गोरखनाथ थाने का बड़ा खेल: 22 फर्जी पासपोर्ट खुलासों के बाद सिपाही गिरफ्तार, पंजाब के गैंगस्टर का कनेक्शन भी आया सामने

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के गृह जिला गोरखपुर के गोरखनाथ थाने से जुड़ा फर्जी पासपोर्ट का बड़ा मामला सामने आया है। पुलिस ने इस सनसनीखेज मामले में कड़ी कार्रवाई करते हुए एक निलंबित सिपाही को गिरफ्तार कर शनिवार को जेल भेज दिया है। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि आरोपी सिपाही की महज दो साल की तैनाती के दौरान कुल 22 लोगों के पासपोर्ट फर्जी पतों और कूटरचित दस्तावेजों के आधार पर पुलिस सत्यापन कराकर जारी कर दिए गए थे। इस खुलासे के बाद से पुलिस और खुफिया विभाग में हड़कंप मचा हुआ है, और अब 30 से अधिक अन्य संदिग्ध पासपोर्ट भी गहन जांच के दायरे में आ चुके हैं।
बिना निवास सत्यापन के भेजी गई रिपोर्ट, पंजाब के कुख्यात गैंगस्टर का भी बन गया पासपोर्ट
पुलिस जांच के मुताबिक, आरोपी सिपाही शशिकांत यादव, जो मूलरूप से नुनहरा थाना क्षेत्र के नसिरपुरसिंह कुसुम का रहने वाला है और वर्तमान में जीआरपी में तैनात था, ने अपने पद का जमकर दुरुपयोग किया। उसने बिना किसी वास्तविक निवास सत्यापन के ही कई आवेदनों को सही करार देते हुए अपनी रिपोर्ट आगे बढ़ा दी, जिसके आधार पर पासपोर्ट आसानी से जारी हो गए। कई मामलों में आवेदकों का दिए गए पते से दूर-दूर तक कोई संबंध नहीं मिला, जबकि कुछ पते पूरी तरह से फर्जी पाए गए। इस पूरे प्रकरण का सबसे खतरनाक और चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि पंजाब के एक कुख्यात गैंगस्टर बिल्ला का पासपोर्ट भी गोरखनाथ क्षेत्र के इसी तरह के एक फर्जी पते पर आसानी से बन गया था। जब बाद में यह बात सामने आई कि वह उस पते पर कभी नहीं रहा, तब जाकर पूरे फर्जीवाड़े की परतें खुलीं।
पहले भी हो चुकी हैं गिरफ्तारियां, सिपाही से पूछताछ में खुलेंगे बड़े राज
इस बड़े फर्जीवाड़े का खुलासा होने के बाद पुलिस ने तत्परता दिखाते हुए पहले ही तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था, जिसके बाद तत्कालीन सिपाही शशिकांत यादव को निलंबित कर दिया गया था और उसके खिलाफ विभागीय जांच बिठाई गई थी। अब पर्याप्त सबूत मिलने के बाद पुलिस ने उसे भी विधिवत गिरफ्तार कर लिया है। पुलिस अब सिपाही से गहन पूछताछ कर यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि इस संगठित नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल थे और फर्जी सत्यापन के एवจ में कितनी मोटी रकम वसूली जाती थी। अधिकारियों का कहना है कि जिन-जिन पासपोर्टों का सत्यापन संदिग्ध पाया गया है, उनकी दोबारा बारीकी से जांच कराई जा रही है और यदि इसमें अन्य किसी कर्मचारी या बाहरी व्यक्ति की संलिप्तता मिलती है तो उसके खिलाफ भी सख्त कानूनी शिकंजा कसा जाएगा।
9 मार्च 2025 को हुआ था फर्जी पासपोर्ट गिरोह का बड़ा पर्दाफाश
इस पूरे गोरखधंधे की शुरुआत 9 मार्च 2025 को हुई थी, जब गोरखनाथ थाना पुलिस ने फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से पासपोर्ट बनवाने वाले एक शातिर गिरोह का पर्दाफाश किया था। उस दौरान पुलिस ने विशाल सिंह और हरेंद्र प्रताप को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से कई कूटरचित पहचान पत्र, फर्जी बैंक दस्तावेज और मोबाइल फोन बरामद किए थे। जांच में यह बात सामने आई थी कि राजेश सिंह के नाम से हुमायूंपुर उत्तरी के एक फर्जी पते पर पासपोर्ट तैयार करवाया गया था, जबकि वास्तविकता में उस पते पर कोई व्यक्ति रहता ही नहीं था। पूछताछ में यह भी खुलासा हुआ था कि आरोपी पासपोर्ट कार्यालय के आसपास सक्रिय रहकर फर्जी कागजात तैयार करते थे और भोले-भाले लोगों को अपने जाल में फंसाकर पासपोर्ट जारी करवाते थे।