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Ukraine War: ‘पोर्न इंडस्ट्री लीगल कर दो, मिलेंगे 30 हजार ड्रोन खरीदने लायक टैक्स’, जंग के बीच यूक्रेनी सांसद का संसद में अनोखा प्रस्ताव

रूस और यूक्रेन के बीच चल रहे खूनी संघर्ष को चार साल से अधिक का समय बीत चुका है, जिसके चलते यूक्रेन की अर्थव्यवस्था गंभीर दबाव और भारी मंदी के दौर से गुजर रही है। रक्षा बजट और हथियारों की खरीद के लिए लगातार विदेशी वित्तीय मदद पर निर्भर रहने वाले यूक्रेन के सामने अब अपनी सेना को आधुनिक साजो-सामान मुहैया कराने की बहुत बड़ी चुनौती खड़ी हो गई है। ऐसे विकट आर्थिक हालात के बीच यूक्रेन की संसद में एक ऐसा प्रस्ताव पेश किया गया है, जिसने पूरी दुनिया का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। यूक्रेनी संसद (वेरखोवना राडा) की वित्त समिति के अध्यक्ष और प्रमुख सांसद यारोस्लाव जेलेजनियाक ने देश में एडल्ट कंटेंट और पोर्नोग्राफी इंडस्ट्री को कानूनी मान्यता देने की वकालत की है।

सांसद यारोस्लाव जेलेजनियाक का तर्क है कि इस समय देश अस्तित्व की लड़ाई लड़ रहा है और सरकार को राजस्व जुटाने के हर व्यावहारिक साधन पर विचार करना चाहिए। उन्होंने दावा किया कि यदि यूक्रेन में पोर्नोग्राफिक इंडस्ट्री को कानूनी मान्यता देकर इसे टैक्स के दायरे में लाया जाए, तो सरकारी खजाने में सालाना कम से कम 2.5 करोड़ डॉलर (लगभग 210 करोड़ रुपये) का भारी-भरकम टैक्स एकत्र हो सकता है। सांसद के अनुसार, यह रकम इतनी बड़ी है कि इससे यूक्रेन की सेना के लिए रूस के खिलाफ फ्रंटलाइन पर तैनात करने हेतु करीब 30 हजार अत्याधुनिक लड़ाकू और निगरानी ड्रोन आसानी से खरीदे जा सकते हैं।

मौजूदा कानून और विसंगतियां: बैन के बावजूद फल-फूल रहा है एडल्ट कंटेंट का बाजार

यूक्रेन में वर्तमान कानूनी ढांचे के तहत पोर्नोग्राफी का निर्माण, वितरण, प्रसारण और मार्केटिंग पूरी तरह से गैरकानूनी है। देश के मौजूदा आपराधिक कानून के तहत ऐसा करते हुए पकड़े जाने पर आरोपी को सात साल तक के कठोर कारावास और भारी जुर्माने का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि, जमीन पर हकीकत इससे बिल्कुल उलट है। सख्त प्रतिबंधों के बावजूद यूक्रेन में पिछले कुछ वर्षों में एडल्ट एंटरटेनमेंट और ऑनलाइन कंटेंट का बाजार बहुत तेजी से बढ़ा है। कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया रिपोर्ट्स और वॉल स्ट्रीट जर्नल के खुलासे के अनुसार, यूक्रेन के हजारों नागरिक विभिन्न अंतरराष्ट्रीय सब्सक्रिप्शन प्लेटफॉर्म्स, विशेष रूप से ओनलीफैंस (OnlyFans) पर सक्रिय रूप से काम कर रहे हैं।

यह पूरी इंडस्ट्री कानून के साए में छिपकर और कथित तौर पर कुछ भ्रष्ट स्थानीय अधिकारियों की अनदेखी के चलते चल रही है। जब कभी पुलिस द्वारा छापे मारे जाते हैं, तो क्रिएटर्स पर भारी जुर्माना लगाकर केस को दबा दिया जाता है या वे कानूनी शिकंजे में फंस जाते हैं। सांसद जेलेजनियाक का कहना है कि यह एक बड़ी विडंबना है कि एक तरफ इन कलाकारों का काम कानूनी रूप से प्रतिबंधित है, लेकिन दूसरी तरफ सरकार उनकी कमाई पर टैक्स वसूलने की कोशिश भी करती है। इसी कानूनी विरोधाभास को खत्म करने के लिए इस पूरे कारोबार को पारदर्शी और वैध बनाना समय की मांग बन चुका है।

30 हजार ड्रोन की रणनीति: आधुनिक युद्ध में क्यों महत्वपूर्ण है मानवरहित तकनीक

रूस-यूक्रेन युद्ध ने पूरी दुनिया को यह दिखा दिया है कि 21वीं सदी का युद्ध तोपों और लड़ाकू विमानों से ज्यादा छोटे, सस्ते और सटीक फर्स्ट-पर्सन व्यू (FPV) ड्रोनों पर निर्भर हो चुका है। यूक्रेन ने अग्रिम मोर्चों पर रूसी टैंकों, बख्तरबंद वाहनों और पैदल सेना को रोकने के लिए लाखों ड्रोनों का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया है। यूक्रेनी सेना की ड्रोन क्षमता ही उसकी रक्षा पंक्ति की रीढ़ बनी हुई है। पश्चिमी देशों से मिलने वाली सैन्य सहायता में हो रही देरी और अनिश्चितता के कारण यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की ने घरेलू स्तर पर भारी संख्या में ड्रोन उत्पादन का लक्ष्य रखा है।

सांसद जेलेजनियाक का कहना है कि जब देश को अपनी संप्रभुता और सीमाओं की रक्षा के लिए हथियारों की सबसे ज्यादा जरूरत है, तब देश के भीतर मौजूद एक विशाल अघोषित अर्थव्यवस्था को यूं ही नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। 30,000 ड्रोन किसी भी युद्धक्षेत्र में रणनीतिक संतुलन बदलने की ताकत रखते हैं। यदि केवल एक सेक्टर को वैध घोषित करने से देश की सेना को लाखों डॉलर के नए हथियार मिल सकते हैं, तो इसमें कोई हिचकिचाहट नहीं होनी चाहिए। इस तर्क ने युद्धग्रस्त यूक्रेन के रणनीतिकारों और रक्षा विशेषज्ञों के बीच भी एक नई बहस को जन्म दे दिया है।

कंटेंट क्रिएटर्स की कानूनी दुविधा: टैक्स भरें तो जेल, न भरें तो अपराध

इस पूरे विवाद में यूक्रेनी एडल्ट कंटेंट क्रिएटर्स की स्थिति बेहद अजीबोगरीब बनी हुई है। यूक्रेन के टैक्स विभाग के पास मौजूद आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, केवल ओनलीफैंस प्लेटफॉर्म के जरिए हजारों यूक्रेनी नागरिक हर साल करोड़ों डॉलर की विदेशी मुद्रा कमाते हैं। टैक्स विभाग चाहता है कि ये नागरिक अपनी विदेशी आय घोषित करें और उस पर नियमानुसार आयकर चुकाएं। लेकिन जैसे ही कोई क्रिएटर अपनी कमाई को एडल्ट कंटेंट निर्माण से जुड़ी आय के रूप में दिखाता है, कानून प्रवर्तन एजेंसियां उस पर अश्लीलता विरोधी कानूनों के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कर देती हैं।

यूक्रेन की जानी-मानी टैक्स वकील लेसिया मायखालेंको, जो 100 से अधिक कंटेंट क्रिएटर्स का कानूनी प्रतिनिधित्व कर चुकी हैं, ने भी इस मुद्दे पर खुलकर आवाज उठाई है। उनका कहना है कि जब देश युद्ध के नाजुक दौर में है, तब पुलिस और अदालतों के संसाधनों को ऐसे क्रिएटर्स पर मुकदमे चलाने में बर्बाद करना सरकारी धन का भारी दुरुपयोग है। हाल ही में ड्वोर्निकोवा नामक एक महिला क्रिएटर ने भारी टैक्स जमा करने के बावजूद पुलिसिया कार्रवाई का सामना करने पर राष्ट्रपति जेलेंस्की के कार्यालय में ऑनलाइन याचिका दायर की थी। इस याचिका को 25,000 से अधिक नागरिकों का समर्थन मिला, जिसने सरकार को इस कानून पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर किया है।

संसद में बिल पर विचार और राष्ट्रपति जेलेंस्की का रुख: क्या बदलेगा कानून?

यूक्रेनी समाज में पारंपरिक और धार्मिक मान्यताओं के चलते एडल्ट इंडस्ट्री को वैधता देने का मुद्दा हमेशा से एक संवेदनशील विषय रहा है। हालांकि, लंबे खिंचते युद्ध और खाली होते सरकारी खजाने ने इस सामाजिक वर्जना को तोड़कर इसे आर्थिक वास्तविकता बना दिया है। संसद में पेश किए गए इस बिल में केवल सहमति से काम करने वाले वयस्कों द्वारा बनाए गए डिजिटल कंटेंट को अपराध की श्रेणी से बाहर करने का प्रावधान किया गया है। बच्चों के शोषण, मानव तस्करी या बिना सहमति के बनाए जाने वाले किसी भी प्रकार के आपत्तिजनक कंटेंट पर पूर्ववत सख्त प्रतिबंध और दंडात्मक कार्रवाई जारी रहेगी।

राष्ट्रपति वोलोदिमीर जेलेंस्की के कार्यालय ने भी यह संकेत दिया है कि संसद इस प्रस्ताव पर विचार-विमर्श कर सकती है। यदि यूक्रेनी संसद इस बिल को अंतिम रूप से मंजूरी दे देती है, तो यूक्रेन पूर्वी यूरोप का ऐसा पहला देश बन जाएगा जिसने युद्ध की जरूरतों को पूरा करने और हथियार खरीदने के लिए एडल्ट फिल्म उद्योग को आधिकारिक तौर पर टैक्स व्यवस्था में शामिल किया हो। विश्लेषकों का मानना है कि यह फैसला न केवल यूक्रेन की अर्थव्यवस्था में अरबों रुपये का नया राजस्व जोड़ेगा, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर युद्धकालीन राजस्व नीतियों का एक नया उदाहरण भी पेश करेगा।

 

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