विदेश

अमेरिका में भारतीय इंजीनियर से बड़ी धोखाधड़ी: ‘1 लाख डॉलर दो वरना H-1B वीजा करा देंगे कैंसिल

 

अमेरिका में मोटी सैलरी और शानदार करियर का सपना लेकर जाने वाले भारतीय टेक प्रोफेशनल्स (IT Workers) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला और परेशान करने वाला मामला सामने आया है। यूएसए की एक कंपनी द्वारा अपने ही एक भारतीय कर्मचारी को एच-1बी (H-1B Visa) स्टेटस बरकरार रखने के बदले एक लाख डॉलर (करीब 83 लाख रुपये से अधिक) की भारी-भरकम रकम देने के लिए मजबूर करने का सनसनीखेज खुलासा हुआ है। कंपनी ने कर्मचारी को साफ तौर पर धमकी दी थी कि अगर उसने यह रकम नहीं चुकाई, तो उसका वीजा तुरंत कैंसिल करवाकर उसे भारत वापस डिपोर्ट करवा दिया जाएगा। इस घटना ने अमेरिकी आईटी सेक्टर और वहां रह रहे भारतीय प्रवासियों के बीच हड़कंप मचा दिया है।

वीजा एक्सटेंशन के नाम पर ब्लैकमेलिंग का गंदा खेल

यह पूरा मामला तब खुलकर सामने आया जब पीड़ित भारतीय नागरिक ने अमेरिकी श्रम विभाग और आव्रजन अधिकारियों से इस मानसिक और आर्थिक उत्पीड़न की शिकायत की। मिली जानकारी के अनुसार, एंप्लॉयर (कंपनी) ने भारतीय वर्कर के एच-1बी वीजा के नवीनीकरण और ग्रीन कार्ड की प्रक्रिया को आगे बढ़ाने का झांसा देकर पहले कई तरह के झूठे एग्रीमेंट साइन करवाए। इसके बाद कंपनी के अधिकारियों ने सीधे तौर पर एक लाख डॉलर की डिमांड रख दी। जब कर्मचारी ने इतनी बड़ी रकम देने में असमर्थता जताई, तो उसे नौकरी से निकालने और उसका लीगल इमिग्रेशन स्टेटस खत्म कराने की सीधी धमकियां दी जाने लगीं।

अमेरिकी प्रशासन का बड़ा एक्शन और सख्त जुर्माना

भारतीय कर्मचारी की इस बहादुरी भरी शिकायत के बाद अमेरिकी फेडरल एजेंसियों और लेबर डिपार्टमेंट (DOL) ने कंपनी के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है। अमेरिकी कानूनों के मुताबिक, एच-1बी वीजा की प्रोसेसिंग और उससे जुड़े कानूनी खर्चों की पूरी जिम्मेदारी एंप्लॉयर की होती है, न कि कर्मचारी की। श्रम विभाग ने इस मामले को गंभीरता से लेते हुए कंपनी को कानून के उल्लंघन का दोषी पाया है। प्रशासन ने न केवल कंपनी पर भारी जुर्माना ठोकने की तैयारी कर ली है, बल्कि पीड़ित भारतीय वर्कर को उसका पूरा बकाया वेतन और मुआवजा दिलाने का भी आदेश जारी किया है। साथ ही ऐसी कंपनियों को भविष्य के लिए ब्लैकलिस्ट करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है।

हैदराबाद, बेंगलुरु से लेकर कैलिफोर्निया तक के टेक गलियारों में मची हलचल

इस बड़ी खबर के आते ही भारत के प्रमुख टेक हब्स जैसे बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और दिल्ली-एनसीआर से लेकर अमेरिका की सिलिकॉन वैली (कैलिफोर्निया) और न्यू जर्सी में काम कर रहे भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स के बीच सुरक्षा और अधिकारों को लेकर चर्चा तेज हो गई है। स्थानीय प्रवासियों और कानूनी जानकारों का कहना है कि कई छोटी और फर्जी कंसल्टेंसी कंपनियां अक्सर भारतीय युवाओं की मजबूरी का फायदा उठाकर इस तरह का शोषण करती हैं। एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि अगर अमेरिका में किसी भी भारतीय नागरिक के साथ वीजा या सैलरी के नाम पर ऐसी ब्लैकमेलिंग होती है, तो वे डरे बिना तुरंत अमेरिकी श्रम विभाग की आधिकारिक वेबसाइट पर अपनी शिकायत दर्ज कराएं ताकि समय रहते उनकी कानूनी सुरक्षा सुनिश्चित की जा सके।

 

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