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तुर्किये में सी-सेक्शन पर सरकार की बड़ी स्ट्राइक: 100 से ज्यादा गायनेकोलॉजिस्ट पर लगा जुर्माना, कई सस्पेंड; जानें क्या है तुर्किये की ‘नेचुरल बर्थ पॉलिसी’

तुर्किये (Turkey) में बिना चिकित्सकीय आवश्यकता के होने वाले सी-सेक्शन (सिजेरियन डिलीवरी) को लेकर सरकार की सख्ती अब एक बड़े विवाद का रूप ले चुकी है. देश के स्वास्थ्य मंत्रालय ने एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए 100 से अधिक प्रसूति एवं स्त्री रोग विशेषज्ञों (ऑब्स्टेट्रिशियन-गायनेकोलॉजिस्ट) पर गाज गिराई है.

अनावश्यक रूप से ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी करने के आरोपी इन डॉक्टरों पर भारी आर्थिक जुर्माना लगाया गया है. इतना ही नहीं, कई डॉक्टरों को क्लीनिकल ड्यूटी से अस्थायी रूप से सस्पेंड कर दिया गया है और उन्हें अनिवार्य रूप से दोबारा विशेष ट्रेनिंग लेने का निर्देश दिया गया है. सरकार के इस कड़े रुख के बाद देशभर के डॉक्टरों और मेडिकल संगठनों में भारी नाराजगी और आक्रोश देखा जा रहा है.

क्यों हुई डॉक्टरों पर यह सख्त कार्रवाई?

स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा की गई इस औचक और बड़ी कार्रवाई के पीछे मुख्य रूप से निम्नलिखित आरोप और कारण सामने आए हैं:

  • अनावश्यक सर्जरी की बाढ़: जिन डॉक्टरों पर एक्शन लिया गया है, उन पर आधिकारिक जांच में यह आरोप साबित हुआ है कि उन्होंने सामान्य (प्राकृतिक) प्रसव की संभावना होने के बावजूद जरूरत से ज्यादा और मनमाने ढंग से सी-सेक्शन किए.

  • कड़ी सजा का प्रावधान: नियमों के उल्लंघन पर मंत्रालय ने केवल चेतावनी नहीं दी, बल्कि सीधे तौर पर आर्थिक दंड, क्लीनिकल प्रैक्टिस पर अस्थायी निलंबन और अनिवार्य पुनः प्रशिक्षण जैसी सख्त अनुशासनात्मक कार्रवाई की है. तुर्किये के कई स्थानीय मेडिकल चैंबर्स ने भी इसकी पुष्टि की है.

अप्रैल 2025 में लागू हुआ था नया नियम: 'डिकेड ऑफ द फैमिली'

तुर्किये में यह विवाद रातों-रात पैदा नहीं हुआ है. दरअसल, अप्रैल 2025 में तुर्किये सरकार ने एक बड़ा कानून लागू करते हुए निजी और सरकारी अस्पतालों में बिना किसी ठोस मेडिकल इमरजेंसी के होने वाले वैकल्पिक (Elective) सी-सेक्शन पर पूरी तरह रोक लगा दी थी.

  • प्राकृतिक प्रसव को प्राथमिकता: सरकार का स्पष्ट स्टैंड है कि यदि मां या होने वाले बच्चे की जान को कोई खतरा नहीं है, तो डॉक्टरों को हर हाल में सामान्य प्रसव (वजाइनल डिलीवरी) को ही प्राथमिकता देनी होगी.

  • राष्ट्रपति एर्दोआन की बड़ी पहल: यह सख्त कानून राष्ट्रपति रेचेप तैयप एर्दोआन के 'डिकेड ऑफ द फैमिली' (परिवार का दशक) अभियान का हिस्सा है. इस राष्ट्रीय अभियान का मुख्य उद्देश्य देश में लगातार गिरती जन्म दर (Birth Rate) को सुधारना और महिलाओं को प्राकृतिक प्रसव के लिए प्रोत्साहित करना है.

OECD देशों में शीर्ष पर है तुर्किये: सी-सेक्शन के चौंकाने वाले आंकड़े

आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (OECD) के 38 सदस्य देशों की सूची में तुर्किये सी-सेक्शन की दर के मामले में दुनिया में पहले स्थान पर काबिज है.

  • 61.5% डिलीवरी ऑपरेशन से: उपलब्ध आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2023 में तुर्किये में हर 1,000 जीवित जन्मों में से लगभग 615 बच्चों का जन्म सी-सेक्शन के जरिए हुआ था. यानी देश में होने वाली कुल डिलीवरी में से करीब 61.5 प्रतिशत मामले ऑपरेशन के थे, जिसे विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के मानकों के लिहाज से बेहद खतरनाक और असामान्य माना गया है.

क्या है तुर्किये की 'नेचुरल बर्थ पॉलिसी'? (Natural Birth Policy)

तुर्किये के स्वास्थ्य मंत्रालय की इस नीति का मूल एजेंडा देश में सिजेरियन के बढ़ते ग्राफ को नीचे लाना है. इसके तहत ये मुख्य बिंदु शामिल हैं:

  1. जहां भी चिकित्सकीय रूप से 1% भी संभावना हो, वहां नॉर्मल डिलीवरी को बढ़ावा दिया जाए.

  2. सी-सेक्शन का इस्तेमाल केवल और केवल तभी हो, जब मां या शिशु की जान पर संकट हो.

  3. गर्भवती महिलाओं को ऑपरेशन से होने वाले दूरगामी नुकसानों और नॉर्मल डिलीवरी के फायदों के प्रति जागरूक करना.

  4. अस्पतालों को डब्ल्यूएचओ (WHO) के तय वैश्विक दिशा-निर्देशों के अनुरूप प्रसव प्रबंधन के लिए बाध्य करना.

WHO (विश्व स्वास्थ्य संगठन) का नजरिया:

डब्ल्यूएचओ का स्पष्ट मानना है कि सी-सेक्शन केवल एक जीवन रक्षक सर्जरी है. बिना जरूरत के केवल सी-सेक्शन की दरें बढ़ाने से मातृ स्वास्थ्य या नवजात शिशु के स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं होता, बल्कि इससे मां के शरीर पर अनावश्यक सर्जिकल जोखिम और अस्पताल का आर्थिक बोझ बढ़ जाता है.

डॉक्टरों का पलटवार: "यह पेशेवर स्वतंत्रता पर प्रशासनिक हमला है"

इस कार्रवाई के बाद तुर्किये मेडिकल एसोसिएशन (TTB) और अंटाल्या चैंबर ऑफ फिजिशियंस सरकार के सामने आ गए हैं.

  • सिस्टम की खामी: टीटीबी की वरिष्ठ पदाधिकारी डॉ. आयशे गुल्टेकिंगिल का कहना है कि सी-सेक्शन की ऊंची दर के लिए केवल डॉक्टरों को सूली पर चढ़ाना गलत है. यह एक व्यापक और स्ट्रक्चरल (ढांचागत) समस्या है.

  • मरीज की स्थिति सर्वोपरि: डॉक्टरों का तर्क है कि किसी महिला की डिलीवरी कैसे होगी, यह कोई प्रशासनिक अधिकारी तय नहीं कर सकता. इसके पीछे अस्पतालों की कार्यप्रणाली, इमरजेंसी इंफ्रास्ट्रक्चर की कमी, कानूनी मुकदमों का डर और खुद मरीज की शारीरिक स्थिति जैसे कई जटिल कारण होते हैं. आलोचकों का यह भी कहना है कि इस नीति से महिलाओं की अपनी बॉडी और प्रसव का तरीका चुनने की व्यक्तिगत स्वतंत्रता (Reproductive Freedom) का हनन हो रहा है.

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