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ई-साइकिल चलाने वालों के लिए बदलेंगे नियम! सरकार ने जारी किया नया सेफ्टी ड्राफ्ट; जानिए स्पीड लिमिट, बैटरी मानक, लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन से जुड़ी हर नई गाइडलाइन

देश के शहरी और ग्रामीण इलाकों में पर्यावरण के अनुकूल और किफायती सवारी के रूप में इलेक्ट्रिक साइकिल (E-Cycle) की लोकप्रियता तेजी से बढ़ रही है। पेट्रोल की बढ़ती कीमतों, ट्रैफिक जाम से निजात और फिटनेस के प्रति बढ़ती जागरूकता के चलते स्कूली छात्रों से लेकर ऑफिस जाने वाले युवाओं और डिलीवरी पार्टनर्स तक बड़ी संख्या में लोग ई-साइकिल को अपना रहे हैं। हालांकि, बाजार में बिना किसी मानक के बिक रही घटिया बैटरियों, अनियंत्रित स्पीड और सुरक्षा मानकों की अनदेखी के कारण हाल के दिनों में कई दुर्घटनाएं और आग लगने की घटनाएं सामने आई हैं। इसी को गंभीरता से लेते हुए केंद्र सरकार और संबंधित तकनीकी निकायों ने ई-साइकिल के विनिर्माण, सुरक्षा और संचालन से जुड़े नियमों को कड़ा करने के लिए एक व्यापक नया ड्राफ्ट जारी किया है।

इस नए ड्राफ्ट का मुख्य उद्देश्य भारतीय सड़कों पर चलने वाली इलेक्ट्रिक साइकिलों को तकनीकी रूप से अधिक सुरक्षित, मजबूत और पर्यावरण के अनुकूल बनाना है। नए नियमों के लागू होने के बाद ई-साइकिल निर्माताओं और खरीदारों दोनों के लिए कई अहम बदलाव देखने को मिलेंगे।

क्या है 250W और 25 किमी/घंटा का नियम? किसे मिलेगी रजिस्ट्रेशन से छूट

सरकार के मौजूदा केंद्रीय मोटर वाहन नियम (CMVR) और नए प्रस्तावित ड्राफ्ट में ई-साइकिल को सामान्य साइकिल और मोटर चालित वाहनों के बीच स्पष्ट रूप से वर्गीकृत किया गया है।

नए नियमों के अनुसार, केवल उन्हीं इलेक्ट्रिक साइकिलों को मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) के दायरे से बाहर यानी 'नॉन-मोटराइज्ड / माइक्रो-मोबिलिटी' श्रेणी में रखा जाएगा, जिनकी अधिकतम मोटर क्षमता 250 वाट (250W) तक सीमित होगी और जिनकी अधिकतम गति 25 किलोमीटर प्रति घंटा (25 km/h) से अधिक नहीं होगी।

यदि कोई ई-साइकिल इन दोनों निर्धारित सीमाओं (250W और 25 km/h) के भीतर है, तो:

  • उसे आरटीओ (RTO) में रजिस्ट्रेशन कराने की जरूरत नहीं होगी।

  • चालक के पास ड्राइविंग लाइसेंस (Driving License) होना अनिवार्य नहीं होगा।

  • वाहन के लिए अनिवार्य थर्ड-पार्टी इंश्योरेंस या रोड टैक्स का भुगतान नहीं करना पड़ेगा।

  • इसे 14 से 16 वर्ष की उम्र के किशोर और छात्र भी कानूनी रूप से सार्वजनिक सड़कों पर चला सकेंगे।

हालांकि, ड्राफ्ट में यह भी साफ किया गया है कि यदि कोई निर्माता या डीलर 250 वाट से अधिक की मोटर या 25 किमी/घंटा से अधिक की स्पीड वाली ई-साइकिल बेचता है, तो उसे कानूनी रूप से इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर (Moped/Electric Scooter) माना जाएगा, जिसके लिए रजिस्ट्रेशन, नंबर प्लेट, हेलमेट और ड्राइविंग लाइसेंस अनिवार्य होगा।

पेडेलेक (Pedelec) और थ्रॉटल मॉडल के लिए अलग गाइडलाइंस

ड्राफ्ट नियमों में इलेक्ट्रिक साइकिलों के संचालन तंत्र को लेकर भी तकनीकी स्पष्टता लाई गई है।

  • पेडेलेक (Pedal-Assist E-Cycle): यह वह मॉडल है जिसमें साइकिल को आगे बढ़ाने के लिए पैडल मारना जरूरी होता है और मोटर केवल राइडर की मेहनत को कम करने के लिए इलेक्ट्रिक असिस्ट देती है। जैसे ही राइडर पैडल मारना बंद करता है या गति 25 किमी/घंटा तक पहुंचती है, मोटर स्वतः ही बिजली की आपूर्ति बंद (Cut-off) कर देती है। नए ड्राफ्ट में पेडेलेक मॉडल को प्राथमिकता और प्रोत्साहन देने की बात कही गई है।

  • प्योर थ्रॉटल (Throttle-Only E-Cycle): कई कंपनियां बिना पैडल मारे केवल हैंडल के थ्रॉटल (एक्सेलरेटर) से चलने वाली साइकिलें बेच रही हैं। ड्राफ्ट में थ्रॉटल-ओनली मॉडल्स के लिए गति नियंत्रक और कट-ऑफ सेंसर लगाना अनिवार्य करने का प्रस्ताव है, ताकि अचानक अनियंत्रित स्पीड के कारण होने वाले हादसों को रोका जा सके।

बैटरी सुरक्षा और BIS प्रमाणीकरण: आग और ब्लास्ट के खतरों पर लगाम

इलेक्ट्रिक वाहनों में आग लगने की घटनाओं को देखते हुए नए ड्राफ्ट में बैटरी की गुणवत्ता को सबसे ज्यादा प्राथमिकता दी गई है। अब ई-साइकिल में लगने वाले लिथियम-आयन बैटरी पैक्स को भारतीय मानक ब्यूरो (BIS) और ऑटोमोटिव इंडस्ट्री स्टैंडर्ड्स (AIS) के कड़े परीक्षणों से गुजरना होगा।

ड्राफ्ट के तहत प्रमुख तकनीकी अनिवार्यताएं:

  • थर्मल रनअवे प्रोटेक्शन: अत्यधिक गर्मी या चार्जिंग के दौरान तापमान बढ़ने पर बैटरी में आग न लगे, इसके लिए एडवांस बैटरी मैनेजमेंट सिस्टम (BMS) अनिवार्य होगा।

  • वाटरप्रूफ और डस्टप्रूफ रेटिंग: मानसून और भारतीय सड़कों की स्थिति को देखते हुए बैटरी और कंट्रोलर के लिए न्यूनतम IP65/IP67 प्रोटेक्शन मानक तय किए जा रहे हैं।

  • अन-ऑथराइज्ड स्पीड हैकिंग पर रोक: ड्राफ्ट में निर्देश दिया गया है कि कंट्रोलर यूनिट ऐसी होनी चाहिए जिसके सॉफ्टवेयर या हार्डवेयर से छेड़छाड़ (Tampering) करके स्पीड को 25 किमी/घंटा से ऊपर न बढ़ाया जा सके।

  • स्मार्ट चार्जर मानक: ओवरचार्जिंग और शॉर्ट सर्किट से बचाने के लिए ऑटो-कटऑफ वाले प्रमाणित चार्जर्स ही दिए जाएंगे।

ब्रेकिंग, रिफ्लेक्टर्स और नाइट विजिबिलिटी के नए अनिवार्य फीचर्स

रात के समय या कम रोशनी में होने वाले हादसों को रोकने के लिए ई-साइकिल के विजुअल और ब्रेकिंग सिस्टम को लेकर भी ड्राफ्ट में नए नियम प्रस्तावित किए गए हैं:

  • इलेक्ट्रॉनिक मोटर कट-ऑफ ब्रेक: ब्रेक लीवर दबाते ही मोटर को पावर सप्लाई तत्काल कटनी चाहिए, ताकि इमरजेंसी में साइकिल तुरंत रुक सके।

  • डिस्क या हाई-ग्रिप वी-ब्रेक: 25 किमी/घंटा की गति से चल रही साइकिल को सुरक्षित दूरी में रोकने के लिए उन्नत ब्रेकिंग सिस्टम अनिवार्य होगा।

  • 360-डिग्री रिफ्लेक्टिव मार्किंग्स: पहियों के स्पोक्स, पैडल और फ्रेम पर उच्च गुणवत्ता वाले रेट्रो-रिफ्लेक्टिव टेप और रिफ्लेक्टर्स लगाना जरूरी होगा।

  • इंटीग्रेटेड फ्रंट और रियर लाइट्स: अंधेरे में विजिबिलिटी के लिए बैटरी से जुड़ी फ्रंट एलईडी लाइट और ब्रेक दबाने पर जलने वाली रियर टेल-लाइट (Brake Light) को सभी नए मॉडलों में अनिवार्य किए जाने का प्रस्ताव है।

ई-साइकिल सवारों के लिए सुरक्षा एडवाइजरी और हेलमेट का नियम

यद्यपि 250 वाट से कम की ई-साइकिल के लिए कानूनी रूप से भारी चालान का प्रावधान नहीं है, लेकिन सड़क सुरक्षा विशेषज्ञों और परिवहन मंत्रालय के ड्राफ्ट में सवारों के लिए व्यक्तिगत सुरक्षा उपकरण पहनने की सख्त अनुशंसा (Advisory) की गई है:

  • 20 से 25 किमी/घंटे की रफ्तार पर गिरने से सिर में गंभीर चोट का खतरा रहता है, इसलिए ई-साइकिल चलाते समय हमेशा आईएसआई (ISI) मार्क वाला साइकिल हेलमेट पहनें।

  • ई-साइकिल को कभी भी हाई-स्पीड एक्सप्रेसवे या मुख्य राजमार्गों के सबसे दाहिने फास्ट लेन में न चलाएं; हमेशा साइकिल ट्रैक या सर्विस लेन का उपयोग करें।

  • सड़क पर मुड़ते समय उचित हैंड सिग्नल दें और ईयरफोन लगाकर गाने सुनते हुए साइकिल चलाने से पूरी तरह बचें।

आम उपभोक्ताओं और विनिर्माताओं पर क्या होगा नए नियमों का असर?

सरकार ने इस ड्राफ्ट नोटिफिकेशन को सार्वजनिक कर उद्योग जगत के विशेषज्ञों, निर्माताओं और आम जनता से आपत्तियां व सुझाव मांगे हैं। इन सुझावों की समीक्षा के बाद अंतिम अधिसूचना जारी की जाएगी।

उद्योग जानकारों का मानना है कि इन कड़े नियमों से बाजार से घटिया और असुरक्षित किट वाली लोकल ई-साइकिलों का सफाया होगा और उपभोक्ताओं को अंतरराष्ट्रीय स्तर की मजबूत, टिकाऊ और सुरक्षित इलेक्ट्रिक साइकिलें मिल सकेंगी। वहीं, प्रमाणीकरण और बेहतर सेफ्टी कंपोनेंट्स के इस्तेमाल से ई-साइकिल की कीमतों में शुरुआती तौर पर मामूली बढ़ोतरी हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक तौर पर यह कदम भारत में टिकाऊ और सुरक्षित माइक्रो-मोबिलिटी को नई ऊंचाई देगा।

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