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Sugar Price Rise: ‘चीनी महंगी होने की वजह इथेनॉल नहीं’, सरकार ने कम उत्पादन और जमाखोरी पर उठाए सवाल; जानिए असली वजह

देश के खुदरा और थोक बाजारों में चीनी की कीमतों में आई हालिया तेजी को लेकर केंद्र सरकार ने बड़ा स्पष्टीकरण जारी किया है। उपभोक्ता मामलों और खाद्य मंत्रालय ने उन दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है, जिनमें कहा जा रहा था कि गन्ने के रस और शीरे (B-Heavy Molasses) को इथेनॉल उत्पादन में डायवर्ट करने की वजह से घरेलू बाजार में चीनी के दाम बढ़े हैं। सरकार ने साफ किया है कि बाजार में मूल्य वृद्धि का असली कारण कुछ प्रमुख उत्पादक राज्यों में गन्ने की पैदावार में कमी और कुछ व्यापारियों द्वारा की जा रही कृत्रिम जमाखोरी है।

इथेनॉल ब्लेंडिंग पॉलिसी पर सरकार की दो टूक सफाई

मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, राष्ट्रीय जैव ईंधन नीति और पेट्रोल में 20% इथेनॉल मिश्रण (E20) के लक्ष्य को पूरा करते हुए हमेशा घरेलू खाद्य सुरक्षा और चीनी की जरूरतों को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाती है।

सरकार चीनी सीजन की शुरुआत में ही देश की कुल खपत का सटीक आकलन करती है और बफर स्टॉक सुनिश्चित करने के बाद ही अतिरिक्त गन्ने या शीरे को इथेनॉल निर्माण के लिए आवंटित किया जाता है। इसलिए इथेनॉल कार्यक्रम को चीनी की महंगाई के लिए दोषी ठहराना पूरी तरह से तथ्यात्मक रूप से गलत और निराधार है।

उत्पादन में गिरावट और मौसमी मार

चीनी की कीमतों में हलचल के पीछे का मुख्य कारण प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों, विशेषकर महाराष्ट्र और कर्नाटक के कुछ हिस्सों में अनियमित मानसून और सूखे जैसी स्थिति के चलते गन्ने की कम रिकवरी और रकबे में आई कमी है।

उत्पादन के आंकड़ों में आई इस गिरावट के चलते बाजार में आपूर्ति चक्र को लेकर एक मनोवैज्ञानिक दबाव बना, जिसका फायदा बिचौलियों और बड़े स्टॉकिस्टों ने उठाया। हालांकि, उत्तर प्रदेश जैसे राज्यों में उत्पादन संतुलित रहने से देश में कुल उपलब्धता सामान्य स्तर पर बनी हुई है।

जमाखोरी और सट्टेबाजी पर केंद्र का सख्त रुख

सरकार ने स्पष्ट संकेत दिए हैं कि त्योहारी और मांग वाले सीजन के दौरान कुछ तत्वों द्वारा की जा रही अनुचित जमाखोरी और सट्टेबाजी पर कड़ी नजर रखी जा रही है। खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग ने सभी राज्य सरकारों को निर्देश दिए हैं कि वे चीनी मिलों, थोक विक्रेताओं और बड़े रिटेलर्स के स्टॉक की नियमित निगरानी करें।

यदि कोई भी व्यापारी या संस्था निर्धारित स्टॉक लिमिट का उल्लंघन करती पाई गई या कृत्रिम कमी पैदा करके मुनाफाखोरी की कोशिश करेगी, तो आवश्यक वस्तु अधिनियम (Essential Commodities Act) के तहत उनके खिलाफ सख्त दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।

पर्याप्त बफर स्टॉक, घबराने की जरूरत नहीं

खाद्य मंत्रालय ने उपभोक्ताओं और उद्योगों को आश्वस्त किया है कि देश में घरेलू खपत के लिए चीनी का पर्याप्त भंडार (Stock) मौजूद है। सरकार के पास मासिक रिलीज कोटा (Monthly Release Quota) तंत्र के माध्यम से बाजार में आपूर्ति नियंत्रित करने की पूरी व्यवस्था है। जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त कोटा जारी करके कीमतों को तत्काल नियंत्रित किया जाएगा, ताकि आम जनता की रसोई के बजट पर कोई अतिरिक्त बोझ न पड़े।

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