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ईरान के राष्ट्रपति ने अचानक मिलाया शहबाज शरीफ को फोन हॉर्मुज जलडमरूमध्य और अमेरिका को लेकर हुई गुप्त चर्चा

News India Live, Digital Desk: मध्य पूर्व में इजरायल और ईरान के बीच मचे घमासान के बीच एक बड़ी खबर पड़ोसी देश पाकिस्तान से आ रही है। ईरान के राष्ट्रपति ने पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को फोन कर लंबी बातचीत की है। इस फोन कॉल के बाद अंतरराष्ट्रीय कूटनीति के गलियारों में हलचल तेज हो गई है। सूत्रों की मानें तो इस चर्चा के केंद्र में ‘हॉर्मुज जलडमरूमध्य’ (Strait of Hormuz) और क्षेत्र में अमेरिका का बढ़ता हस्तक्षेप रहा। ईरान अब मुस्लिम देशों को एक मंच पर लाने की कवायद में जुट गया है, जिससे वाशिंगटन की पेशानी पर बल पड़ गए हैं।हॉर्मुज की घेराबंदी और वैश्विक व्यापार पर संकटईरानी राष्ट्रपति ने बातचीत के दौरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य की स्थिति पर विशेष जोर दिया। यह समुद्री रास्ता दुनिया की तेल आपूर्ति के लिए जीवन रेखा माना जाता है। ईरान ने संकेत दिए हैं कि यदि अमेरिका या उसके सहयोगियों ने कोई हिमाकत की, तो वह इस रास्ते को बंद करने से पीछे नहीं हटेगा। पाकिस्तान जैसे पड़ोसी देश को विश्वास में लेना ईरान की उस रणनीति का हिस्सा है, जिसके तहत वह युद्ध की स्थिति में क्षेत्रीय समर्थन जुटाना चाहता है।अमेरिका की धमकियों के खिलाफ एकजुटता की अपीलईरान और पाकिस्तान के बीच यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब अमेरिका लगातार ईरान पर नए प्रतिबंध लगाने की धमकी दे रहा है। ईरानी राष्ट्रपति ने शहबाज शरीफ से कहा कि बाहरी ताकतों का दखल केवल मुस्लिम देशों को नुकसान पहुंचा रहा है। उन्होंने इजरायल के खिलाफ और फिलिस्तीन के समर्थन में एक मजबूत इस्लामिक फ्रंट बनाने की वकालत की। वहीं, आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान के लिए यह ‘इधर कुआं उधर खाई’ जैसी स्थिति है, क्योंकि उसे अमेरिका और ईरान दोनों के साथ संतुलन साधना है।क्या पाकिस्तान बनेगा ईरान का नया मददगार?विशेषज्ञों का मानना है कि ईरान अब पाकिस्तान के साथ अपने रक्षा और व्यापारिक रिश्तों को नए सिरे से परिभाषित करना चाहता है। बातचीत में सीमा पार सुरक्षा और ‘गैस पाइपलाइन’ जैसे पुराने अटके हुए मुद्दों पर भी चर्चा हुई। हालांकि, बड़ा सवाल यह है कि क्या पाकिस्तान अमेरिका को नाराज कर ईरान के पाले में खड़ा होने का जोखिम उठाएगा? शहबाज शरीफ ने शांति और बातचीत का राग तो अलापा है, लेकिन ईरान की इस ‘पहल’ ने पाकिस्तान की विदेश नीति की कठिन परीक्षा शुरू कर दी है।गाजा संकट और इजरायल पर तीखे प्रहारदोनों नेताओं के बीच बातचीत का एक बड़ा हिस्सा गाजा में जारी मानवीय संकट पर केंद्रित रहा। ईरान ने पाकिस्तान से आग्रह किया कि वह अंतरराष्ट्रीय मंचों पर इजरायल के खिलाफ अधिक आक्रामक रुख अपनाए। ईरान चाहता है कि पाकिस्तान अपनी सैन्य शक्ति और इस्लामिक जगत में अपने रसूख का इस्तेमाल कर इजरायल पर दबाव बनाए। इस कॉल के बाद अब पूरी दुनिया की नजरें इस्लामाबाद के अगले कदम पर टिकी हैं।

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