आशा भोसले को श्रद्धांजलि देना पड़ा भारी,पाकिस्तान के जियो न्यूज पर गिरी गाज, PEMRA ने थमाया नोटिस

News India Live, Digital Desk: सुर साम्राज्ञी आशा भोसले के प्रति सम्मान प्रकट करना पाकिस्तान के सबसे बड़े न्यूज चैनलों में से एक ‘जियो न्यूज’ (Geo News) के लिए मुसीबत का सबब बन गया है। पाकिस्तान की मीडिया नियामक संस्था PEMRA (पाकिस्तान इलेक्ट्रॉनिक मीडिया रेगुलेटरी अथॉरिटी) ने चैनल को एक कड़ा कारण बताओ नोटिस जारी किया है। यह विवाद तब शुरू हुआ जब चैनल ने अपने एक कार्यक्रम में भारतीय गायिका को श्रद्धांजलि दी, जिसे कट्टरपंथियों और सेना समर्थकों ने ‘देश विरोधी’ कृत्य करार दे दिया।क्या है पूरा विवाद? एक ट्रिब्यूट पर मचा बवालहाल ही में जियो न्यूज ने एक विशेष खंड प्रसारित किया था जिसमें आशा भोसले के संगीत जगत में योगदान और उनकी जादुई आवाज की सराहना की गई थी। कार्यक्रम में उनके कुछ मशहूर गानों की झलकियां भी दिखाई गईं। जैसे ही यह शो प्रसारित हुआ, पाकिस्तान के सोशल मीडिया पर ‘प्रो-आर्मी’ (सेना समर्थक) अकाउंट्स ने इसे मुद्दा बना लिया। उनका तर्क है कि जब भारत और पाकिस्तान के बीच संबंध तनावपूर्ण हैं, तब एक भारतीय हस्ती का महिमामंडन करना पाकिस्तान के ‘राष्ट्रीय हित’ के खिलाफ है।PEMRA का एक्शन: ‘राष्ट्रीय गरिमा’ का दिया हवालाPEMRA ने अपने नोटिस में कहा है कि जियो न्यूज ने मीडिया आचार संहिता का उल्लंघन किया है। नियामक संस्था का आरोप है कि चैनल का कंटेंट पाकिस्तान की वैचारिक सीमाओं और राष्ट्रीय गौरव को ठेस पहुँचाने वाला है। जियो न्यूज से इस पर स्पष्टीकरण मांगा गया है और संतोषजनक जवाब न मिलने पर भारी जुर्माना या प्रसारण पर रोक लगाने की चेतावनी दी गई है।पाकिस्तानी सेना समर्थकों का सोशल मीडिया पर हमलाइस विवाद के पीछे पाकिस्तान की सेना के समर्थकों का बड़ा हाथ माना जा रहा है। ट्विटर (X) पर जियो न्यूज के खिलाफ अभियान चलाया गया, जिसमें चैनल को ‘गद्दार’ और ‘भारत का समर्थक’ बताया गया। प्रदर्शनकारियों का कहना है कि पाकिस्तानी मीडिया को भारतीय संस्कृति और कलाकारों को बढ़ावा देने के बजाय स्थानीय मुद्दों पर ध्यान देना चाहिए। यह पहली बार नहीं है जब जियो न्यूज को भारतीय कलाकारों या शांति की बात करने पर पाकिस्तानी प्रतिष्ठान के गुस्से का सामना करना पड़ा है।कला बनाम राजनीति: बुद्धिजीवियों ने जताया अफसोसजहाँ एक ओर कट्टरपंथी विरोध कर रहे हैं, वहीं पाकिस्तान के उदारवादी तबके और संगीत प्रेमियों ने इस कार्रवाई पर दुख जताया है। सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि कला और संगीत की कोई सीमा नहीं होती। आशा भोसले की आवाज सरहद के दोनों पार पसंद की जाती है, और उन्हें श्रद्धांजलि देना केवल एक सांस्कृतिक शिष्टाचार था। विशेषज्ञों का मानना है कि यह घटना पाकिस्तान में मीडिया की घटती आजादी और बढ़ती सेंसरशिप का एक और उदाहरण है।