना पूरी तरह से एक आध्यात्मिक क्रिया है। भक्तों को पूजा के नाम पर अत्यधिक भांग का सेवन (Intoxication) करने या नशे के रूप में इसका गलत इस्तेमाल करने से पूरी तरह बचना चाहिए। शिव पूजा का वास्तविक अर्थ मन को शुद्ध, शांत और संयमित रखना है, न कि नशे में डूबना। इस सावन, भोलेनाथ की पूजा पूरी श्रद्धा से करें और इन पवित्र औषधियों को केवल उनके चरणों में अर्पित कर उनका आशीर्वाद प्राप्त करें।