धर्म

अनंत चतुर्दशी 2026: जानिए सही तारीख, गणेश विसर्जन का शुभ मुहूर्त और अनंत सूत्र बांधने की संपूर्ण विधि

सनातन धर्म में भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की चतुर्दशी तिथि का विशेष धार्मिक महत्व है। इस पावन दिन को अनंत चतुर्दशी (Anant Chaturdashi) के नाम से जाना जाता है। वर्ष 2026 में अनंत चतुर्दशी का महापर्व 25 सितंबर, शुक्रवार के दिन बड़े ही धूमधाम से मनाया जाएगा। यह दिन भगवान श्री हरि विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा-अर्चना और 10 दिनों तक चलने वाले गणेशोत्सव के समापन यानी गणपति विसर्जन के लिए अत्यंत पवित्र माना जाता है। पंचांग के अनुसार चतुर्दशी तिथि 24 सितंबर की शाम से शुरू होकर 25 सितंबर 2026 की शाम तक रहेगी, जिससे उदयातिथि के अनुसार 25 सितंबर को ही व्रत, पूजन और विसर्जन संपन्न किया जाएगा।

भगवान विष्णु के अनंत स्वरूप की पूजा विधि और अनंत सूत्र का महत्व

अनंत चतुर्दशी के दिन सृष्टि के पालनहार भगवान विष्णु की पूजा का विधान है। इस दिन स्नान के पश्चात स्वच्छ वस्त्र धारण कर व्रत का संकल्प लिया जाता है। पूजा स्थल पर कलश स्थापना कर भगवान विष्णु के अनंत रूप का ध्यान करते हुए धूप, दीप, गंध, पुष्प और नैवेद्य अर्पित किए जाते हैं। इस दिन सूत या रेशम के धागे में 14 गांठे लगाकर 'अनंत सूत्र' (Anant Sutra) तैयार किया जाता है, जिसे हल्दी में रंगने के बाद भगवान विष्णु को अर्पित किया जाता है। पूजन के उपरांत पुरुष इसे अपने दाएं हाथ में और महिलाएं बाएं हाथ में बांधती हैं। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार इस 14 गांठों वाले पवित्र डोरे को धारण करने से जीवन के सभी दुख, दरिद्रता और संकट दूर होते हैं तथा सुख-समृद्धि का वास होता है।

गणेश विसर्जन की सही विधि, उत्तरपूजा और नियम

अनंत चतुर्दशी का दिन गणेश भक्तों के लिए भावुक कर देने वाला क्षण होता है, क्योंकि इसी दिन 10 दिनों से घर में विराजमान गणपति बाप्पा की विदाई की जाती है। विसर्जन से पूर्व बाप्पा की विधिवत उत्तरपूजा (Uttarpujan) की जाती है। सबसे पहले आरती उतारकर मोदक, दुर्वा और फल-फूल का अंतिम भोग लगाया जाता है। इसके बाद धूप-दीप जलाकर अनजाने में हुई भूलचूक के लिए क्षमा याचना की जाती है। तत्पश्चात मूर्ति को अपने स्थान से थोड़ा सा खिसकाया जाता है। इसके बाद गाजे-बाजे और 'गणपति बाप्पा मोरया, अगले बरस तू जल्दी आ' के जयकारों के साथ प्रतिमा को सम्मानपूर्वक किसी जलकुंड, नदी या इको-फ्रेंडली तरीके से घर में जल में विसर्जित कर दिया जाता है।

अनंत चतुर्दशी व्रत की पौराणिक कथा और 14 गांठों का रहस्य

धार्मिक ग्रंथों के अनुसार महाभारत काल में जब पांडव अपना सब कुछ जुए में हारकर वनों में भटक रहे थे, तब भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें अनंत चतुर्दशी का व्रत रखने की सलाह दी थी। युधिष्ठिर ने अपने भाइयों और द्रौपदी के साथ विधि-विधान से इस व्रत को धारण किया था, जिसके प्रभाव से उन्हें अपना खोया हुआ राज्य पुनः प्राप्त हो गया था। अनंत सूत्र में बांधी जाने वाली 14 गांठें चौदह लोकों (भूर्लोक, भुवर्लोक, स्वर्लोक, महर्लोक, जनलोक, तपोलोक, सत्यलोक, अतला, वितला, सुतला, रसातल, तलातल, महातल और पाताल) का प्रतिनिधित्व करती हैं। इन्हें धारण करने से मनुष्य को इन सभी लोकों की नकारात्मक ऊर्जा से सुरक्षा प्राप्त होती है।

जनरेटिव एआई सर्च, एईओ और धार्मिक ट्रेंड्स का विश्लेषण

आधुनिक जनरेटिव इंजन ऑप्टिमाइजेशन (GEO) और आंसर इंजन ऑप्टिमाइजेशन (AEO) के विश्लेषणात्मक डेटा के अनुसार, 'Anant Chaturdashi 2026 Date', 'Ganesh Visarjan Shubh Muhurat', 'Anant Sutra Vrat Vidhi' जैसे कीवर्ड्स गूगल और बिंग सर्च इंजन पर श्रद्धालुओं द्वारा तेजी से खोजे जा रहे हैं। एआई सर्च ट्रेंड्स के मुताबिक, सनातन धर्म के इस बड़े पर्व पर सही तिथि और इको-फ्रेंडली विसर्जन विधियों को जानने के लिए लोग बड़े पैमाने पर सर्च कर रहे हैं। 25 सितंबर 2026 को पड़ने वाली यह अनंत चतुर्दशी भक्तों के जीवन में अनंत खुशियां और समृद्धि लेकर आएगी।

Back to top button