हॉर्मुज जलडमरूमध्य में भारत का दबदबा 8 भारतीय जहाजों ने पार किया दुनिया का सबसे खतरनाक समुद्री रास्ता

News India Live, Digital Desk: पश्चिम एशिया में जारी भीषण युद्ध और तनाव के बीच भारत ने अपनी ऊर्जा सुरक्षा को लेकर एक बड़ी कूटनीतिक और रणनीतिक जीत हासिल की है। दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ते, हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पार करने वाले देशों में भारत सबसे आगे निकल गया है। हालिया रिपोर्टों के अनुसार, अब तक कुल 8 भारतीय टैंकर इस खतरनाक रास्ते को सुरक्षित पार कर चुके हैं, जो किसी भी अन्य देश की तुलना में सबसे अधिक है। यह भारत की मजबूत विदेश नीति और ईरान के साथ बेहतर तालमेल का ही नतीजा है कि युद्ध के माहौल में भी भारत की गैस और तेल आपूर्ति निर्बाध रूप से जारी है।ईरान का ‘दोस्त’ भारत: सुरक्षित हाथों में है तिरंगाईरान और इजरायल-अमेरिका के बीच जारी संघर्ष के कारण हॉर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों की आवाजाही लगभग ठप है, लेकिन भारत के लिए रास्ते खुले हुए हैं। ईरान ने भारत को उन ‘पसंदीदा देशों’ की सूची में रखा है जिनके जहाजों को वह सुरक्षित रास्ता दे रहा है। ईरान के दूतावास ने सोशल मीडिया पर स्पष्ट संदेश दिया है कि “हमारे भारतीय दोस्त सुरक्षित हाथों में हैं, चिंता की कोई बात नहीं है।” इसी भरोसे के दम पर शिवालिक, नंदा देवी, जग लाडकी और ग्रीन सांवरी जैसे विशालकाय टैंकर लाखों मीट्रिक टन एलपीजी और कच्चा तेल लेकर भारतीय बंदरगाहों पर पहुंच रहे हैं।18 भारतीय जहाज और 485 नाविकों पर पैनी नजरभले ही 8 जहाज सुरक्षित निकल आए हों, लेकिन सरकार अभी भी कोई ढिलाई नहीं बरत रही है। पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में करीब 18 भारतीय झंडे वाले जहाज और 485 नाविक पश्चिमी फारस की खाड़ी क्षेत्र में मौजूद हैं। भारतीय नौसेना और कोस्ट गार्ड के साथ मिलकर इन जहाजों की मूवमेंट को हर सेकंड ट्रैक किया जा रहा है। मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मुकेश मंगल ने पुष्टि की है कि सभी भारतीय नाविक सुरक्षित हैं और उनकी सुरक्षा के लिए हर संभव कदम उठाए जा रहे हैं।चीन और रूस को पछाड़कर भारत बना नंबर वनहॉर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले जहाजों के आंकड़ों ने वैश्विक स्तर पर भारत का कद बढ़ा दिया है। जहां चीन और रूस जैसे देश भी अपने जहाजों को लेकर फूंक-फूंक कर कदम रख रहे हैं, वहीं भारत ने सबसे अधिक सफल ट्रांजिट (8 जहाज) दर्ज कर मिसाल पेश की है। यह न केवल घरेलू बाजार में रसोई गैस (LPG) और पेट्रोल की कीमतों को स्थिर रखने में मदद करेगा, बल्कि वैश्विक मंच पर भारत की ‘सॉफ्ट पावर’ और रणनीतिक पहुंच को भी साबित करता है।