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‘ऑपरेशन सिंदूर’ पर इमरान खान की बहन का सनसनीखेज दावा, इजरायल को मान्यता देने की शर्त पर रुकी थी जंग

भारत और पाकिस्तान के बीच हाल ही में हुए भीषण सैन्य टकराव और भारतीय सेना के गुप्त 'ऑपरेशन सिंदूर' (Operation Sindhoor) को लेकर एक बेहद चौंकाने वाला अंतरराष्ट्रीय खुलासा सामने आया है। पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की सगी बहन नूरीन नियाजी (Noureen Niazi) ने एक इंटरव्यू के दौरान पाकिस्तानी सैन्य प्रतिष्ठान और शहबाज शरीफ सरकार पर देश की संप्रभुता को गिरवी रखने का बेहद गंभीर आरोप लगाया है। नूरीन नियाजी का दावा है कि भारतीय वायुसेना और थलसेना के भीषण मिसाइल व ड्रोन हमलों के सामने पाकिस्तानी फौज पूरी तरह पस्त हो चुकी थी और भारत की आक्रामक सैन्य कार्रवाई को रुकवाने के लिए पाकिस्तान का शीर्ष नेतृत्व गिड़गिड़ाते हुए वैश्विक शक्तियों के पास पहुंचा था। भारत के खौफ से बौखलाया रावलपिंडी का सैन्य मुख्यालय युद्ध रोकने के एवज में इजरायल को एक संप्रभु देश के रूप में मान्यता देने तक के लिए राजी हो गया था।

रावलपिंडी मुख्यालय में मची थी हड़बड़ी: पाकिस्तान का 'मारका-ए-हक' अभियान हुआ था पूरी तरह फेल

नूरीन नियाजी ने पाकिस्तान के आंतरिक हालातों पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि भारतीय सेना के विनाशकारी हमलों के सामने पाकिस्तानी फौजी ताकतों की हालत बद से बदतर हो गई थी। पाकिस्तान ने अपनी तरफ से भारतीय जवाबी कार्रवाई को रोकने की हरसंभव कोशिश की, लेकिन वे हर मोर्चे पर नाकाम रहे। पाकिस्तानी सेना इस भारी दबाव को संभालने में पूरी तरह विफल साबित हुई। स्थिति यह थी कि रावलपिंडी स्थित पाकिस्तानी सैन्य मुख्यालय (GHQ) में पूरी तरह अफरा-तफरी और हड़बड़ी का माहौल था। जिस सैन्य अभियान को पाकिस्तानी जनरलों ने बड़े तामझाम के साथ ‘मारका-ए-हक’ (Maarka-e-Haq) के नाम से शुरू किया था, वह भारतीय मिसाइलों की गड़गड़ाहट के बीच ताश के पत्तों की तरह ढह गया। इसके बाद लाचार होकर पाकिस्तानी नेतृत्व ने अंतर्राष्ट्रीय समुदाय और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) प्रशासन के सामने भारत के साथ किसी भी तरह समझौता कराने की गुहार लगाई।

डोनाल्ड ट्रंप की वो सीक्रेट शर्त: इजरायल को मान्यता और अब्राहम अकोर्ड पर झुक गया था पाकिस्तान

इमरान खान की बहन के मुताबिक, अमेरिका के नवनिर्वाचित राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप शुरुआत में इस दक्षिण एशियाई सैन्य संघर्ष से दूरी बनाए हुए थे, लेकिन पाकिस्तान की लाचारी देखकर वे मध्यस्थता के लिए तैयार हुए, जिसके पीछे एक बड़ी अंतरराष्ट्रीय कूटनीतिक शर्त थी। चूंकि भारत के इजरायल (Israel) के साथ बेहद मजबूत और रणनीतिक संबंध हैं, इसलिए ट्रंप प्रशासन ने पाकिस्तान के सामने इजरायल को आधिकारिक मान्यता देने और ऐतिहासिक 'अब्राहम अकोर्ड' (Abraham Accords) में शामिल होने की कड़ी शर्त रख दी। भारतीय हमलों की तीव्रता और तबाही से बुरी तरह डरे सेना प्रमुख जनरल आसिम मुनीर (General Asim Munir) और प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ इस शर्त को मानने के लिए तुरंत तैयार हो गए। दूसरी ओर, भारत ने भी दक्षिण एशिया में अपनी रणनीतिक बढ़त और शक्ति संतुलन (Power Balance) को मजबूत होते देख हमलों की गति को नियंत्रित किया।

नूर खान एयरबेस की तबाही छिपाई: आवाम को जीत की झूठी कहानियां सुना रहे हैं आसिम मुनीर और शहबाज

नूरीन नियाजी ने आरोप लगाया कि युद्ध विराम होते ही सेना प्रमुख आसिम मुनीर और पीएम शहबाज शरीफ (Shehbaz Sharif) ने अपनी गर्दन बचाने के लिए पाकिस्तानी जनता के बीच इसे अपनी 'झूठी जीत' बताकर प्रचारित करना शुरू कर दिया। सैन्य प्रशासन का प्लान था कि इस तथाकथित जीत के जश्न की आड़ में इजरायल को मान्यता देने के फैसले से देश के भीतर उठने वाले संभावित जन-आक्रोश और मजहबी गुस्से को आसानी से दबा दिया जाएगा। हालांकि, इससे पहले कि पाकिस्तान इस सीक्रेट डील को सार्वजनिक करता, पश्चिम एशिया में ईरान का नया मोर्चा खुल गया और यह मुद्दा ठंडे बस्ते में चला गया। खुफिया अधिकारियों के अनुसार, नूरीन नियाजी का यह बयान कोई साधारण राजनीतिक आरोप नहीं है, बल्कि यह परोक्ष रूप से भारतीय सेना के 'ऑपरेशन सिंदूर' की 100% सफलता की पुष्टि करता है।

क्या था भारतीय सेना का 'ऑपरेशन सिंदूर': 9 आतंकी कैंपों को नेस्तनाबूद कर नूर खान एयरबेस को किया था टारगेट

गौरलतब है कि जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए कायरतापूर्ण आतंकवादी हमले (Pahalgham Terror Attack) का करारा बदला लेने के लिए भारतीय सशस्त्र बलों ने 'ऑपरेशन सिंदूर' लॉन्च किया था। इस हाई-प्रिसिजन ऑपरेशन के तहत भारतीय वायुसेना और मिसाइल रेजिमेंट ने पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में सक्रिय करीब 9 प्रमुख लॉन्च पैड और आतंकवादी कैंपों को पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया था। इसके जवाब में जब पाकिस्तान की एयरफोर्स ने भारतीय हवाई क्षेत्र का उल्लंघन करने की कोशिश की, तो भारत के आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम (Air Defense System) ने उनके मंसूबों को हवा में ही क्रैश कर दिया। भारत ने दोबारा आक्रामक रुख अपनाते हुए ड्रोन और गाइडेड मिसाइलों की झड़ी लगा दी, जिसने पाकिस्तान के मुख्य 'नूर खान एयरबेस' (Noor Khan Airbase) सहित कई सामरिक ठिकानों को भारी नुकसान पहुंचाया, जिसके बाद पाकिस्तान पूरी तरह घुटनों पर आ गया था।

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