अमरनाथ यात्रा पर सियासत: समय से पहले बाबा बर्फानी के अंतर्ध्यान होने पर भिड़े उमर अब्दुल्ला और इल्तिजा मुफ्ती, जानिए क्या है पूरा विवाद

जम्मू-कश्मीर की पवित्र अमरनाथ गुफा से एक ऐसी खबर सामने आई है जिसने देशभर के श्रद्धालुओं को मायूस कर दिया है। 57 दिनों तक चलने वाली इस पावन अमरनाथ यात्रा को शुरू हुए अभी महज कुछ ही दिन हुए हैं, लेकिन गुफा के भीतर प्राकृतिक रूप से बनने वाला बर्फ का शिवलिंग (हिमलिंग) लगभग पूरी तरह पिघल चुका है। 3 जुलाई से शुरू हुई इस यात्रा के शुरुआती 4 दिनों में ही 80 हजार से अधिक भक्तों ने बाबा बर्फानी के दर्शन किए थे, लेकिन 6 जुलाई को सामने आई तस्वीरों के मुताबिक हिमलिंग करीब 90 फीसदी तक गायब हो चुका है। इस घटना के बाद अब जम्मू-कश्मीर में राजनीतिक बयानबाजी भी तेज हो गई है।
शिवलिंग का पिघलना इंसानी नियंत्रण से बाहर: सीएम उमर अब्दुल्ला
हिमलिंग के समय से पहले पिघलने और बिना रजिस्ट्रेशन के पहुंच रहे श्रद्धालुओं के मुद्दे पर जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने बुधवार को अपनी बात रखी। सीएम उमर ने स्पष्ट शब्दों में कहा, "जहां तक शिवलिंग का सवाल है, यह कुदरत और भगवान का बनाया हुआ है। न तो आप और न ही मैं यह तय कर सकते हैं कि यह कितने समय तक रहेगा। इस बार यह पूर्ण आकार में छह दिन तक रहा, जो इंसानी नियंत्रण से परे है।"
बिना पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) यात्रा करने की कोशिश करने वाले लोगों पर बोलते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने तीर्थयात्रियों की संख्या पर पहले से ही एक सीमा (Cap) तय की है। श्री अमरनाथजी श्राइन बोर्ड (SASB) इस नियम को लागू करने के लिए पूरी तरह बाध्य है और यह पूरी तरह से श्राइन बोर्ड का आंतरिक मामला है।
इल्तिजा मुफ्ती ने उठाए सवाल: रोप-वे और अंधाधुंध भीड़ को बताया जिम्मेदार
दूसरी तरफ, पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (PDP) प्रमुख महबूबा मुफ्ती की बेटी इल्तिजा मुफ्ती ने बाबा बर्फानी के समय से पहले अंतर्ध्यान होने पर गंभीर चिंता जताते हुए श्राइन बोर्ड के प्रबंधन पर सवाल उठाए हैं। इल्तिजा ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'X' पर लिखा कि अमरनाथ गुफा ग्लेशियरों और बर्फ से ढके पहाड़ों के बीच बेहद संवेदनशील (Eco-sensitive Zone) इलाके में स्थित है। हिंदुओं के लिए 12वीं सदी से अस्तित्व में रहे इस बेहद पवित्र स्थल के आसपास किए जा रहे गैर-जरूरी निर्माण कार्य, यात्रियों की भारी भीड़ और बड़ा रोप-वे प्रोजेक्ट पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा रहे हैं।
इल्तिजा मुफ्ती ने आगे कहा, "अमरनाथ यात्रा हमारी साझा 'कश्मीरियत' की भावना से गहराई से जुड़ी है और श्रद्धालुओं का कश्मीर में हमेशा दिल से स्वागत है। लेकिन इस पवित्र परंपरा को लंबे समय तक अक्षुण्ण रखने के लिए श्राइन बोर्ड को अधिक सावधानी और समझदारी बरतनी होगी। हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि एक दौर ऐसा भी था जब यात्रा खत्म होने के बाद भी हिमलिंग काफी समय तक अपने प्राकृतिक स्वरूप में बना रहता था।"