Sawan Shivratri 2026: सावन में कब मनाई जाएगी सावन शिवरात्रि? जानिए सही तारीख

नई दिल्ली: हिंदू धर्म में सावन (श्रावण) का महीना और उसमें आने वाली शिवरात्रि तिथि का अत्यंत विशेष एवं पवित्र महत्व माना जाता है। पूरे सावन माह में जहां भक्त भगवान शिव (महादेव) की पूजा-अर्चना करते हैं, वहीं सावन मास के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि को 'सावन शिवरात्रि' (Sawan Shivratri) के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस दिन शिवलिंग का जलाभिषेक, दुग्धाभिषेक और बेलपत्र अर्पित करने से भगवान आशुतोष शीघ्र प्रसन्न होते हैं और साधक की समस्त मनोकामनाएं पूरी करते हैं।
कांवड़ यात्रा (Kanwar Yatra) के दौरान गंगाजल लाने वाले कांवड़िए भी सावन शिवरात्रि के दिन ही पवित्र नदियों के जल से शिवलिंग का जलाभिषेक कर अपनी यात्रा पूरी करते हैं। इस दिन विधि-विधान से व्रत रखने और चारों प्रहर की पूजा करने से जीवन के सभी दुख-कष्ट दूर होते हैं और मोक्ष की प्राप्ति होती है।
सावन शिवरात्रि 2026 की सही तिथि
पंचांगीय गणना के अनुसार, सावन माह के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी तिथि की शुरुआत 11 अगस्त 2026 की दोपहर 01:24 बजे से होगी, जिसका समापन 12 अगस्त 2026 की दोपहर 03:08 बजे होगा।
चूंकि महाशिवरात्रि और सावन शिवरात्रि की पूजा में निशिता काल (रात्रि कालीन पूजा) का विशेष महत्व होता है, इसलिए सावन शिवरात्रि का मुख्य व्रत और पूजन 11 अगस्त 2026, मंगलवार को ही किया जाएगा।
जलाभिषेक और पूजा के शुभ मुहूर्त (Sawan Shivratri Jalabhishekar Muhurat)
सावन शिवरात्रि के दिन शिवलिंग पर जल चढ़ाने और दर्शन-पूजन के लिए निम्नलिखित शुभ समय अत्यंत फलदायी माने गए हैं:
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सावन शिवरात्रि व्रत तिथि: 11 अगस्त 2026, मंगलवार
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सुबह का जलाभिषेक मुहूर्त: 11 अगस्त को सुबह 05:48 बजे से दोपहर 12:26 बजे तक।
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अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से दोपहर 12:53 बजे तक।
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निशिता काल पूजा समय (मुख्य पूजा): 11 अगस्त की मध्यरात्रि 12:05 बजे से रात 12:48 बजे तक।
सावन शिवरात्रि: चारों प्रहर की पूजा का समय (4 Prahar Puja Timings)
सावन शिवरात्रि पर रात्रि के चारों प्रहर में भगवान शिव की पूजा करने का विशेष विधान है:
| प्रहर (Prahar) | पूजा का शुभ समय (11-12 अगस्त की रात) |
| प्रथम प्रहर पूजा | 11 अगस्त, शाम 07:04 बजे से रात 09:44 बजे तक |
| द्वितीय प्रहर पूजा | 11 अगस्त, रात 09:44 बजे से मध्यरात्रि 12:25 बजे तक |
| तृतीय प्रहर पूजा | 12 अगस्त, मध्यरात्रि 12:25 बजे से रात 03:05 बजे तक |
| चतुर्थ प्रहर पूजा | 12 अगस्त, रात 03:05 बजे से सुबह 05:49 बजे तक |
सावन शिवरात्रि व्रत पारण (Parana) का समय
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पारण की तिथि: 12 अगस्त 2026, बुधवार
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पारण का शुभ समय: 12 अगस्त की सुबह 05:49 बजे से दोपहर 03:08 बजे तक।
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पारण नियम: चतुर्दशी तिथि समाप्त होने से पहले सात्विक भोजन या फलाहार ग्रहण कर व्रत का पारण करें।
शिवलिंग पर जलाभिषेक की सही विधि और सामग्री
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स्नान व संकल्प: सावन शिवरात्रि के दिन प्रातःकाल उठकर स्नान करें और स्वच्छ वस्त्र (संभव हो तो हल्के या हरे/सफेद रंग के) धारण कर भगवान शिव के सामने व्रत का संकल्प लें।
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शिवलिंग जलाभिषेक: मंदिर जाकर तांबे या पीतल के लोटे में शुद्ध जल, थोड़ा सा गंगाजल और कच्चा दूध मिलाकर 'ॐ नमः शिवाय' का जाप करते हुए शिवलिंग पर पतली धार से अर्पित करें।
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अर्पित करें ये सामग्रियां: महादेव को बेलपत्र (3 पत्तियों वाला और बिना कटा-फटा), धतूरा, भांग, शमी के पत्ते, अक्षत (अखंड चावल), सफेद चंदन, भस्म और आक के फूल चढ़ाएं।
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शिव चालीसा व आरती: धूप-दीप प्रज्वलित करके शिव चालीसा, रुद्राष्टकम का पाठ करें और अंत में कपूर से आरती उतारकर सुख-समृद्धि एवं आरोग्य की प्रार्थना करें।