कमर दर्द हो या अचानक लगी चोट, गर्म सिकाई करें या ठंडी, दर्द से तुरंत राहत पाने का सही मेडिकल तरीका

दैनिक भागदौड़, खेलकूद या घरेलू कामकाज के दौरान अचानक चोट लग जाना, मोच आ जाना या फिर लंबे समय तक कुर्सी पर बैठने से कमर में तेज दर्द होना एक बेहद आम समस्या है। ऐसी स्थिति में प्राथमिक उपचार के तौर पर डॉक्टर या घर के बुजुर्ग अक्सर सिकाई करने की सलाह देते हैं। लेकिन ज्यादातर लोग इस असमंजस में पड़ जाते हैं कि किस तरह के दर्द में बर्फ की ठंडी सिकाई (कोल्ड थेरेपी) करनी चाहिए और कब गर्म पानी या हीटिंग पैड से सिकाई (हीट थेरेपी) फायदेमंद रहती है। सही जानकारी न होने पर गलत सिकाई करने से दर्द और सूजन कम होने के बजाय और अधिक बढ़ सकती है। इसलिए यह समझना बेहद आवश्यक है कि शरीर पर लगी चोट नई है या पुरानी, और शरीर की नसें व मांसपेशियां किस तरह की थेरेपी पर सकारात्मक प्रतिक्रिया देती हैं।
कब करें बर्फ की ठंडी सिकाई: नई चोट, मोच और सूजन को दबाने के लिए कोल्ड थेरेपी का विज्ञान
ठंडी सिकाई यानी क्रायोथेरेपी का उपयोग हमेशा तीव्र और नई चोटों के लिए किया जाता है। जब भी शरीर के किसी हिस्से पर अचानक चोट लगती है, पैर मुड़ जाता है, मांसपेशियों में खिंचाव आता है या सूजन उभरने लगती है, तब चोट लगने के शुरुआती 24 से 48 घंटे के भीतर केवल और केवल बर्फ की सिकाई ही सबसे प्रभावी मानी जाती है। विज्ञान के अनुसार, बर्फ की ठंडक चोट वाले हिस्से की क्षतिग्रस्त और फैली हुई रक्त वाहिकाओं (ब्लड वेसल्स) को तुरंत सिकोड़ देती है, जिसे मेडिकल भाषा में वैसोकॉन्स्ट्रिक्शन कहा जाता है। रक्त का बहाव धीमा होने से उस जगह पर आंतरिक रक्तस्राव रुकता है, अतिरिक्त तरल पदार्थ जमा नहीं हो पाता और सूजन तेजी से घटती है। इसके साथ ही ठंडक तंत्रिकाओं (नसों) को अस्थायी रूप से सुन्न कर देती है, जिससे मस्तिष्क तक दर्द के संकेत नहीं पहुंच पाते और व्यक्ति को फौरी राहत मिलती है। यह थेरेपी अचानक लगी खेल की चोट, माइग्रेन या तेज सिरदर्द, तेज बुखार में शरीर का तापमान घटाने और गठिया के अचानक भड़के दर्द में अत्यंत असरदार साबित होती है।
आइस पैक के इस्तेमाल का सही तरीका: सीधे त्वचा पर कभी न लगाएं बर्फ
बर्फ की सिकाई करते समय कुछ सावधानियां बरतना बेहद जरूरी है ताकि त्वचा को कोल्ड बर्न या नुकसान न पहुंचे। कभी भी बर्फ के टुकड़े को सीधे नंगी त्वचा पर नहीं रगड़ना चाहिए। इसके लिए हमेशा बाजार में मिलने वाले जेल आधारित आइस पैक का इस्तेमाल करें या फिर घर में बर्फ के टुकड़ों को किसी साफ सूती कपड़े या तौलिए में लपेटकर प्रभावित जगह पर रखें। यदि बर्फ उपलब्ध न हो, तो ठंडे पानी में तौलिया भिगोकर भी सिंकाई की जा सकती है। प्रभावित अंग पर 5 से 10 मिनट तक पैक रखें और फिर हटा लें। इस प्रक्रिया को हर एक से दो घंटे के अंतराल पर दोहराया जा सकता है। ध्यान रहे कि अगर सिकाई के दौरान त्वचा अत्यधिक सुन्न पड़ने लगे या चुभन महसूस हो, तो पैक को तुरंत हटा लेना चाहिए।
कब करें गर्म सिकाई: मांसपेशियों की पुरानी जकड़न, ऐंठन और कमर दर्द में हीट थेरेपी का कमाल
गर्म सिकाई यानी थर्मोथेरेपी का इस्तेमाल हमेशा 72 घंटे से अधिक पुराने दर्दों और गंभीर जकड़न के इलाज के लिए किया जाता है। जब चोट पुरानी हो चुकी हो, सूजन पूरी तरह खत्म हो गई हो लेकिन मांसपेशियों में खिंचाव, अकड़न या सुस्ती बनी रहे, तब गर्म सिकाई सबसे बेहतरीन उपचार है। लंबे समय से परेशान कर रहे पुराने कमर दर्द, सर्वाइकल पेन, साइटिका, कंधों की अकड़न और वर्क-फ्रॉम-होम के कारण रीढ़ की हड्डी में आए तनाव को दूर करने के लिए हीट थेरेपी रामबाण की तरह काम करती है। गर्म तापमान त्वचा और मांसपेशियों के भीतर रक्त वाहिकाओं को चौड़ा करता है, जिससे प्रभावित हिस्से में ऑक्सीजन और पोषक तत्वों से भरपूर रक्त का प्रवाह बढ़ जाता है। बढ़ा हुआ ब्लड सर्कुलेशन मांसपेशियों में जमा लैक्टिक एसिड को बाहर निकालता है और टिशूज को ढीला कर लचीला बनाता है। इसके अलावा, महिलाओं में पीरियड्स के दौरान पेट में होने वाले क्रैम्प्स, तनाव जनित सिरदर्द और मांसपेशियों की गांठों (मसल्स नॉट्स) को खोलने में गर्म सिकाई तुरंत आराम पहुंचाती है।
गर्म सिकाई करते समय इन बातों का रखें ध्यान: तापमान और समय का संतुलन है बेहद जरूरी
हीट थेरेपी लेते समय सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि पानी या हीटिंग पैड का तापमान बहुत अधिक खौलता हुआ नहीं होना चाहिए। पानी को हमेशा मध्यम या सहने योग्य तापमान तक ही गर्म करें ताकि त्वचा जलने का कोई जोखिम न रहे। हॉट वाटर बैग, इलेक्ट्रिक हीटिंग पैड या गर्म पानी में निचोड़े गए तौलिए से दर्द वाले हिस्से पर 3 से 4 मिनट तक सिकाई करें और बीच-बीच में त्वचा को चेक करते रहें कि कहीं लाल चकत्ते तो नहीं पड़ रहे हैं। यदि त्वचा पर अत्यधिक जलन या चुभन महसूस हो, तो सिकाई तुरंत बंद कर दें। सामान्य तौर पर दिन में दो बार 15 से 20 मिनट के लिए गर्म सिकाई करना पुराने दर्दों से स्थायी राहत दिलाने के लिए पर्याप्त माना जाता है। सही समय पर सही सिकाई का चुनाव करके आप बिना किसी दवा के भी अपने शरीर को दर्दमुक्त और चुस्त-दुरुस्त रख सकते हैं।