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UPTET रिजल्ट और आंसर की विवाद पर नया नोटिस जारी: अभ्यर्थियों की उम्मीदों को झटका

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) के परिणामों और उत्तरकुंजी को लेकर राज्यभर के लाखों बीएड और बीटीसी डिग्री धारक अभ्यर्थियों के लिए एक बेहद महत्वपूर्ण और बड़ी खबर सामने आ रही है। उत्तर प्रदेश परीक्षा नियामक प्राधिकारी (PNP) ने UPTET के संशोधित रिजल्ट, ओएमआर शीट (OMR Sheet) के मूल्यांकन और नॉर्मलाइजेशन (Normalization) की प्रक्रिया को लेकर एक नया और आधिकारिक नोटिस जारी कर दिया है। इस परीक्षा में शामिल होने वाले लाखों युवा लंबे समय से परिणामों में संशोधन, गलत प्रश्नों के बोनस अंक और पारदर्शी मूल्यांकन प्रणाली की मांग को लेकर लगातार प्रदर्शन और कानूनी लड़ाई लड़ रहे थे। लेकिन प्राधिकारी द्वारा जारी किए गए इस ताज़ा नोटिस ने कई उम्मीदवारों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है, क्योंकि बोर्ड ने छात्रों द्वारा उठाई गई कई प्रमुख मांगों को सिरे से खारिज करते हुए सिर्फ एक मांग पर अपनी सहमति जताई है। इस खबर के सामने आने के बाद से सोशल मीडिया और विभिन्न छात्र संगठनों के बीच तीखी प्रतिक्रियाएं देखने को मिल रही हैं, और हर कोई यह जानना चाहता है कि आखिर बोर्ड ने कौन सी एकमात्र मांग को स्वीकार किया है और किन महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी स्थिति पूरी तरह स्पष्ट कर दी है।

छात्रों की लंबी फेरिहरत में से सिर्फ 1 मांग स्वीकार: परीक्षा नियामक प्राधिकारी का सख्त रुख

प्राप्त जानकारी के अनुसार, उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा के लिए आंदोलनरत अभ्यर्थियों और विभिन्न छात्र संगठनों ने परीक्षा नियामक प्राधिकारी के सामने कई सूत्रीय मांगपत्र सौंपा था। इनमें प्रमुख रूप से गलत प्रश्नों के कॉमन मार्क्स सभी को देने, ओएमआर शीट की कार्बन कॉपी की जांच में पारदर्शिता बरतने, नॉर्मलाइजेशन के फार्मूले को सार्वजनिक करने और रिजल्ट में व्यापक स्तर पर संशोधन करने जैसी मांगें शामिल थीं। लेकिन हाल ही में जारी किए गए नए नोटिस में प्राधिकारी ने स्पष्ट कर दिया है कि वे नियमों और बोर्ड की निर्धारित गाइडलाइन के दायरे से बाहर जाकर कोई भी बड़ा बदलाव करने में असमर्थ हैं। बोर्ड ने अभ्यर्थियों की लंबी चौड़ी मांगों में से केवल एक ही मांग को आंशिक रूप से या प्रक्रियागत रूप से स्वीकार किया है, जबकि बाकी तमाम बिंदुओं पर पुराने रुख को ही बरकरार रखा है। प्राधिकारी का यह कड़ा रवैया उनतमाम युवाओं के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है जो इस उम्मीद में बैठे थे कि संशोधित रिजल्ट में उनके अंकों में भारी फेरबदल हो सकता है और वे परीक्षा पास करने की पात्रता हासिल कर लेंगे। शिक्षा जगत के जानकारों का कहना है कि इस तरह के प्रशासनिक फैसलों से छात्रों में असंतोष की भावना बढ़ना स्वाभाविक है, जो आगे चलकर कानूनी मामलों को और अधिक लंबा खींच सकता है।

OMR शीट के मूल्यांकन और री-चेकिंग को लेकर नोटिस में क्या दी गई है जानकारी?

परीक्षा में धांधली और गलत मूल्यांकन के आरोपों के बीच ओएमआर शीट (OMR Sheet) की सुरक्षा और री-चेकिंग का मुद्दा हमेशा से बेहद संवेदनशील रहा है। UPTET के इस नए नोटिस में परीक्षा नियामक प्राधिकारी ने स्पष्ट रूप से बताया है कि ओएमआर शीट के मूल्यांकन की पूरी प्रक्रिया कंप्यूटर आधारित ऑप्टिकल मार्क रिकग्निशन (OMR) तकनीक के जरिए पूरी पारदर्शिता के साथ की गई है, और इसमें किसी भी प्रकार की मानवीय त्रुटि या छेड़छाड़ की कोई गुंजाइश नहीं है। जिन अभ्यर्थियों ने यह मांग उठाई थी कि उनकी ओएमआर शीट की दोबारा मैनुअल या विशेष जांच कराई जाए, बोर्ड ने तकनीकी नियमों का हवाला देते हुए उस मांग को खारिज कर दिया है। नोटिस में यह भी उल्लेख किया गया है कि मूल्यांकन नियमावली के अनुसार ओएमआर शीट के बंडल और रिकॉर्ड को संरक्षित रखने की एक निश्चित समयावधि होती है, और उसी के तहत सारी प्रक्रियाएं संचालित की जा रही हैं। छात्रों का एक बड़ा वर्ग इस बात से बेहद नाराज है कि उन्हें अपनी ओएमआर शीट के मिलान का उचित अवसर या संतोषजनक जवाब नहीं मिल पा रहा है, जिससे परीक्षा की शुचिता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

नॉर्मलाइजेशन (Normalization) प्रक्रिया पर असमंजस बरकरार: बोर्ड ने साफ की अपनी स्थिति

उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा या अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं में जब परीक्षाएं अलग-अलग पालियों (Shifts) या चरणों में आयोजित की जाती हैं, तब नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया का उपयोग अंकों के संतुलन के लिए किया जाता है। UPTET परीक्षा के इस नए नोटिस में नॉर्मलाइजेशन और मार्किंग स्कीम को लेकर भी स्थिति को काफी हद तक स्पष्ट करने का प्रयास किया गया है। प्राधिकारी ने बताया है कि परीक्षा के नियमों और पाठ्यक्रम के अनुसार ही कॉपियों का मूल्यांकन और स्कोर कार्ड तैयार किए गए हैं। जिन छात्रों को यह आशंका थी कि नॉर्मलाइजेशन की प्रक्रिया में उनके अंक बेवजह काट दिए गए हैं या उन्हें नुकसान पहुंचाया गया है, बोर्ड के इस स्पष्टीकरण के बाद उनकी उन उम्मीदों को झटका लगा है कि स्कोर में कोई व्यापक सुधार होगा। जानकारों का मानना है कि परीक्षा बोर्ड और छात्रों के बीच संवाद की कमी के कारण अक्सर इस तरह के भ्रम की स्थिति पैदा होती है, जिसे समय रहते दूर किया जाना चाहिए था। अब जबकि नया नोटिस जारी हो चुका है, तो यह लगभग तय माना जा रहा है कि परीक्षा परिणामों में किसी बड़े फेरबदल की गुंजाइश अब शेष नहीं बची है, जिससे असफल हुए अभ्यर्थियों को एक बार फिर से निराशा का सामना करना पड़ रहा है।

UPTET अभ्यर्थियों के सामने अब आगे क्या विकल्प हैं? कानूनी और प्रशासनिक पहलुओं पर नजर

परीक्षा नियामक प्राधिकारी द्वारा नया नोटिस जारी किए जाने और केवल एक मांग माने जाने के बाद अब UPTET के हजारों अभ्यर्थियों के सामने आगे की राह काफी कठिन नजर आ रही है। जो युवा इस परीक्षा को पास करने के करीब थे या जिन्हें अपने नंबरों को लेकर गंभीर आपत्तियां थीं, वे अब कानूनी सलाहकारों और उच्च न्यायालय (High Court) के वकीलों के संपर्क में हैं ताकि इस मामले में आगे की कानूनी लड़ाई लड़ी जा सके। कई छात्र संगठनों का कहना है कि वे इस एकतरफा फैसले के खिलाफ प्रशासनिक अधिकारियों से दोबारा मुलाकात करेंगे और जरूरत पड़ी तो न्यायालय में रिट याचिका दायर करेंगे। शिक्षक भर्ती और पात्रता परीक्षाओं से जुड़ा यह मामला उत्तर प्रदेश की राजनीति और शिक्षा व्यवस्था में एक बार फिर से गर्म मुद्दा बनता जा रहा है। आने वाले दिनों में यह देखना बेहद दिलचस्प होगा कि क्या सरकार या परीक्षा बोर्ड छात्रों के बढ़ते दबाव के आगे झुकते हुए कोई बीच का रास्ता निकालता है या फिर यह विवाद अदालतों की फाइलों में ही उलझकर रह जाता है। फिलहाल, इस नए नोटिस ने UPTET परिणाम का इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों की धड़कनों को और अधिक बढ़ा दिया है।

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