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विधानसभा की बंपर जीत के बाद अब महायुति का अगला वार निकाय चुनावों के लिए बनाया ये मास्टरप्लान

News India Live, Digital Desk: महाराष्ट्र की राजनीति में पिछले कुछ समय में जो भूचाल और फिर जो शांति (या कहें जीत का जश्न) दिखा, वो किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था। विधानसभा चुनावों में धमाकेदार जीत दर्ज करने के बाद, अब राज्य में सत्ताधारी गठबंधन यानी ‘महायुति’ (Mahayuti) ने अपने अगले कदम का ऐलान कर दिया है। और यकीन मानिए, यह खबर विपक्ष यानी महा विकास अघाड़ी (MVA) की नींद उड़ाने के लिए काफी है।सीधे शब्दों में कहें तो एकनाथ शिंदे, देवेंद्र फडणवीस और अजित पवार की तिगड़ी ने फैसला कर लिया है कि वे आगामी स्थानीय निकाय चुनाव (Civic Polls) भी एक साथ ही लड़ेंगे।आइये, जरा गहराई से समझते हैं कि आखिर इस फैसले के मायने क्या हैं और आपके शहर या गाँव की सरकार पर इसका क्या असर पड़ेगा।सफलता का फॉर्मूला नहीं बदलेंगेअक्सर देखा गया है कि पार्टियां विधानसभा या लोकसभा तो साथ लड़ती हैं, लेकिन जब बात नगरपालिका या नगर परिषद (Local Body) की आती है, तो स्थानीय झगड़ों की वजह से अलग-अलग हो जाती हैं। लेकिन ‘महायुति’ ने साफ कर दिया है कि वे वो गलती नहीं करेंगे। नेताओं का मानना है कि जब साथ मिलकर राज्य जीता जा सकता है, तो शहर क्यों नहीं?खबर है कि तीनों प्रमुख पार्टियों (बीजेपी, शिवसेना-शिंदे गुट और एनसीपी-अजित गुट) के नेताओं ने बैठक करके तय किया है कि वोटों का बंटवारा रोकने के लिए एकजुट रहना ही सबसे अक्लमंदी का काम है।BMC और बड़े शहरों पर नजरमहाराष्ट्र में ‘मिनी विधानसभा’ कहे जाने वाले मुंबई महानगर पालिका (BMC) और पुणे, नागपुर जैसे बड़े शहरों के चुनाव काफी समय से अटके हुए हैं। ये चुनाव बहुत महत्वपूर्ण हैं क्योंकि असली फंड और शहर के विकास की चाबी यहीं होती है।महायुति का यह फैसला स्पष्ट संदेश है कि वे मुंबई और अन्य शहरों से विपक्ष का सूपड़ा साफ़ करने के मूड में हैं। सीट शेयरिंग (किस वार्ड में कौन लड़ेगा) को लेकर झगड़े न हों, इसके लिए भी उन्होंने अभी से समन्वय समितियां (Coordination Committees) बनाने का प्लान तैयार कर लिया है। यानी इस बार तैयारी पूरी पक्की है।कार्यकर्ताओं के लिए संदेशइस फैसले से सबसे ज्यादा राहत जमीनी कार्यकर्ताओं को मिली है। अक्सर कार्यकर्ता कन्फ्यूज रहते हैं कि लोकल लेवल पर गठबंधन धर्म निभाएं या अपनी पार्टी का झंडा उठाएं। अब ऊपर से सिग्नल क्लियर है—”सबको मिलजुल कर ही चुनाव लड़ना है।”विपक्ष (MVA) के लिए चुनौतीउद्धव ठाकरे, शरद पवार और कांग्रेस के लिए यह बुरी खबर हो सकती है। अगर महायुति के वोट नहीं बंटे, तो विपक्ष के लिए जीतना बहुत मुश्किल हो जाएगा। यह एक तरह से “एक और एक ग्यारह” वाली रणनीति है।

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